1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

जर्मन सैनिकों में मनोघात के मामले बढ़े

ट्रॉमा के कारण इलाज करवाने वाले जर्मन सैनिकों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. जर्मनी द्वारा विदेशी तैनातियों की शुरुआत के बाद से पोस्ट ट्रॉमा स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) तेजी से बढ़ रही है.

default

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पीटीएसडी बीमारी का इलाज करवाने वाले सैनिकों की संख्या 2010 की पहली तीन तिमाहियों में 483 थी. यह संख्या पिछले पूरे साल इलाज करवाने वाले सैनिकों की संख्या से भी ज्यादा है.

Anschlag in Afghanistan am 5. September 2009

जर्मन सेना के ट्रॉमा सेंटर के आंकड़ों के अनुसार युद्ध क्षेत्र के अनुभवों के कारण मनोघात का शिकार होने वाले सैनिकों की संख्या पिछले सालों में लगातार बढ़ रही है. 2007 में पीटीएसडी के 149 मामले रजिस्टर किए गए थे तो 2008 में उनकी संख्या 245, 2009 में 466 और 2010 के पहले नौ महीनों में 483 रही.

ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार इस साल मनोघात का शिकार होने वाले सैनिकों में 387 अफगानिस्तान में तैनात रहे हैं जबकि 28 ऐसे सैनिक हैं जो बाल्कान में तैनात थे. इनके अलावा 58 मामलों में इस बात का पता नहीं चला है कि ट्रॉमा की वजह क्या है.

सैनिकों की संस्था बुंडेसवेयर संघ के अध्यक्ष उलरिष किर्ष ने कहा है, "आत्मा से घायल सैनिकों की संख्या में वृद्धि आश्चर्यजनक नहीं है. आखिरकार बढ़ते पैमाने पर लड़ाई हो रही है. सैनिकों को न सिर्फ यह देखना पड़ता है कि उसका साथी घायल हो रहा है या मर रहा है, उसे खुद भी मारना पड़ रहा है."

उलरिष किर्ष ने शिकायत की है कि सेना मं पर्याप्त मनोचिकित्सक नहीं हैं. इस साल के आरंभ में 42 मनोचिकित्सकों में से सिर्फ 24 पद भरे हुए थे.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: वी कुमार

DW.COM

WWW-Links