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ताना बाना

जिनताओ बोले, सुधारेंगे मानवाधिकार

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति हू जिनताओ के बीच बुधवार को हुई बैठक में मानवाधिकारों और आर्थिक रिश्तों का मुद्दा छाया रहा. जिनताओ ने माना कि मानवाधिकारों के मामले में चीन को अभी और कदम उठाने की जरूरत.

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चीनी राष्ट्रपति हू जिनताओ से जब एक अमेरिकी रिपोर्टर ने दोनों देशों में मानवाधिकारों की स्थिति पर अंतर के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले उसका जवाब नहीं दिया. लेकिन यही सवाल बाद में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहला सवाल पूछे जाते समय तकनीकी कारणों से उन्हें वह ढंग से समझ में नहीं आया और इसके चलते वह जवाब नहीं दे पाए. अपने

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जवाब में जिनताओ ने कहा, "चीन मानवाधिकारों के प्रसार और उनकी रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. चीन ने इस क्षेत्र में काफी प्रगति की है."

विकास की चुनौतियां

जिनताओ के मुताबिक चीन भी मानवाधिकारों की सर्वव्यापकता को मानता है लेकिन सभी देशों की स्थिति एक जैसी नहीं है. उन्होंने कहा, "चीन एक विकासशील देश है और उसकी जनसंख्या काफी ज्यादा है. चीन एक ऐसा विकासशील देश है जो सुधार के चरण से गुजर रहा है और इसके चलते आर्थिक और सामाजिक विकास के मुद्दे पर उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चीन में मानवाधिकारों की स्थिति और बेहतर हो सकती है."

हू जिनताओ के मुताबिक वह अमेरिका और अन्य देशों के साथ मानवाधिकारों के मुद्दे पर बातचीत के पक्षधर हैं लेकिन यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि दूसरे देशों के आंतरिक मसलों में दखल दिए जाने से बचना होगा.

ओबामा ने जताया भरोसा

चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था अमेरिका के लिए खतरा बताया जा रहा है लेकिन राष्ट्रपति ओबामा ने साफ किया कि वह चीन में आर्थिक विकास को दुनिया की बेहतरी के तौर पर देखते हैं. उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि चीन का शांतिपूर्ण तरीके से विकास दुनिया के लिए अच्छा है और अमेरिका के लिए भी यह बेहतर है. हम चीन के अधिकारों का स्वागत करते हैं. हम सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीन का कद इस तरह बढ़े कि इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय नियमों, कानूनों का ख्याल रखा जाए और दुनिया में शांति और सुरक्षा कायम हो सके."

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बढ़ेंगे साथ साथ

दोनों नेताओं ने आतंकवाद और व्यापार जैसे जटिल मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है. मानवाधिकार का मुद्दा दोनों देशों के बीच तकरार का कारण रहा है और मुलाकात में इस मुद्दे पर भी बात हुई. ओबामा ने माना कि चीन में मानवाधिकारों की स्थिति से दोनों देशों की सरकारों में तनाव पनपता रहा है. उन्होंने कहा, "कुछ अधिकारों के मामले में हम चाहते हैं कि दुनिया में सभी को ये हासिल हों. जैसे अभिव्यक्ति का अधिकार, धार्मिक अधिकार और एकजुट हो कर अपनी बात कहने का अधिकार." वैसे ओबामा ने यह स्पष्ट किया कि अगर कुछ मुद्दों पर अमेरिका और चीन में मतभेद हैं तो इसका यह अर्थ नहीं है कि अन्य मुद्दों पर वे सहयोग नहीं कर सकते.

युआन पर मतभेद

युआन मुद्रा के मुद्दे पर ओबामा ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि चीनी मुद्रा की कीमत जानबूझकर कम रखी गई है जिसके चलते चीनी सामान अमेरिका में सस्ते हो जाते हैं जबकि चीन में अमेरिकी सामान महंगे हो रहे हैं. ओबामा के मुताबिक उन्होंने चीनी राष्ट्रपति से इस मसले पर बात कर उन्हें कहा है कि चीनी मुद्रा को लचीला बनाए जाने के कदमों को वह स्वागत करेंगे. दोनों देशों के बीच मजबूत होते आर्थिक रिश्तों के तहत कई व्यापारिक समझौते हुए हैं जिससे व्यापार में 45 अरब डॉलर का इजाफा होगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: वी कुमार

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