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दुनिया

'जापान पर दबाव नहीं डालेगा भारत'

पूर्वी एशिया के दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि जापान को परमाणु करार के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दो परमाणु हमले झेलने वाला जापान इस मामले में खासा संवेदनशील है.

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दो दिन के दौरे पर जापान पहुंचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान की कंपनियों को भारत में निवेश करने का न्योता दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अच्छे आधारभूत ढांचे की जरूरत है, जापानी कंपनियां इस क्षेत्र में भारत में निवेश कर सकती हैं.

भारत की कोशिश जापान से भी असैन्य परमाणु करार करने की थी. दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इसे लेकर काफी समय से बातचीत भी चल रही थी. लेकिन टोक्यो ने साफ कर दिया कि अगर भारत भविष्य में परमाणु परीक्षण करेगा तो करार रद्द हो जाएगा.

जापान के कड़े रुख के बाद भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर जापान पर दबाव नहीं डालेंगे. उनके मुताबिक इस मसले पर जापान की संवेदनशीलता समझी जा सकती है. मनमोहन ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि भारत के शांतिपूर्ण असैन्य परमाणु उद्योग के प्रसार में जापान साझेदारी निभाएगा.'' सिंह ने जापानी कंपनियों को इस क्षेत्र में भी निवेश करने का न्योता दिया.

जापान दुनिया का अकेला देश है, जिसने परमाणु हमले झेले हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए. परमाणु हमले के बाद चार महीनों में करीब 2,50,000 लोगों की मौत हो गई. इन हमलों से विश्वयुद्ध खत्म हो गया लेकिन आज भी नागासाकी और हिरोशिमा के कई निवासी और बच्चे रेडियोधर्मिता के शिकार हैं. 1945 के बाद से ही युद्ध और परमाणु हथियारों को लेकर जापान की मानसिकता ही बदल गई है.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: वी कुमार

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