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खेल

जर्मन फुटबॉलरों का लेंगे खून

जर्मन फुटबॉल में इस सीजन से डोपिंग की जांच की जाएगी. इसके लिए खिलाड़ियों के खून के नमूने लिए जाएंगे. जर्मनी में इन दिनों 1970 के दौर में सरकारी तंत्र वाला डोपिंग विवाद सामने आया है.

अगस्त में शुरू हो रही जर्मन लीग से पहले शायद यह जांच शुरू नहीं हो पाएगी. हालांकि जर्मन फुटबॉल लीग संगठन डीएफएल ने उम्मीद जताई है कि लीग की शुरुआत के साथ जांच का एक हिस्सा शुरू हो जाएगा. फुटबॉल संघ के अध्यक्ष राइनहार्ड राउबाल ने बर्लिन में कहा, "डीएफबी और नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी नाडा के साथ बातचीत हो रही है. हमे उम्मीद है कि इस सीजन के दौरान जल्द से जल्द जांच शुरू हो सकेगी." 15 फीसदी खिलाड़ियों के खून की जांच की जा सकती है. अभी तक बुंडेसलीगा में सिर्फ मूत्र की जांच होती थी.

जर्मन ओलंपिक संघ के महानिदेशक मिषाएल फेस्पर ने फुटबॉल संगठनों के जांच करने की पहल का स्वागत किया है और तारीफ की है. उन्होंने कहा, डीएफबी और डीएफएल एंटी डोपिंग अभियान में पूरी तरह साथ दे रहे हैं. डीएफबी नाडा के ट्रेनिंग कंट्रोल सिस्टम के साथ है यहां कोई विशेष व्यवहार या अपवाद नहीं है." उन्होंने डोपिंग रोकने के लिए कड़े कानून की भी पैरवी करते हुए कहा, "डोपिंग करने वाले खिलाड़ियों को तेजी से और प्रभावी तरीके से सजा दी जा सकती है बशर्ते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज और प्रभावशाली प्रतिबंध लगाए जाएं जो कम से कम दो साल का हो. अगर मामला अदालत तक पहुंचता है तो फैसला आने में कुछ महीनों से लेकर साल तक लग सकते हैं. और जब तक फैसला नहीं हो जाता तब तक आरोपी बेनुगाह ही कहा जाएगा."

जर्मन फुटबॉल संघ के अध्यक्ष वोल्फगांग नीर्सबाख ने कहा कि वे ये जांच शुरू कर रहे हैं जबकि अभी फुटबॉल में विश्व स्तर पर डोपिंग की समस्या के कोई संकेत नहीं हैं.

सोमवार को 1960 में दिए फीफा मेडिकल ऑफिसर का एक बयान सामने आया था कि पश्चिम जर्मनी के एथलीट अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक तीन खिलाड़ियों में 1966 के विश्व कप फाइनल के बाद प्रतिबंधित पदार्थ एफ्रेड्रिन पाया गया था. इसके बाद देश में डोपिंग पर फिर से बहस तेज हुई है. हालांकि नीअर्सबाख ने कहा है कि टेस्ट करवाने का फैसला 1970 में सरकार प्रायोजित डोपिंग मामले के उभरने के बाद लिया गया है.

1966 में पश्चिम जर्मनी के कप्तान सहित कई स्टार खिलाड़ियों ने सरकार प्रायोजित डोपिंग की खबरों का खंडन किया है. हालांकि कुछ इसे सच भी बताते हैं. स्प्रिंटर रहे एफसी होमबुर्ग सॉकर क्लब के अध्यक्ष मानफ्रेड ओम्मर ने 1977 में मान लिया था कि उन्होंने डोपिंग की. वे मानते हैं कि फुटबॉल में डोपिंग होती है, "बिलकुल फुटबॉल में डोपिंग होती है. मुझे इसमें कोई शक नहीं. मैंने तो 1977 में ही कह दिया था." दूसरे खिलाड़ी उवे सेलर इससे इनकार करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने कभी डोपिंग नहीं की इसलिए उन्हें पता भी नहीं कि कौन ऐसा करता है.

एएम/एनआर (डीपीए, एएफपी)

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