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दुनिया

जासूसी के आरोपों में घिरा अमेरिका

अमेरिका के निगरानी कार्यक्रम पर आलोचनाओं की बिजली गिरा कर ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ ने संयुक्त राष्ट्र वार्षिक आमसभा में हंगामा खड़ा कर दिया. खबर यह भी है कि भारतीय दूतावास भी अमेरिकी जासूसों की निगरानी में है.

ब्राजील की राष्ट्रपति ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के उनके देश से गुजरने वाले फोन कॉल और ईमेल की निगरानी पर अमेरिका को जम कर खरी खोटी सुनाई है. ब्राजीलियाई राष्ट्रपति का आरोप है कि उनके फोनकॉल की भी निगरानी की जा रही है. राष्ट्रपति ने इसे "मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन कहा है." नाराज डिल्मा रूसेफ ने तो यहां तक कह दिया, "संप्रभुता के लिए सम्मान की गैरमौजूदगी में देशों के बीच संबंधों का कोई आधार नहीं है." रूसेफ ने साफ साफ कहा, "दोस्ताना सरकारें और समाज जो सही मायने में रणनीतिक साझेदारी बनाना चाहती हैं, उन्हें लगातार अवैध हरकतें करने नहीं दिया जा सकता जैसे ये कोई आम बात हो. ये स्वीकार्य नहीं हैं." रूसेफ ने अमेरिकी जासूसी कार्यक्रम के बारे में पता चलने के बाद पिछले हफ्ते अपना अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया.

ब्राजील अटलांटिक के पार फाइबर ऑप्टिक केबल्स के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं. अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए को आतंकवादियों के संचार पर नजर रखने की जिम्मेदारी है और इसका फायदा उठा कर उसने कथित रूप से ब्राजील की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोब्रास के कंप्यूटर भी हैक कर लिए. रूसेफ ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए ने आर्थिक और रणनीतिक रूप से अहम कारोबारी आंकड़े चुराए. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र और खुद उनके दफ्तर के रायनयिकों के संदेशों तक भी एनएसए पहुंच गया. उनका कहना है कि ब्राजील के आम लोगों की निजी जानकारियों में भी बड़े पैमाने पर जासूसी की गई है.

रूसेफ ने इस दलील को भी खारिज किया कि आतंकवाद से बचाने के लिए यह निगरानी कार्यक्रम चलाया गया है. उनका कहना है कि ब्राजील "खुद को कैसे बचाना है यह जानता है. हम आतंकवाद को प्रश्रय नहीं देते, उनसे लड़ते हैं और उन्हें खारिज करते हैं." ब्राजील ने अमेरिका से माफी मांगने और यह भरोसा देने को कहा है कि आगे से निगरानी नहीं की जाएगी.

इधर ओबामा प्रशासन का कहना है कि उसका निगरानी कार्यक्रम जब तक किसी संदेश पर शंका करने का सबूत न हो उसकी जांच नहीं करता. हालांकि ब्राजील मीडिया में जिस तरह की खबर आई है उससे पता चलता है कि खुद रूसेफ के ईमेल भी पढ़े गए.

इस बीच यह भी खबर आई है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए ने वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास और न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के भारतीय दफ्तर को उन्नत निगरानी उपकरणों के जरिए निशाना बनाने की कोशिश है. इसके तहत कंप्यूटर हार्ड डिस्क की कॉपी की गई है. बुधवार को एक अखबार ने इस बारे में खबर छापी है. गार्डियन अखबार के रिपोर्टर ग्लेन ग्रीनवाल्ड के हवाले से भारतीय अखबार हिंदू ने यह खबर दी है. दोनों अखबारों के बीच समझौता है. ग्लेन ग्रीनवाल्ड का कहना है कि गहन जासूसी के लिए चुने गए देशों की अत्यंत गोपनीय सूची में भारत भी शामिल है. यह खबर खुफिया एजेंसी की अंदरूनी गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से दी गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक एनएसए ने 38 दूतावासों और कूटनीतिक मिशन को निशाना बनाया है.

एनएसए कॉन्ट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन के जरिए सामने आई जानकारियों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच पहले ही तनाव बढ़ा रखा है. जर्मनी ने भी जासूसी की जानकारी सामने आने पर अमेरिका से सख्त आपत्ति जताई थी. भारत और अमेरिका ने पिछली कड़वाहटों को भुला कर एक दशक से आपसी संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार को राष्ट्रपति बराक ओबामा से अलग से मुलाकात भी कर रहे हैं. दोनों नेताओं की बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है.

एनआर/एमजे (एपी, एएफपी)

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