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दुनिया

जर्मन व्यापार में रिकॉर्ड फायदा

कार हो, मशीनरी या इलेक्ट्रॉनिक, जर्मनी में बने माल पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं. यूरो संकट और साल के अंत में आए धीमेपन के बावजूद जर्मनी ने 2012 में निर्यात का नया रिकॉर्ड बनाया है.

जर्मनी का व्यापार संतुलन पिछले पांच साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. बढ़ते निर्यातों के बीच विदेश व्यापार में दूसरी बार सबसे ज्यादा फायदा हुआ है लेकिन आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार साल के अंत में उसकी गति धीमी हुई है.

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने 2012 में 1,097 अरब यूरो का सामान निर्यात किया. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय डेस्टैटिस के अनुसार यह एक साल पहले के मुकाबले 3.4 प्रतिशत ज्यादा था. आयात के इलाके में भी जर्मनी ने नया रिकॉर्ड बनाया. जनवरी से दिसंबर की अवधि में आयात 0.7 प्रतिशत बढ़कर 909 अरब यूरो हो गया. इसका मतलब यह हुआ कि जर्मनी का व्यापारिक फायदा बढ़कर 188 अरब यूरो हो गया. डेस्टैटिस ने एक बयान में कहा है कि यह 2007 के बाद से सबसे ज्यादा और 1950 में विदेश व्यापार के आंकड़े जमा किए जाने की शुरुआत के बाद से दूसरी सबसे ज्यादा रकम है.

Anton Börner PK Bundesverband Großhandel Außenhandel Dienstleistungen

अंटोन बोएर्नर

अब तक के रिकॉर्ड निर्यात की वजह विदेशों में जर्मनी में बने मालों की लगातार बढ़ती मांग रही. जर्मनी के विदेश व्यापार संघ बीजीए के अध्यक्ष अंटोन एफ बोएर्नर ने कहा कि पूरे साल को देखते हुए यूरो जोन में हुई कमी को अमेरिका और एशिया के बाजार ने पूरा कर दिया. यूरो जोन के देशों में जर्मन निर्यात में 2.1 प्रतिशत की कमी आई और वह 412 अरब यूरो रह गया तो यूरोपीय संघ के बाहर के देशों में निर्यात 8.8 प्रतिशत बढ़कर 472 अरब यूरो हो गया. यूरो जोन के बाहर के यूरोपीय देशों ने जर्मनी से 3.3 प्रतिशत 214 अरब यूरो का समान खरीदा.

जर्मन उद्योग संघ बीडीआई के विदेश व्यापार विशेषज्ञ ओलिवर वीक का कहना है कि विदेशों में निर्यात का बढ़ना इस साल भी जारी रहेगा. इस साल भी यूरोप के बाहर के देशों में निर्यात जर्मनी की अर्थव्यवस्था को विकास के रास्ते पर रखेगी. पिछले दस सालों से यूरोपीय देशों में जर्मनी का निर्यात लगातार कम हो रहा है जबकि यूरोप के बाहर के देशों को होने वाला निर्यात 27.3 से बढ़कर 31 प्रतिशत हो गया है. चीन से आए नए आंकड़े बीडीआई की भविष्यवाणी का समर्थन करते हैं. चीन में जनवरी में आयात मे एक साल पहले के मुकाबले 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

पिछले पांच सालों में रिकॉर्ड फायदे के बावजूद व्यापार की गति साल के अंत में धीमी पड़ी है. ताजा आंकड़ों के अनुसार यूरोजोन में बजट घाटे का संकट अब जर्मनी पर भी असर दिखाने लगा है. दिसंबर में निर्यात में नवंबर के मुकाबले सिर्फ 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो नवम्बर में हुए 2.2 प्रतिशत की कमी को पूरा करने में सक्षम नहीं थे. और आयात भी नवम्बर में 3.8 प्रतिशत की कमी के बाद दिसंबर में और 1.3 प्रतिशत गिरा. आयात घरेलू बाजार में मांग का निर्णायक कारक है.

जर्मनी ने यूरो जोन के साथियों के मुकाबले वित्तीय संकट का सामना बेहतर तरीके से किया है. यूरो जोन के अधिकांश देश संकट का बुरी तरह से सामना कर रहे हैं और उनमें से कई तो मंदी का शिकार हैं. लेकिन चूंकि जर्मनी के निर्यात का बड़ा हिस्सा यूरोपीय संघ और यूरो जोन के देशों को जाता है, उसके लिए वित्तीय संकट से पूरी तरह बचना संभव नहीं था. पूरे साल विकास दर के धीमा होने के बाद चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था बैक गियर में चली गई है और सकल राष्ट्रीय उत्बपाद में  0.5 प्रतिशत की कमी आई.

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि व्यापारिक आंकड़ें भी इसकी पुष्टि करते हैं. न्यूएज स्ट्रेटेजी विश्लेषक अनालीजा पियाजा कहती हैं, "व्यापारिक गतिविधियों को कुल आउटलुक चौथी तिमाही में बहुत बुरा दिखता है." डेस्टैटिस चौथी तिमाही के आंकड़े अगले हफ्ते जारी करेगी. नेटिक्सिस के अर्थशास्त्री योहानेस गाराइस कहते हैं कि निर्यात के आंकड़े चौथी तिमाही में विश्व व्यापार की लगातार कमजोरी के कारण कमजोर विकास की हमारी भविष्यवाणी की पुष्टि करते हैं. लेकिन उनका मानना है कि 2013 की पहली तिमाही में स्थिरता आएगी.

बेरेनबर्ग बैंक के क्रिस्टियान शुल्स का मानना है कि जर्मनी के घरेलू मांग और इस तरह से विदेशों से आयात को इस साल यूरो संकट पर अनिश्चितता की समाप्ति से लाभ पहुंचेगा. उनका कहना है, "साथ ही यूरोप के सीमाई देशों में मांग की कमी और मजबूत यूरो के कारण जर्मनी से होने वाले निर्यात पर दबाव बढ़ेगा." जर्मनी की विकास दर में निर्यात का बहुत अहम योगदान है. इस बीच कर्ज संकट से जूझ रहे यूरोजोन के देश विकास दर और टैक्स से होने वाली आमदनी को बढ़ाने के लिए अपने निर्यात को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

एमजे/एएम(एएफपी)

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