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दुनिया

जर्मनी में हथियारों की बढ़ती मांग

जर्मनी में आत्मरक्षा के लिए हथियार खरीदने का सिलसिला शुरू हो गया है. हथियार उद्योग के एक सर्वे में यह बात पता चली है. लोगों की चिंता यह है कि यदि पेरिस में आतंकी हमला हो सकता है तो ऐसा जर्मनी में भी संभव है.

छुरे से लेकर नकली फायरिंग करने वाले पिस्तौल तक, पिछले महीनों में इन हथियारों को खरीदने वाले जर्मनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वे आत्मरक्षा के हथियारों से लैस हो रहे हैं. जर्मनी के हथियार निर्माताओं और विक्रेताओं के संघ के अनुसार 2014 की तुलना में इस साल हथियारों की बिक्री दोगुना हो गई है. संस्था के 1100 सदस्यों के बीच कराए गए टेलिफोन सर्वे के अनुसार छोटे हथियारों के लाइसेंस के लिए आवेदन देने वालों की तादाद भी बढ़ी है.

लाइसेंस लेने के लिए कोई कारण बताने की जरूरत नहीं होती है. इसकी फीस 50 यूरो है और आवेदक की न्यूनतम आयु 18 साल होनी चाहिए. 2005 में 2710 लोगों के पास इस तरह का लाइसेंस था. 2010 से हर साल करीब 150 लोग लाइसेंस का आवेदन दे रहे थे. कोलोन पुलिस का कहना है कि इस साल यह संख्या बढ़कर 300 के करीब हो गई है. छोटे हथियारों का लाइसेंस रखने वालों की संख्या करीब 4800 हो गई है. कुछ शहरों में पेपर स्प्रे और स्टन गन की इतनी अधिक मांग थी कि उनकी कमी पड़ रही है.

हथियार निर्माताओं और विक्रेताओं के संघ वीडीबी के इंगो माइनहार्ड के अनुसार हथियार चाहने वालों की संख्या बढ़ने की यह वजह है कि जर्मनों की व्यक्तिगत सुरक्षा जरूरत बहुत बढ़ गई है. जर्मन पुलिस ट्रेड यूनियन के राइनर वेंट के अनुसार आतंकी हमलों के संदिग्ध डर और दूसरी ओर चोरी या तोड़फोड़ का शिकार होने के डर ने हथियारों की चाहत बढ़ा दी है. वे कहते हैं कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत अहसास है, जर्मनी दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में एक है.

पिछले नवंबर में पेरिस में हुए हमले और इस साल करीब 10 लाख शरणार्थियों के जर्मनी आने की वजह से जर्मन लोगों के मन में असुरक्षा की भावना है. लेकिन वेंट का कहना है कि लोगों का यह समझना गलत है कि आतंकी हमले की स्थिति में खुद अपनी रक्षा कर सकते हैं. वे कहते हैं कि बिना प्रशिक्षण पाए ऐसी स्थिति में परेशान हो जाएंगे. पुलिस अधिकारी वेंट नकली हथियारों का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह देते हुए कहते हैं कि असली हमले की परिस्थितियों में यह पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों के लिए उलझन पैदा कर सकते हैं.

आम तौर पर पेपर स्प्रे साथ में रखकर महिलाएं अपने को रात में सुरक्षित महसूस करती हैं. लेकिन अक्सर जरूरत पड़ने पर उन्हें हैंडबैग में स्प्रे मिलता ही नहीं. पुलिस ट्रेड यूनियन के प्रमुख वेंट की सलाह है कि अपने पास स्प्रे के बदले मोबाइल फोन रखिए और जरूरत पड़ने पर पुलिस को फोन करिए. यह पेपर स्प्रे से ज्यादा महत्वपूर्ण है.

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