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दुनिया

जापानी पीएम ने हरे किए जख्म

विश्वयुद्ध से पहले चीन और कोरिया में क्रूर कब्जे के लिए बदनाम जापान ने इतिहास के भूत को फिर छेड़ दिया है. जापानी प्रधानमंत्री शिन्जो आबे ने युद्ध स्मारक का दौरा कर चीन और दक्षिण कोरिया को बुरी तरह आहत कर दिया है.

राष्ट्रवादी रुख रखने वाले जापानी प्रधानमंत्री शिन्जो आबे के याशुकुनी युद्ध स्मारक के दौरे के बाद चीन और दक्षिण कोरिया ने तल्ख प्रतिक्रिया जताई. बीजिंग ने साफ शब्दों में कहा कि जापान अपने युद्ध उन्मादी इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रहा है. चीन ने इस दौरे की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि टोक्यो को "इसके नतीजे भुगतने के लिए तैयार" रहना चाहिए. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता किन गांग ने कहा, "जापानी नेता के याशुकुनी स्मारक जाने का मतलब यही है कि जापान की सैन्य आक्रामकता और उपनिवेशवादी सत्ता को खूबसूरती से पेश किया जाए."

दक्षिण कोरिया भी जापान पर बरसा है. जापान ने कोरियाई उपमहाद्वीप को 1910 से 1945 तक अपने कब्जे में रखा. इस दौरान लाखों लोग मारे गए. जापानी सैनिकों ने लाखों कोरियाई महिलाओं की इज्जत भी लूटी. यूरोप में जर्मनी की हार और 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में अमेरिकी परमाणु हमले के बाद विश्वयुद्ध तो खत्म हुआ लेकिन इससे जन्मे शीत युद्ध ने कोरिया को बांट दिया.

Japan-Schrein

युद्ध स्मारक में शिन्जो आबे

जख्म पर नमक

चीन और कोरिया के लिए जापान और उसकी हरकतों का इतिहास संवेदनशील मुद्दा है. शिन्जो के दौरे ने इसी संवेदना को झनझना दिया है. याशुकुनी स्मारक युद्ध में मारे गए 25 लाख जापानियों की याद में बनाया गया है. यहां चौदह ऐसे अधिकारियों के स्मृतिपटल भी हैं जिन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध के युद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा दी गई.

दक्षिण कोरिया के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री यू जिंग-रियोग ने जापानी प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा, "यह दौरा पुरानी सोच वाले व्यवहार को बनाए रखने जैसा है और बुनियादी तौर पर ये जापान और दक्षिण कोरिया के संबंधों को ही खराब नहीं करता है बल्कि पूर्वोत्तर एशिया में सहयोग और स्थिरता को भी नुकसान पहुंचाता है."

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान के भरोसेमंद सहयोगी बने अमेरिका ने भी शिन्जो आबे के दौरे को 'निराशाजनक' करार दिया है. अमेरिका के मुताबिक यह दौरा "जापान और उसके पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ाने" का काम करेगा.

शिन्जो की सफाई

प्रतिद्वंद्वी चीन के अलावा दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे सहयोगी के तल्ख रुख के बाद शिन्जो के लिए मामला संभालना मुश्किल हो रहा है. मामले को ठंडा करने की कोशिश करते हुए जापानी प्रधानमंत्री ने कहा, "याशुकुनी में युद्ध अपराधियों को श्रद्धाजंलि देने की कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं, लेकिन मेरे आज के दौरे का मकसद इस बात की तसदीक करना था कि जापान फिर कभी युद्ध का बोझ नहीं उठा सकता."

माफी भरे अंदाज में आबे ने कहा, "चीन और कोरियाई लोगों की भावनाएं आहत करने की मेरी कतई मंशा नहीं है. मुझे आशा है कि सब एक दूसरे के चरित्र का सम्मान करेंगे, स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और सम्मान के साथ चीन और कोरिया से दोस्ती खड़ी करेंगे."

युद्ध का जिन्न

जापान ने कुछ ही दिन पहले अपने रक्षा बजट में ऐतिहासिक रूप से भारी इजाफा किया है. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से जापान सैन्य तैयारियों को लेकर हमेशा ठंडा दिखाई पड़ा, लेकिन बीते कुछ सालों से उसे चीन की चिंता सता रही है. पूर्वी चीन सागर में कुछ द्वीप समूहों को लेकर उसका चीन से विवाद भी चल रहा है. दोनों देशों के बीच एक दूसरे की मछली मारने वाली नावों को धमकाना आम बात हो चुकी है. जापान के दक्षिणपंथी नेता लगातार कह रहे हैं कि उन्हें चीन से सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

टोक्यो यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर टाकेहिको यामामोटो भी मानते हैं कि प्रधानमंत्री का यह दौरा गलत समय में उठाया गलत कदम है. प्रोफेसर टाकेहिको कहते हैं, "यह दौरा निश्चित तौर पर खराब हालात को और बदतर बनाने का काम करेगा. यह भी संभव है कि यह वॉशिंगटन को इस चिंता में डाल दे कि जापान में दक्षिणपंथी संभावित सैन्य तैयारियों की तरफ बढ़ रहे हैं."

ओएसजे/एमजे (एएफपी, रॉयटर्स)

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