1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

जानलेवा मौसम से मरते लोग

देश के विभिन्न राज्यों में अप्रैल चढ़ते ही मौसम की टेढ़ी निगाहों ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. गर्म हवा के थपेड़ों के चलते अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

आंध्र प्रदेश, ओडीशा और तेलंगाना में आए दिन लोगों की गर्मी से मौत हो रही है. वहीं पश्चिम बंगाल में सूरज का पारा लगातार चढ़ने और लू की वजह से मौसम ही राज्य के विधानसभा चुनावों में मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है. मौसम की मार ने उम्मीदवारों के खान-पान और प्रचार के तरीकों को बदल दिया है. कोलकाता समेत पूरे दक्षिण बंगाल में गर्मी के मामले में जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों को भी पीछे छोड़ दिया है. यहां पारा लगातार 41 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है. गर्मी को ध्यान में रखते हुए कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने भी जवानों की ड्यूटी सामयिक तौर पर आठ घंटे से घटा कर छह घंटे कर दी है.

मौसम का बदलता मिजाज

देश में मानसून की संभावना हमेशा ज्यादा गर्मी पड़ने वाले हफ्तों के हिसाब से बताई जाती है, लेकिन इस साल समय से पहले ही जानलेवा गर्मी पड़नी शुरू हो गई है और इसका असर आमतौर पर पड़ने वाली गर्मी से ज्यादा व्यापक इलाकों में है. उत्तरी भारत के ज्यादार इलाकों में कई दिन से लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान के साथ गर्म हवाएं चल रही हैं.

पश्चिम से आने वाली लगातार हवाओं की वजह से भुवनेश्वर और कोलकाता जैसी जगहों पर भी गर्म हवाएं चल रही हैं. यह दोनों राज्य गर्मी से उबल रहे हैं. आमतौर पर यहां बंगाल की खाड़ी से आने वाली समुद्री हवाओं की वजह से तापमान कम रहता है. मौसम का यह क्रूर चेहरा समूचे देश और मौसम विज्ञानियों के लिए चिंता का विषय बन गया है.

प्रचार करें या जान बचाएं

मौसम के बदलते मिजाज की वजह से चुनाव मैदान में उतरने वाले तमाम सितारों और उम्मीदवारों को दिन में ही तारे नजर आ रहे हैं. विपक्ष नहीं, फिलहाल गर्मी ही इन सितारों की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है. भारी गर्मी से कोलकाता और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य में दशकों बाद अप्रैल के महीने में ही तापमान रोजाना नए रिकार्ड बना रहा है. राज्य में अब तक दो चरणों में महज 49 सीटों के लिए ही मतदान हुआ है.

यहां 17 अप्रैल, 21 अप्रैल, 25 अप्रैल, 30 अप्रैल और और पांच मई को बाकी 245 सीटों पर मतदान होना है. लेकिन लगातार चढ़ते पारे और लू ने उम्मीदवारों के चुनाव अभियान को चौपट कर दिया है.

अब वह लोग तड़के घर से निकल जाते हैं और 11 बजते न बजते अपने घर लौट आते हैं. उसके बाद दोबारा शाम ढलने के बाद ही प्रचार के लिए निकल रहे हैं. गर्मी से बचने के लिए देर रात तक चुनाव प्रचार चल रहा है.

राहत की संभावना कम

मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल इस गर्मी से राहत के आसार नहीं है. विभाग के क्षेत्रीय निदेशक जीसी देवनाथ कहते हैं, "राज्य के दक्षिणी हिस्सों में यह पहला मौका है जब अप्रैल के महीने में ही तापमान नए रिकार्ड बना रहा है और उसके साथ लू भी चल रही है. हवा से नमी गायब हो गई है."

गर्म हवा के थपेड़ों के चलते शहरी व ग्रामीण इलाकों में सुबह के नौ-दस बजते-बजते सड़कें और गलियां वीरान हो जाती हैं और लोग घरों में दुबक जाते हैं. अममून अप्रैल के महीने में आने वाली कालबैशाखी यानि चक्रवाती तूफान और बारिश लोगों को गर्मी से राहत देती थी. लेकिन इस साल अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है. देवनाथ कहते हैं कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम के मिजाज में किसी बदलाव की संभावना नहीं है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों और उम्मीदवारों को खासकर दोपहर बाद धूप में बाहर नहीं निकलने, पर्याप्त पानी पीने और रसदार फलों का सेवन करने की सलाह दी है.

DW.COM

संबंधित सामग्री