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जर्मन चुनाव

जर्मन सांसदों की टिप्पणी, भाजपा ने की माफ़ी की मांग

भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात गए एक जर्मन संसदीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में की गई टिप्पणियों के लिए जर्मनी से माफ़ी की मांग है. पार्टी सोमवार को जर्मन दूतावास के सामने विरोध करेगी.

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नरेंद्र मोदी

पार्टी के विदेशी सेल के संयुक्त कंवेनर विजय जॉली ने कथित टिप्पणियों को भारत के आंतरिक मामले में विदेशी हस्तक्षेप की संज्ञा दी. जॉली ने कहा, " मोदी को 'तानाशाह' की संज्ञा देना असहनीय है. मेहमान जर्मन अधिकारी द्वारा लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना अस्वीकार्य है. यह भारत के लिए अराजनयिक और अनुचित है."

जॉली ने कहा कि एक दिन के दौरे पर आए जर्मन सांसदों का यह कहना कि गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए नए धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत ईसाई धर्मांतरण गतिविधियां मुश्किल होती जा रही है, चिंताजनक और शरारतपूर्ण टिपप्णी है. जर्मन दूतावास का स्पष्टीकरण भाजपा को शांत करने में विफल रहा है. पार्टी ने सोमवार को नई दिल्ली में जर्मन दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

गुजरात सरकार के एक प्रवक्ता ने शनिवार को कहा था कि केंद्र सरकार को यह मामला जर्मन सरकार के साथ अधिक गंभीरता के साथ उठाना चाहिए और कड़ा प्रतिरोध दर्ज़ करना चाहिए. मुख्यमंत्री मोदी ने स्वयं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर जर्मन दूतावास से माफ़ी के लिए केंद्रीय हस्तक्षेप करने को कहा है.

भारत के दौरे पर गए जर्मन सांसदों के एक अनौपचारिक दल में गुरुवार को कथित तौर पर कहा था कि मोदी यूरोपीय संघ के देशों में अवांछित व्यक्ति हैं और जर्मन सरकार भी 2002 के नरसंहार में उनकी कथिक भूमिका के कारण उन्हें वीज़ा न दिए जाने का समर्थन करती है. भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जर्मन दूतावास ने भारतीय विदेश मंत्रालय को बताया है कि यह अनौपचारिक दल था और उनके विचार जर्मन सरकार के विचार से आवश्यक रूप से मेल नहीं खाते.

2002 के दंगों में भूमिका के कारण नरेंद्र मोदी को 2005 में और पिछले वर्ष अमेरिका ने वीज़ा देने से मना कर दिया था.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: एम गोपालकृष्णन

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