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दुनिया

जिन्ना विवाद पर अफ़सोस नहीं: जसवंत सिंह

भारत के पूर्व विदेश और वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने कहा है कि विवादास्पद किताब में मोहम्मद अली जिन्ना पर लिखने का उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है. जिन्ना की तारीफ़ करने पर जसवंत सिंह को बीजेपी ने पार्टी से बर्ख़ास्त कर दिया था.

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जसवंत सिंह

इस्लामाबाद में जसवंत सिंह की किताब 'जिन्ना: इंडिया पार्टीशन एंड इंडीपेंडेंस' के आधिकारिक विमोचन के लिए बुधवार को एक समारोह हो रहा है जिसमें मंत्री, राजनियक और कई सांसद शामिल होंगे. समारोह से एक दिन पहले कराची में जसवंत सिंह ने कहा कि उस किताब में जो कुछ भी उन्होंने लिखा है उस पर वह अडिग हैं.

जसवंत सिंह ने कहा कि जिस तरह से उनकी किताब को भारत और पाकिस्तान में पसंद किया गया है उससे उन्हें बेहद ख़ुशी हुई है. हालांकि किताब के विवादों में घिरने से जसवंत थोड़ा परेशान ज़रूर दिखे और उन्होंने कहा कि एक लेखक की किताब उसके बच्चे जैसी होती है. अगर उसे जलाया जाता है तो लेखक को बहुत दुख पहुंचता है. "किताब को जलाना जवाब नहीं है. किताब में उठाए गए सवालों का जवाब दूसरी किताब से ही दिया जाना चाहिए."

पिछले साल जसवंत सिंह ने पाकिस्तान के क़ायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना पर किताब लिखी लेकिन उसमें जिन्ना की तारीफ़ किए जाने से विवाद खड़ा हो गया. अपनी किताब में जसवंत सिंह ने जिन्ना की प्रशंसा की है और विभाजन की ज़िम्मेदारी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी डाली थी. जसवंत सिंह से भारतीय जनता पार्टी बेहद नाराज़ थी और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.

कराची में पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को मिल कर काम करने की ज़रूरत है ताकि द्विपक्षीय संबंधों को 1965 की लड़ाई के पहले जैसा बनाया जा सके. "दोनों देशों कई बातों को साझा करते हैं और रिश्तों को बेहतर बनाए जाने की ज़रूरत है. आपसी बातचीत से कश्मीर का मुद्दा भी सुलझ सकता है."

जसवंत सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि दोनों देशों को बातचीत के प्रयास जारी रखने चाहिए. एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान को अपने मुद्दों को आपस में ही सुलझाना होगा. जसवंत सिंह का कहना है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में बेहतरी के लिए किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं देखते.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एम गोपालकृष्णन

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