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दुनिया

जर्मन बने दानदाता

जर्मन कंपनी एसएपी दुनियाभर में कंपनियों के काम आने वाली सॉफ्टवेयर बनाने के लिए मशहूर है, लेकिन इसके संस्थापक हासो प्लाटनर ने अब कंपनी के नाम को किसी दूसरी वजह से मशहूर किया है.

एसएपी के प्लाटनर अपने कमाई गई संपत्ति में से आधा गरीबों में बांटना चाहते हैं. प्लाटनर वॉलमार्ट के मालिक वॉरेन बफेट और माइक्रोसॉफ्ट संस्थापक बिल गेट्स के सामाजिक अभियान "द गिविंग प्लेज" के सदस्य बन रहे हैं. प्लाटनर ने अपने इस फैसले का एलान न्यू यॉर्क में किया. उनका कहना है कि 20 साल पहले उन्होंने एक सामाजिक अभियान शुरू किया था और जब वे देखते हैं कि इस तरह के अभियान के कितने अच्छे नतीजे होते हैं, तो वह दंग रह जाते हैं.

अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स के मुताबिक 69 साल के प्लाटनर की संपत्ति करीब 7.2 अरब डॉलर है. वे जर्मनी के नौंवे और दुनिया भर में 127वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं. बफेट और गेट्स दुनिया भर में दूसरे और तीसरे सबसे अमीर लोग हैं. दोनों ने मिलकर कुछ सालों पहले 'द गिविंग प्लेज' का गठन किया और दुनिया भर में उद्योगपतियों से अपील की कि वे अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा सामाजिक उद्धार में लगाएं. 'द गिविंग प्लेज' में प्लाटनर को छोड़कर सारे अमेरिकी उद्योगपति हैं.

एसएपी जर्मन राज्य बाडेन व्युर्टेम्बर्ग के शहर वालडोर्फ में है और दुनिया भर में कंपनी प्रशासन सॉफ्टवेयर बनाने के लिए जानी जाती है. कंपनी साल में 16.22 अरब यूरो मुनाफा कमाती है और दुनिया भर में करीब दो लाख बत्तीस हजार ग्राहक कंपनियों की सेवाएं खरीदते हैं. कंपनी के अपने करीब 65,000 कर्मचारी हैं.

प्लाटनर का कहना है कि जर्मन विश्वविद्यालय कार्ल्सरूहे में उन्होंने बिना पैसे खर्च किए उच्च स्तर की तकनीकी शिक्षा हासिल की और वे अब समाज को कुछ वापस देना चाहते हैं क्योंकि उनकी पढ़ाई इसी समाज ने साकार कराई है. प्लाटनर का मानना है कि 'द गिविंग प्लेज' के जरिए वे ऐसा कर सकेंगे.

2003 से प्लाटनर एसएपी के मॉनिटरिंग बोर्ड में है. वह कई सालों से सामाजिक उद्धार से संबंधित काम कर रहे हैं. उन्होंने एड्स के खिलाफ मुहिम से लेकर युवा आईटी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने वाले प्रॉजेक्टों में हिस्सा लिया है.

रिपोर्टः एमजी/एएम (डीपीए)

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