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दुनिया

जलवायु परिवर्तन बन रहा है प्रतिभा पलायन की वजह

एक शोध के मुताबिक बाढ़, सूखा और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अन्य आपदाओं के चलते सबसे अधिक लोग मध्यम आय वाले देशों से विस्थापित होते हैं. अकसर विस्थापितों को गरीब मुल्कों से जुड़ा माना जाता है लेकिन यह अध्ययन इसे नकारता है.

अफ्रीकी विकास बैंक की सलाहकार लिंगयुर मुसली मेबाय के शोध के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं के चलते देश छोड़ विदेश जाने वालों में अधिकतर उच्च शिक्षा प्राप्त काबिल लोग होते हैं. इस अध्ययन के मुताबिक, "जलवायु परिवर्तन, विकासशील देशों में प्रतिभा पलायन का एक बड़ा कारण बन कर उभर रहा है. गरीब लोगों के पास एक जगह छोड़ कर दूसरी जगह जाने के पैसे नहीं होते और जो अमीर होते हैं उनके पास इन आपदाओं से बचने के अन्य तरीके होते हैं इसलिये विस्थापन का केंद्र अक्सर पढ़े लिखे लोग होते हैं."

हालांकि अब तक ऐसा कोई तथ्यात्मक आंकड़ा सामने नहीं आया है जो इस बात की पुष्टि कर सके कि अब तक कितने लोग जलवायु परिवर्तन के चलते विस्थापित हुये हैं. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया में यह संख्या तकरीबन 2.5 करोड़ से लेकर 1 अरब तक हो सकती है. हालांकि इस मुद्दे ने वैश्विक शरणार्थी संकट के बीच राजनीतिक ध्यान जरूर आकर्षित किया है. 

मेबाय के अनुसार जलवायु परिवर्तन के चलते होने वाले विस्थापन को सही नहीं समझा जाता. ऑनलाइन डाटाबेस, आईजेडए वर्ल्ड ऑफ लेबर में छपे अपने शोध में मेबाय कहती हैं, "अक्सर ये समझा जाता है कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित अमीर देशों से काफी संख्या में लोग आएंगे और इसका अधिक अनुमान लगाया जाता है. लेकिन अगर आप इसको गौर से समझें ये तो इतना भी सीधा नहीं है."

उन्होंने बताया कि साल 2008 से 2014 के बीच विकासशील देशों से करीब 95 फीसदी लोग विस्थापित हुए, लेकिन इनमें से भी 86 फीसदी लोग मध्यम आय वाले देश मसलन भारत, पाकिस्तान, चीन से हैं और 9 फीसदी लोग ही कम आय वाले देशों से हैं. मेबाय बताती हैं कि "यह एक धारणा है कि गरीब देशों से ही सबसे अधिक लोग विस्थापित होकर अमीर देशों का रुख करते हैं. सच तो ये है कि अगर लोग अपना देश छोड़कर जाते भी हैं तो वह ज्यादा से ज्यादा अपने पड़ोसी देश में जाते हैं."

बांग्लादेश का उदाहरण देते हुये मेबाय कहती हैं कि जब दस साल पहले वहां बाढ़ आई थी, तब लोगों ने आसपास की जगहों पर जाना बेहतर समझा था. वहीं अफ्रीका में विस्थापन गांव से शहर या एक शहर से दूसरे शहर तक ही सीमित है लेकिन वहां इसका असर शहरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक पलायन से निपटने के लिये विश्व की 20 मुख्य अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय कानून और नीतियों में त्वरित सुधार करने होंगे. इसके साथ ही सरकार को बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में भी निवेश करना चाहिए.

अमेरिकन सेंटर फॉर क्लाइमेट ऐंड सेक्योरिटी की वरिष्ठ शोधार्थी शिलोह फेटजेक के मुताबिक जिन देशों में विस्थापन बढ़ रहा है वहां निवेश करना अहम है और इसी से लोगों की मदद हो सकेगी. लेकिन विस्थापन या पलायन को किसी देश की व्यवस्था की विफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. क्योंकि विस्थापन भी व्यवस्था का अहम हिस्सा है.

एए/आरपी (रॉयटर्स)

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