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दुनिया

जर्मनी में सार्वजनिक जगहों पर लोगों की पहचान का टेस्ट

जर्मनी में एक रेलवे स्टेशन पर लोगों के चेहरे की पहचान करने का टेस्ट शुरू हो रहा है. डाटा संरक्षण कार्यकर्ता इसे आम लोगों की अवैध निगरानी बता रहे हैं. तो वहीं जर्मन गृहमंत्री ने टेस्ट को उचित ठहराया है.

निजता के अधिकार की सीमा क्या है? बर्लिन में ऑटोमैटिक फेस डिटेक्शन टेस्ट की शुरुआत पर बड़ा विवाद है. एक ओर इस तकनीक को नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है ताकि अपराधियों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके तो दूसरी ओर डाटा संरक्षकों का कहना है कि इसके लिए बहुत से निर्दोष नागरिकों का डाटा गैरकानूनी तरीके से इकट्टा किया जायेगा.

यूं तो चेहरे को पहचानने की तकनीक का व्यापक इस्तेमाल ऑटोमोबिल कंपनियां भी कर रही है, जो एक कैमरे की मदद से ड्राइवरों के चेहरे पर नजर रखती हैं और उनके चेहरे में होने वाले परिवर्तन से पता करती है कि वह थक तो नहीं रहा है. बर्लिन के ज्युडक्रॉयत्स स्टेशन पर जर्मनी की संघीय पुलिस छह महीने के एक पायलट प्रोजेक्ट के दौरान जांच करेगी कि तकनीक कितना अच्छा काम करती है. स्टेशन के एक हिस्से की निगरानी के लिए कैमरे और कंप्यूटर तकनीक लगाये गये हैं.

स्टेशन पर लगे कैमरे 1 अगस्त से स्टेशन में घुसने और निकलने की जगह पर और एक स्वचालित सीढ़ी पर तस्वीरें ले रहे हैं. कंप्यूटर वहां से गुजरने वाले लोगों की तस्वीरों को सिस्टम में रखी उन 300 टेस्ट पर्सन की तस्वीरों के साथ मिलाता है, जो उस स्टेशन का नियमित तौर पर इस्तेमाल करते हैं. इस तकनीक की मदद से पुलिस संभावित आतंकी हमलों को रोकना चाहती है.

लेकिन इस प्रोजेक्ट का व्यापक विरोध हो रहा है. जर्मनी की संघीय डाटा संरक्षण आयुक्त आंद्रेया फोसहॉफ ने टेस्ट को फिलहाल रोकने की मांग करते हुए कहा है कि टेस्ट में स्वैच्छित रूप से भाग ले रहे 300 लोगों को पर्याप्त सूचना नहीं दी गयी है. जर्मन वकीलों का संघ भी इस मॉडल प्रोजेक्ट को अस्वीकार कर रहा है. संघ के अध्यक्ष उलरिष शेलेनबर्ग का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों की तस्वीर स्कैन करना और उनकी शिनाख्त करना संवैधानिक नहीं है. "ऐसी कार्रवाई लोगों के सूचना वाले अधिकार पर अनुचित हमला है." जर्मन संवैधानिक न्यायालय ने गाड़ियों के नंबर प्लेट की ऑटोमैटिक रिकॉर्डिंग पर अपने फैसले में बिना संदेह के जांच का विरोध किया है.

विपक्षी ग्रीन पार्टी ने भी संघीय पुलिस के इस कदम पर चिंता जतायी है. पार्टी की संसदीय दल की नेता कातरीन गोएरिंग एकार्ट ने कहा है कि इस परीक्षण का कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री पर आरोप लगाया कि वे कानून के राज्य के सिद्धांत को चुनाव प्रचार की बलि चढ़ा रहे हैं. बर्लिन एसेंबली में ग्रीन पार्टी के प्रवक्ता बेनेडिक्ट लुक्स ने शिकायत की है कि स्टेशन पर चल रहा प्रोजेक्ट पारदर्शी नहीं है.

उधर गृह मंत्री थोमस डे मेजियर ने प्रोजेक्ट का बचाव किया है और आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि वे गलत सूचनाओं पर आधारित हैं. प्रोजेक्ट साइट के दौरे के बाद उन्होंने कहा, "आतंकी खतरे के बावजूद हम अपनी आजाद जिंदगी छोड़ना नहीं चाहते." संघीय गृह मंत्री ने आज प्रोजेक्ट स्थल का मुआयना किया जहां संघीय पुलिस ने उन्हें कैमरे और कंप्यूटर सिस्टम के काम करने के तरीके के बारे में जानकारी दी.

एमजे/आरपी (डीपीए, एएफपी)