जापान के चुनाव में बदलाव के संकेत | दुनिया | DW | 15.12.2012
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दुनिया

जापान के चुनाव में बदलाव के संकेत

जापान में संसदीय चुनाव हो रहे हैं. राजनेता चुनाव से पहले आखिरी दम लगा कर लोगों से वोटों के लिए अपील करते दिखे. रुढ़िवादी लिबरल डेमोक्रैटिक पार्टी के सत्ता में वापसी के संकेतों के बीच शिंजो आबे दूसरी बार बागडोर संभालेंगे.

रविवार के चुनाव में एलडीपी की जीत का साफ मतलब होगा कि देश चीन के साथ इलाकाई विवादों में अपने तेवर कड़े करेगा. पिछले साल हुए फुकुशिमा हादसे के बावजूद परमाणु ऊर्जा के पक्ष में नीतियां बनेंगी, आसान मुद्रा नीति की रुपरेखा तय होगी और मजबूत हो रहे येन को नरम करने के लिए जम कर पैसा खर्च किया जाएगा. मीडिया सर्वे बता रहे हैं कि 480 सदस्यों वाली संसद के निचले सदन में एलडीपी भारी बहुमत हासिल करेगी. महज तीन साल पहले ही उसे करारी हार झेलनी पड़ी थी और तब 50 साल से करीब करीब बिना बाधा के चली आ रही कारोबार जगत के लिए मुफीद सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी. हालांकि सर्वे में ऐसे लोगों की तादाद भी बहुत बड़ी है जो ऐन चुनाव के पहले तक अपना मन नहीं बना पाए हैं.

एक छोटे सहयोगी के साथ आबे की एलडीपी दो तिहाई बहुमत हासिल कर लेगी, ऐसा माना जा रहा है. और इसके साथ ही करीब आधे दशक से नीतियों में चले आ रहे ठहराव का दौर खत्म होगा. न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और जापान से जुड़े मामलों के जानकार गेरी कर्टिस कहते हैं, "सचमुच यह किसी भूस्खलन की बजाय हिमस्खलन जैसा दिख रहा है." 58 साल के आबे ने करीब साल भर तक मुसीबतें झेलने के बाद 2007 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. आबे लगातार पूर्वी चीन सागर में छोटे छोटे द्वीपों के मामले में चीन से टकराव पर सख्त लहजे में बोल रहे हैं. हालांकि कुछ जानकारों ने यह उम्मीद रखी है कि उनका कड़ा रुख समय आने पर व्यवहारिक रुख में बदलेगा.

Japan Wahlkampf Shinzo Abe

शिंजो आबे

मीठी जुबान बोलने वाले आबे के दादा भी प्रधानमंत्री थे. वे पिछले छह सालों में जापान के सातवें प्रधानमंत्री होंगे. आबे 1947 में संविधान में सेना के मामले में तय की कई सीमाओं को भी कमजोर करने के पक्ष में हैं ताकि जापान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मामले में बड़ी भूमिका निभा सके. टोकियो के आकिहाबारा जिले में जापान का झंडा लहराती भारी भीड़ के सामने चुनाव से ठीक पहले आबे ने कहा, "हम निश्चित रूप से अमेरिका और जापान के गठबंधन को पहले जैसा कर देंगे और अपनी कूटनीतिक ताकत को हासिल करेंगे." ताली बजाती और खुशी से चहकती भीड़ के सामने आबे ने यह भी कहा, "और आप सबके साथ हम अपने खूबसूरत सागर और इलाकों की हिफाजत करेंगे चाहे कुछ भी हो जाए."

एलडीपी ने दशकों के शासन के दौरान परमाणु उर्जा को बढ़ावा दिया और माना जा रहा है कि वह परमाणु रिएक्टरों को दोबारा चालू करने की फिराक में लगी कंपनियों के प्रति दोस्ताना रुख अपनाएगी. पिछले साल मार्च में सूनामी और भूकंप के दौरान हुए फुकुशिमा हादसे के बाद रिएक्टरों को बंद कर दिया गया.

आबे का अर्थशास्त्र

आबे ने 2000 से चली आ रही अर्थव्यवस्था की मंदी से उबरने के लिए बड़े सार्वजनिक खर्चों की बात की है. कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि आबे के आर्थिक उपाय देश में तात्कालिक विकास का कारण बनेंगे और सरकार को 2014 में शुरुआती सेल्स टैक्स बढ़ाने के लिए आधार मिल जाएगा. इसके जरिए सरकार सार्वजनिक खर्चों को घटाने में कामयाब होगी जो फिलहाल जीडीपी की दुगुनी हो गई है. हालांकि इन सबसे देश की गंभीर समस्याएं खत्म हो जाएंगी इसके आसार कम ही हैं. जापान की अर्थव्यवस्था कई दशक से दुविधा में फंसी है. जापान की आबादी बूढ़ी हो रही है और सोनी जैसे बड़े कार्पोरेट ब्रैंड अब नकारा साबित हो रहे हैं.

Japan Wahlkampf Yoshihiko Noda

योशिहिको नोदा

योशिहिको नोदा की डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ जापान ने 2009 में कंपनियों की बजाय ग्राहकों के हित पर ज्यादा ध्यान देने और नीतियों से नौकरशाहों को दूर करने की बात कह कर सत्ता पर कब्जा कर लिया. कई लोग मानते हैं कि डीपीजे अपने वादों में नाकाम इसलिए रही क्योंकि पार्टी को शासन करने की बजाय पिछले साल के भूकंप, सूनामी और परमाणु हादसों से जूझना पड़ा. दोनों पार्टियों से निराश हो चुके लोग नई पार्टियों की तरफ भी रुझान दिखा रहे हैं. इसमें दक्षिणपंथी रुझान वाली जापान रेस्टोरेशन पार्टी भी है जो ओसाका के विख्यात मेयर तोरू हाशिमोतो ने बनाई है और जिसका नेतृत्व बुजुर्ग राष्ट्रवादी शिनतारो इशिहारा के हाथ में है.

सर्वे बता रहे हैं कि सत्ताधारी डीपीजे हारेगी और उसे 100 से भी कम सीटें मिलेंगी यानी तीन साल पहले मिली सीटों की एक तिहाई से भी कम. पार्टी की नीतियों को लेकर विरोध है, इसके अलावा सेल्स टैक्स बढ़ाने पर भी फूट बढ़ी है. सिर्फ इतना ही नहीं तीन सालों में नोडा के रूप में देश को तीसरा प्रधानमंत्री मिला है. ये सब बदलाव का संकेत दे रहे हैं.

एनआर/एमजे(रॉयटर्स)

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