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विज्ञान

जानवर के भ्रूण में इंसानी स्टेम सेल

स्टेम सेल की मदद से एक नया अंग उगाया जा सकता है, इसका जवाब ढूंढने के लिए वैज्ञानिक एक अनोखी मांग कर रहे हैं. जिसमें अंगदान होगा लेकिन जानवरों का... इंसानों के लिए....

चाहे कोई नई दवा बनानी हो या फिर किसी अंग पर कोई शोध करना हो, इंसानों की सेहत सुधारने के लिए बलि जानवर ही चढ़ते हैं. हर तरह के टेस्ट चूहों, भेड़ या फिर किसी न किसी जानवर पर ही किए जाते हैं. अब जापान में वैज्ञानिक यह मांग कर रहे हैं कि जानवर के भ्रूण में इंसानी स्टेम सेल डाल कर पता लगाया जाए कि भ्रूण में उसका विकास कैसे होता है.

दरअसल वैज्ञानिक चाह रहे हैं कि भविष्य में गर्भावस्था के दौरान ही पता लगा लिया जाए कि बच्चे की सेहत को किस तरह का खतरा है और पैदा होने से पहले ही उसका इलाज भी कर दिया जाए. भ्रूण में किसी अंग की कमी होने से स्टेम सेल की मदद से उसे उगाने की कोशिश की जा सकती है. इसके लिए जरूरी है कि देखा जाए कि भ्रूण में स्टेम सेल का विकास कैसे होता है. जाहिर है इंसानी भ्रूण पर यह प्रयोग नहीं हो सकता. इसीलिए जापान के वैज्ञानिक किसी जानवर में स्टेम सेल के विकास को देखना चाहते हैं. इसे शिमेरिक एम्ब्रियो का नाम दिया गया है.

जानवर करेंगे अंगदान

किसी अंग के खराब हो जाने के बाद एक यही विकल्प बचता है कि किसी और व्यक्ति का अंग लगा दिया जाए, लेकिन दुनिया भर में अंगदाताओं की कमी होने के कारण लाखों लोग नए दिल या गुर्दे के इंतजार में हैं. अब जानवरों को इस काम के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. जानवर के भ्रूण में जब स्टेम सेल की मदद से इंसानी गुर्दा या कलेजा पूरी तरह उग जाएगा, तो उसे वहां से निकाल कर इंसान में लगा दिया जाएगा.

वैज्ञानिकों के साथ साथ कानून के जानकार और पत्रकार भी मिल कर अर्जी तैयार कर रहे हैं. अगले महीने सरकारी कमेटी इस पर विचार करेगी कि भ्रूण को ले कर हो रहे शोध की सीमा क्या होनी चाहिए. जापान के मीडिया में भी इस पर काफी चर्चा हो रही है और इस शोध को अधिकतर लोगों का समर्थन मिल रहा है. अमेरिका में भी इस पर चर्चा हो चुकी है लेकिन वहां इसे लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था.

स्टेम सेल और विवाद

जापान सरकार ने हाल ही में वैज्ञानिकों को दो हफ्ते के लिए टेस्ट ट्यूब में शिमेरिक एम्ब्रियो बनाने की अनुमति दी थी, लेकिन इन्हें जानवरों में इस्तेमाल करने की बात नहीं की गयी थी.  टोक्यो यूनिवर्सिटी के हीरोमित्सू नाकॉची इस शोध का नेतृत्व कर रहे हैं.  वह पहले टेस्ट ट्यूब में सूअर का भ्रूण तैयार करेंगे और फिर उसमें इंसानी स्टेम सेल 'आईपीएस' मिलाएंगे. इसके बाद वह उसे सूअर के गर्भ में डालना चाहते हैं, ताकि स्टेम सेल भ्रूण में सामन्य रूप से विकास कर सके. नाकॉची की टीम ने इस से पहले सफेद सूअर में काले सूअर के पैनक्रियास उगाए थे. अब वह ऐसा ही इंसानों के साथ करना चाहते हैं.

स्टेम सेल का शोध हमेशा से बहस का विषय रहा है. स्टेम सेल की जब खोज हुई तो इन्हें केवल इंसानी भ्रूण से ही बनाया जा सकता था. लेकिन कई धर्मों ने इसका विरोध किया. 2006 में त्वचा से स्टेम सेल बनाए जाने लगा.

आईबी/एएम (एएफपी)

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