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मनोरंजन

जापान के बेथोफेन ने मांगी माफी

जर्मनी के बेथोफेन को संगीत का भगवान कहा जाता है. उनसे किसी की तुलना होना अपने आप में ही बहुत बड़ी बात है. लेकिन जापान में जिसे यह रुतबा मिला, वह तो ठग निकला.

मामोरू सामूरागोची शुक्रवार को स्थानीय टीवी चैनल पर लोगों के सामने आए और बार बार झुक कर माफी मांगी. अक्सर लंबे बालों और काले चश्मे के साथ देखे जाने वाले सामूरागोची सीधे सादे से लिबास में आए. एक गहरी रंग की जैकेट पहने उन्होंने पत्रकारों के सामने कहा, "मैं सच बोलूंगा. आज मैं आखिरी बार कैमरे के सामने खड़ा हूं." उन्होंने कहा कि वे अपने चाहने वालों, निर्देशकों और संगीत से जुड़े सभी लोगों से माफी चाहते हैं क्योंकि उन्होंने सभी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है.

सामूरागोची को ले कर पिछले एक महीने से अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्होंने अपना संगीत खुद लिखा ही नहीं है. पत्रकारों के सामने उन्होंने इस आरोप को स्वीकारा और कहा कि वह 18 साल से तकाशी नीगाकी नाम के व्यक्ति के साथ काम करते आए हैं और उन्हीं से संगीत लिखवाते रहे हैं. दरअसल यह मामला सामने ही तब आया जब नीगाकी ने एक अखबार को बताया कि जापान के बेथोफेन के संगीत का असली चेहरा तो वे हैं. 'हिरोशिमा' नाम का सामूरागोची का रचा संगीत जापान में बहुत लोकप्रिय हुआ. अब पता चला है कि इसे भी नीगाकी से ही लिखवाया गया था.

Mamoru Samuragochi Archiv 2013

मामोरू सामूरागोची

साथ ही लोग सामूरागोची के साथ इसलिए भी भावनात्मक रूप से जुड़े रहे हैं क्योंकि उनके बारे में यह कहा जाता रहा है कि वह सुनने की क्षमता नहीं रखते. पर अब टेस्ट के बाद पता चला है कि यह भी झूठ है. जापान के लोग संगीत जगत के इतने बड़े झूठ से काफी आहत महसूस कर रहे हैं. अपनी सफाई में 50 साल के सामूरागोची ने कहा कि पिछले तीन साल से उनकी सुनने की क्षमता में लगातार सुधार होता रहा है लेकिन वे अब भी ठीक तरह सब नहीं सुन सकते. यहां तक कि पत्रकारों को इंटरव्यू देने के दौरान भी उन्हें अनुवादक की जरूरत पड़ती है जो संकेत की भाषा से उनकी मदद कर सके. जर्मनी के बेथोफेन 30 साल की उम्र से सुनने की क्षमता खोने लगे थे. अपने जीवन के आखिरी दशक में वह पूरी तरह बहरे हो चुके थे.

लोगों से माफी मांगते हुए सामूरागोची ने कहा, "मैंने अपने झूठ से सभी लोगों को तकलीफ पहुंचाई है, खास तौर से उन्हें जिन्होंने मेरी सीडी खरीदी, जो मेरे कंसर्ट देखने आए." उन्होंने कहा कि वह टोक्यो के एक कॉफी शॉप में नीगाकी से मिला करते थे और वहीं उसे बताते थे कि उन्हें किस तरह का संगीत चाहिए. मुश्किल तब शुरू हुई जब नीगाकी ज्यादा पैसे की मांग करने लगा, "मैं जानता हूं कि मैंने जो किया वह गलत है लेकिन यह भी सच है कि मैं अपने संगीत से निराश लोगों के जीवन में थोड़ा रस भर देना चाहता था." हाल ही में हुए सोची ओलंपिक खेलों में जापान के एक खिलाड़ी ने सामूरागोची के ही एक संगीत पर स्केटिंग की.

आईबी/एमजे (एएफपी, रॉयटर्स)

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