जस्टिस गांगुली पर बेबसी | दुनिया | DW | 16.12.2013
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दुनिया

जस्टिस गांगुली पर बेबसी

निर्भया कांड की बरसी पर जहां भारत में एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस हो रही है, वहीं जस्टिस गांगुली का मामला दूर से इस बहस को चिढ़ाता दिख रहा है. मामले की पेचीदगी तंत्र की बेबसी दिखा रही है.

एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए भारत की अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने पीड़ित लड़की का हलफनामा सार्वजनिक कर दिया. हलफनामा सार्वजनिक होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज रहे जस्टिस एके गांगुली पर इस्तीफे का दबाव और बढ़ गया. गांगुली फिलहाल पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के प्रमुख हैं.

कानून की पढ़ाई कर रही छात्रा का आरोप है कि जस्टिस गांगुली ने उनसे यौन दुर्व्यवहार किया. भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पी सत्यशिवम की बनाई तीन जजों की समिति को पीड़िता ने हफलनामा भी दिया. हलफनामे में कहा गया है कि बीते साल 24 दिसंबर को जस्टिस गांगुली ने होटल के कमरे में उससे बदसलूकी की. छात्रा के मुताबिक जस्टिस गांगुली ने कहा, "तुम बहुत खूबसूरत हो. इस बयान का जबाव देने से पहले मैं अपनी सीट से उठ गई, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, 'तुम्हें पता है ना कि मैं तुम्हारी तरफ आकर्षित हूं, पता है ना?.... मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं, मैं तुमसे प्यार करता हूं.' जब मैंने वहां से हटने को कोशिश की तो उन्होंने मेरी बांह को चूमा और फिर कहा वो मुझसे प्यार करते हैं." जस्टिस गांगुली आरोपों से इनकार कर रहे हैं.

अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने युवती का सार्वजनिक तौर पर समर्थन किया है. जयसिंह के मुताबिक पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए ही उन्होंने हलफनामा सार्वजनिक किया है. उन्होंने राष्ट्रपति से भी जस्टिस गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के प्रमुख पद से हटाये जाने की मांग की है.

लेकिन पीड़िता ने अब तक पुलिस से मामले की शिकायत नहीं की है. ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है, इस सवाल के जवाब में जयसिंह ने कहा, "मैं उनके (पीड़िता) के साथ पूरा सहयोग कर रही हूं और उन्हें हर चीज की पूरी जानकारी दे रही हूं. मैं उनके पूरे सहयोग के बिना ये दस्तावेज कभी सार्वजनिक नहीं करती."

पीड़िता सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति के सामने बयान दे चुकी है. जस्टिस गांगुली ने भी आरोपों का खंडन करते हुए समिति के सामने अपना बयान रिकॉर्ड कराया है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद समिति ने कहा कि पीड़िता का मौखिक और लिखित बयान प्राथमिक तौर पर इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि जस्टिस गांगुली ने ली मेरेडियन होटल में रात आठ बजे से दस बजे के बीच गलत व्यवहार किया.

ओएसजे/एजेए (पीटीआई)

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