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दुनिया

जर्मनों की छवि में सुधार

दबंग, हर बात में राय रखने वाले, बेचैन और स्वार्थी, जर्मनों के बारे में बरसों से यूरोप के देशों की कुछ ऐसी राय रही है लेकिन अब पूरी दुनिया में उनकी छवि बदल रही है.

15 अलग अलग देशों में जर्मन रिपोर्टरों ने अपने देशवासियों के बारे में लोगों की राय पूछी और उसे एक किताब के रूप में तैयार किया, "दुनिया हमें ऐसे देखती है."

इन रिपोर्टरों ने जो जानकारी हासिल की, उसे आधिकारिक आंकड़े के तौर पर नहीं माना जा सकता. लेकिन हैरानी की बात यह है कि ऐसी छवि के बाद भी दूसरे देशों के लोग जर्मनों का सम्मान करते हैं.

जर्मनी के लोगों को मेहनती, अनुशासित, व्यवस्थित और सक्षम माना जाता है. यूरो संकट के दौरान इटली और जर्मन चांसलर के खिलाफ एथेंस और रोम की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने नाजी अफसरों की पोशाकें भी पहनीं और यूरो को बचाने के लिए जर्मन सरकार की नीतियों का विरोध भी किया.

लेकिन ग्रीक पत्रकार यानीस पापादिमित्रियू कहते हैं, "ग्रीस के लोग जर्मनों की सफलता और उनके अच्छे गुणों की कद्र करते हैं जिसकी वजह से वह यूरो संकट को टाल पाए हैं. लोग समझने लगे हैं कि जर्मनी ग्रीस को डूबने नहीं देना चाहता."

दुनिया भर में जर्मन पत्रकारों को एक बात से काफी हैरानी हो रही है. जर्मनी और उसके लोगों को लेकर दुनिया भर में नई दिलचस्पी पैदा हो रही है. जर्मन एकीकरण के बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जर्मनी को बहुत ही खामोश और बेरंगा माना जा रहा था. कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को लेकर जर्मन नेता पीछे रहे और मदद मांगने में भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई. लेकिन वित्तीय संकट के बाद से जर्मन नेताओं से कड़े फैसलों की उम्मीद की जा रही है. संवाददाताओं का कहना है कि जर्मनी और जर्मन अब इसी वजह से आकर्षक हो गए हैं.

सम्मान के पात्र

जर्मनी में लोगों को अहसास नहीं कि दुनिया में लोग उन्हें कितना मानते हैं. डॉयचे वेले के चीनी विभाग में काम करने वाली एमिंग जू का कहना है, "चीन में लोगों को लगता है कि जर्मनी जबरदस्त है क्योंकि यहां इतने सारे बुद्धिजीवी, संगीतकार और वैज्ञानिक पैदा हुए हैं."

उनका कहना है, "लेकिन दुख की बात है कि जर्मन खुद इनमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते और उनकी सोच इतनी अंतरराष्ट्रीय नहीं." दुख की बात यह भी है कि जर्मन मनुष्यों के तौर पर एक दूसरे के बारे में कम सोचते हैं. चीन में इस भावना को गुआनशी कहते हैं, "जर्मन नियमों में फंसे हैं और निजी स्तर पर परेशानियों का हल ढूंढने में ज्यादा सक्षम नहीं हैं."

ब्राजील के भी कई लोग जर्मनों से दुखी हैं. उनके देश ने पिछले सालों में बहुत विकास किया. हालांकि जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल सिर्फ एक बार ब्राजील गई हैं. और इस दौरान छह बार चीन जा चुकी हैं.

तुर्की में जर्मनों की छवि अलग है क्योंकि कई तुर्क परिवार जर्मनी में रहते और काम करते हैं. जर्मन नागरिकों के प्रति बहुत सद्भावना और दोस्ताना रिश्ते हैं लेकिन जर्मन नेताओं के प्रति भावनाएं कुछ मिली जुली हैं.

जर्मनी में नवनाजियों के तुर्क मूल के लोगों पर हमले और इस तरह की घटनाओं पर नेताओं की जैसी प्रतिक्रिया रही, उससे तुर्की खुश नहीं है. जर्मनी यूरोपीय संघ में तुर्की की सदस्यता के राह में रोड़े अटका रहा है. तुर्की से जर्मन पत्रकार युर्गेन गॉटश्लिश का कहना है, "इस मामले में काफी आपाधापी हुई है." वह कहते हैं कि तुर्की अब जर्मनी के प्रति विरक्त सा हो गया है और एशिया और अरब जगत पर अहम आर्थिक ताकत के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहता है.

बदलता असर

रूस, पोलैंड, इस्राएल और अमेरिका में जर्मनी का इतिहास और नाजियों की यातना का अब उसकी छवि पर कम असर है. नाजी जर्मनी के खात्मे के 60 साल बाद भी कई संवाददाता इस बात से हैरान हैं कि दूसरे देशों में जर्मनों को लोकतांत्रिक और एक नई पीढ़ी की तरह देखा जाता है. इस्राएल में जर्मनी को अच्छा दोस्त और साझेदार माना जाता है. पोलैंड में भी नाजियों ने कहर मचाया लेकिन अब उससे और राजनीतिक सक्रियता की उम्मीद है. जर्मनी को नई ताकतों से डर नहीं और अमेरिका जर्मनी से उम्मीद करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बढ़ाए.

इन देशों के नागरिकों के लिए भी जर्मनी का नाजी इतिहास कोई खास मायने नहीं रखता. 2006 में जर्मनी में फुटबॉल विश्व कप के आयोजन के बाद ब्रिटेन के कई लोग भी जर्मनी के फैन बन गए हैं. रूसियों को जर्मन स्वास्थ्य सेवा बहुत पसंद है. जर्मन कारें, जर्मन बीयर और जर्मन निर्यात अमेरिकियों और अरब जगत में लोगों को पसंद हैं.

ब्रांड के तौर पर जर्मनी

जर्मनी को दुनिया कैसे देखती है, यह अहम है. जर्मन ऐसे पर्यटक हैं जो औरों को खुश करना चाहते हैं. जर्मन कंपनियां दुनिया भर में अपना सामान बेचना चाहती हैं. बुरी छवि उनके कारोबार को खराब करेगी. ब्रिटेन के राजनीतिक सलाहकार साइमन आनहोल्ट ने इस बात को पहचाना और 2005 में नेशन ब्रांड इंडेक्स बनाया. इसके तहत 50 देशों में 20,000 से ज्यादा लोगों का सर्वेक्षण किया जाता है और उनसे पूछा जाता है कि उन्हें कौन सा देश सबसे पसंद है. अमेरिका के बाद जर्मनी इस सूची में दूसरे स्थान पर है.

रिपोर्टः वोल्फगांग डिक/एमजी

संपादनः ए जमाल

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