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खेल

जांच समिति से हटें श्रीनिवासनः ललित मोदी

आईपीएल के निलंबित कमिश्नर ललित मोदी ने मांग की है कि बीसीसीआई सचिव एन श्रीनिवासन को उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई में हिस्सा लेने से हटा कर उनके मामले को बीसीसीआई की महासभा के सामने रखा जाए.

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मुश्किल में मोदी

मोदी ने बोर्ड सचिव को एक पत्र लिखा जिसे बीसीसीआई प्रमुख शशांक मनोहर को भी भेजा गया है. मोदी के मुताबिक श्रीनिवासन ने तीन जुलाई को जो खास महासभा बुलाई है, वह गैरकानूनी और असंवैधानिक है. उन्होंने बीसीसीआई को 48 घंटे दिए हैं जिसके अंदर उनके निलंबित होने का मामला महासभा के सामने रखा जाना चाहिए.

हालांकि मोदी ने यह बात मानी है कि शशांक मनोहर ने श्रीनिवासन की मांग पूरी की और अपने आप को मोदी के मामले के लिए बनाई गई खास जांच समिति से बाहर कर लिया. लेकिन श्रीनिवासन ने खुद इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया. मोदी के मुताबिक इसकी वजह यह है कि श्रीनिवासन उनके खिलाफ हैं.

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मोदी को आईपीएल में असमानताओं के लिए कारण बताओ नोटिस भेजे जा चुके हैं. इंगलैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख गाइल्स क्लार्क के ईमेल के आधार पर मोदी पर आरोप लगाए गए हैं कि वे आईपीएल के साथ साथ इंगलैंड में एक टी20 की बगावती लीग बनाना चाहते थे.

मोदी ने श्रीनिवासन को लिखा, " मैं बीसीसीआई की तरफ से कारण बताओ नोटिस को मेरे जवाब के आधार पर लिख रहा हूं. इन जवाब में मैंने अपने खिलाफ लगे आरोपों का उत्तर दिया है. मैंने खास तौर पर यह कहा है कि उनमें लिखे कारणों की वजह से आपको इस जांच में और हिस्सा लेने से मना करना होगा. मैंने खास तौर पर कहा था कि 1. आप पक्षपाती थे 2. आपको मुझसे निजी तौर पर परेशानी थी और 3. इस जांच में आपकी हिस्सेदारी का मतलब है कि आप अपने मामले में ही निर्णय ले रहे हैं. इससे इस जांच की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो जाती."

मोदी ने श्रीनिवासन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मोदी के पत्रों का जवाब नहीं दिया. हालांकि उनके मुताबिक पत्रकारों से उन्हें एक दस्तावेज मिला, जिसमें मोदी के जवाबों को लेकर श्रीनिवासन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. मोदी इस बात से दुखी हैं कि यह दस्तावेज उन्हें नहीं भेजा गया. साथ ही उन्हें अखबारों के जरिए पता चला कि बोर्ड ने श्रीनिवासन के फैसलों को प्रमाणित करने के लिए एक खास महासभा बुलाई है.

मोदी का कहना है कि वे श्रीनिवासन के सुझावों को नैतिक नहीं मानते और यह फैसले श्रीनिवासन के निजी फैसले हैं, बोर्ड के नहीं. इसलिए अगर श्रीनिवासन बोर्ड के सामने यह फैसले रखते हैं तो यह गैरकानूनी होगा और इसे लागू नहीं किया जा सकेगा.

मोदी को सबसे ज्यादा परेशानी इस बात से है कि उनके पेश किए गए सबूतों के बावजूद श्रीनिवासन ने अपने आप को जांच समिति से हटाया नहीं है. उनका कहना है कि उनके सारे डर सच हो गए हैं. और श्रीनिवासन बोर्ड को जो भी फैसले पेश करेंगे, वे पक्षपाती होंगे.

रिपोर्टः पीटीआई/ एम गोपालकृष्णन

संपादनः ए जमाल

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