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दुनिया

जासूसी की खबरों पर भड़का यूरोप

अमेरिका अपने परम सहयोगी माने जाने वाले यूरोपीय संघ के देशों की भी जासूसी करता है. जर्मन पत्रिका में इस बारे में रिपोर्ट छपी है और यूरोपीय संघ ने अब इस पर अमेरिका से सफाई देने को कहा है.

जर्मन पत्रिका डेयर श्पीगल ने खबर दी है कि अमेरिका यूरोपीय संघ के वॉशिंगटन, ब्रसेल्स और संयक्त राष्ट्र के दफ्तरों की जासूसी करता है. यूरोपीय संघ ने अमेरिका से जर्मन पत्रिका में छपी इस रिपोर्ट पर सफाई मांगने के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है. यूरोपीय संघ के विदेश मामलों की प्रमुख कैथरीन एश्टन ने रविवार को बताया कि रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी अधिकारियों से तुरंत संपर्क किया गया. एश्टन ने बयान जारी कर कहा है, "जैसे ही हमने इन खबरों को देखा यूरोपीयन एक्सटर्नल एक्शन सर्विस ने वाशिंगटन और ब्रसेल्स में अमेरिका अधिकारियों से संपर्क कर तुरंत सफाई देने और इस मामले की सच्चाई बताने को कहा." एश्टन ने यह भी कहा, "अमेरिकी अधिकारियों ने हमसे कहा कि वो इन खबरों की सच्चाई के बारे में जांच कर रहे हैं और जितनी जल्दी हो सकेगा इस बारे में जवाब देंगे."(कैसे होती है इंटरनेट पर जासूसी)

फ्रांस ने भी इस मामले में सफाई मांगी है. फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेंट फाबियस ने कहा है कि अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा. उधर अमेरिका ने कहा है कि वह इस बारे में कूटनीतिक चैनलों के जरिए जवाब देगा. अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक के प्रवक्ता ने कहा है, "हम इन मुद्दों पर यूरोपीय संघ के सदस्यों के साथ द्वीपक्षीय बातचीत में चर्चा करेंगे. तब तक हम कथित खुफिया गतिविधियों के बारे में सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं देंगे. जहां तक नीतियों की बात है तो हम पहले ही साफ कर चुके हैं कि अमेरिका उन्हीं विदेशी सूचनाओं को जमा करता है जैसी दुनिया के बाकी देश करते हैं."

शनिवार को डेयर श्पीगल ने एक रिपोर्ट छापी जिसमें कहा गया है कि अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी ने यूरोपीय संघ के दफ्तरों में घुसपैठ कर वहां के कंप्यूटर नेटवर्क तक अपनी पहुंच बना ली है. इसके बाद रविवार को इसी रिपोर्ट के फॉलोअप में बताया गया है कि अमेरिकी एजेंसी ने एक खास महीने में जर्मनी के 50 लाख फोन कॉल, ईमेल और एसएमएस टैप किए. यह किसी और यूरोपीय देश, चीन या इराक के टैप किए आंकड़ों की तुलना में बहुत ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी ने दक्षिण और पश्चिम जर्मनी में सीरिया और माली के आंकड़ों का प्रबंधन देखने वाले इंटरनेट हब के आंकडो़ं का भी इस्तेमाल किया.

अमेरिका के जासूसी कार्यक्रम के बारे में एनएसए के भगोड़े कांट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन ने खबर दी थी और इसके बाद से ही अमेरिका और उसके बाहर बवाल मचा है. राष्ट्रीय सुरक्षा और निजता के अधिकार में संतुलन पर चर्चा गर्म हो गई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां जिस तरह से निगरानी कर रही हैं उससे यूरोप में खासतौर से चिंता है.

जर्मनी की न्याय मंत्री साबिने लायथहॉयसर श्नारेनबेर्गर ने कहा है, "अगर मीडिया की खबरें सही है तो यह शीत युद्ध के दौरान दुश्मन देशों की हरकत की याद दिला रही हैं. यह कल्पना से परे है कि अमेरिका में हमारे दोस्त यूरोपीय लोगों को दुश्मनों की तरह देखते हैं." जर्मन न्याय मंत्री ने यह भी कहा है कि इसे आतंकवाद से जंग के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता.(जर्मनी भी करता है नेट जासूसी)

जर्मनी की राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर अधिकार रखने वाले संघीय अभियोजन कार्यालय का कहना है कि वह अभी यह देख रहा है कि इस मामले में जांच शुरू की जाए या नहीं. विभाग की प्रवक्ता का कहना है कि आपराधिक मुकदमा दायर होने की उम्मीद है. जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने ताजा रिपोर्ट पर तो बयान नहीं दिया है लेकिन हाल ही में बर्लिन दौरे पर आए बराक ओबामा से उन्होंने जरूर कहा था कि निगरानी की सीमा होनी चाहिए. हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई दबाव बनाने से इनकार कर दिया.

एनआर/पीई(रॉयटर्स)

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