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दुनिया

जातीय हिंसा ने ली 10 की जान

उत्तर पूर्व में दो जातियों के बीच हुई हिंसा में कम से कम 10 लोगों की जान गई है और 40 हजार लोगों को अपना घर छोडना पड़ा है. असम और मेघालय की सीमा पर में राभा और गारो जाति के लोगों ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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राभा और गारो के बीच विवाद गारो जाति के लोगों के स्वतंत्र स्थानीय सरकारी निकाय की मांग करने के बाद शुरू हुआ. असम के राहत और पुनर्वास मंत्री भूमिधर बर्मन ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "जातीय हिंसा में 10 लोगों की मौत हुई है और 20 लोग घायल हुए हैं दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं."

गुवाहाटी के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि करीब 32,000 लोग अपना घर छोड़ कर भाग गए हैं, इन लोगों ने सरकारी स्कूलों, दफ्तरों और खेल के मैदानों में शरण ले रखी है. पड़ोसी राज्य मेघालय के अधिकारियों के मुताबिक हिंसा के कारण करीब 8,000 लोगों ने अपना घर छोड़ा है. दोनों राज्यों की सरकारों ने हिंसा के डर से घर छोड़ कर आए लोगों के लिए राहत शिविर खोलें हैं जिनमें रह रहे लोगों को भोजन, कपड़ा और दवाइयां दी जा रही है. भूमिधर बर्मन ने कहा,"हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि सीमा के दोनों तरफ लगाए गए दर्जनों राहत शिविरों में रह रहे लोगों को राहत का सामान मिल सके."

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि दोनों जातियों के बीच तनाव का इतिहास पुराना है. हिंसा रोकने के लिए असम के गोलपाड़ा और मेघालय के ईस्ट गारो हिल्स जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है. सबसे ज्यादा हिंसा यहीं हुई है. असम के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लुईस ऐंड ने बताया कि अर्धसैनिक बलों और सेना के सैकड़ों जवानों को तैनात किया गया है जिससे हिंसा को फिर उभरने से रोका जा सके.उत्तर पूर्वी भारत में दर्जनों जातीय गुट हैं और इनमें से कई के पास छोटी-छोटी गुरिल्ला आर्मी भी है. ये लोग भारत सरकार को भी कई बार चुनौती देते रहते हैं इनके आपस में भिड़ने की भी घटनाएं होती रहती हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौड़

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