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ताना बाना

जर्मनी में हमले की साजिश के पीछे दाउद

करीब 17 साल पहले मुंबई में सीरियल बम धमाके के दोषी दाउद इब्राहिम जर्मन संसद पर हमले की साजिश के पीछे है. जर्मन पत्रिका डेयर श्पीगल ने खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर ये खबर छापी है.

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जर्मन पत्रिका के मुताबिक ये हमला जर्मनी की राजधानी बर्लिन के मध्य में बने जर्मन संसद पर हो सकता है. आतंकवादियों की कोशिश इस इमारत में लोगों को बंधक बनाने की भी है. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दो आतंकवादी हमला करने के लिए बर्लिन में दाखिल हो चुके हैं.

जर्मन सुरक्षा एजेंसियों को अल कायदा और उसके सहयोगी गुटों से मिली जानकारी के मुताबिक आतंकवादी बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रच रहे हैं. डेयर श्पीगल के मुताबिक पुलिस और खुफिया एजेंसियों को अब तक जो भी जानकारी मिली है उसके पीछे विदेशों में रह रहा एक जिहादी है जिसने पिछले कुछ दिनों में जर्मनी की फेडरल क्रिमिनल पुलिस, बीकेए को कई बार फोन किया है. ये जिहादी अपने गुट से अलग होना चाहता है.

Journalisten vor dem Reichstag

जर्मन संसद भवन

समझा जाता है कि इन्हीं जानकारियों के आधार पर बीते बुधवार गृहमंत्री थॉमस डे मेजियेरे ने प्रेस कांफ्रेंस कर आतंकी हमले का अंदेशा जताया. अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई भी इस बात के संकेत दे रही है. दो हफ्ते पहले ही एफबीआई ने जर्मनी के पास चेतावनी भेजी है.

सबसे चौंकाने वाली बात जो सामने आई है वो ये कि इन सबके पीछे भारत के भगोड़े आतंकवादी दाउद इब्राहिम का हाथ है. यूरोप और आस पास के देशों में नशीली दवाएं और अवैध हथियारों के कारोबार में जुटा दाउद ही आतंकवादियों को जर्मनी पहुंचाने के इंतजाम कर रहा है. खुफिया एजेंसियों के मिली जानकारी के मुताबिक जर्मन संसद पर हमले के लिए छह आतंकवादियों को नियुक्त किया गया है. इनमें से दो बर्लिन में दाखिल हो चुके हैं. ये साजिश अल कायदा और उसके सहयोगी संगठनों ने मिल कर रची है.

सैफ नाम के एक अल कायदा के सहयोगी संगठन ने दो आतंकवादियों को सउदी अरब के रास्ते जर्मनी भेजा है. ये दोनों 22 नवंबर को सउदी अरब और फिर वहां से जर्मनी आएंगे. इन दोनों आतंकवादियों को जर्मनी पहुंचाने की जिम्मेदारी दाउद इब्राहिम ने ली है. संयुक्त राष्ट्र ने दाउद को आतंकवाद फैलाने का दोषी माना है.

भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक दाउद लंबे समय से पाकिस्तान में छुप कर रह रहा है और वहां से आतंक और तस्करी का कारोबार कर रहा है. हालांकि पाकिस्तान हमेशा से दाउद के पाकिस्तान में होने से इंकार करता है. भारत 1993 के बम धमाकों के बाद से ही उसकी तलाश में है और अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से भी उसकी गिरफ्तारी में मदद मांग गई है.

जर्मनी में इन साजिशों की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है. त्यौहारों के मौसम होने की वजह से भी जर्मन सरकार खास एहतियात बरत रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौड़

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