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मनोरंजन

जर्मनी में संगीत शिक्षा पर संकट

बाख और बीथोफेन के देश जर्मनी में स्कूलों में संगीत की शिक्षा की लंबी परंपरा रही है. इसी वजह से यहां संगीत का बड़ा बाजार भी है, लेकिन अब म्यूजिक टीचरों को लगता है कि उनके विषय के साथ सौतेला बर्ताव हो रहा है.

बच्चों को संगीत की व्यावहारिक और सैद्धांतिक शिक्षा मिले तो उनकी दिलचस्पी भी बढ़ती है और संगीत के जानकार के रूप में वे बड़े होकर संगीत से संबंधित सामग्रियों के खरीदार भी बनते हैं. स्कूलों में संगीत की शिक्षा जर्मनी में संगीत की लोकप्रियता और उसके बड़े बाजार का प्रमुख कारण है. देश में पांच सौ साल पुरानी ऑर्केस्ट्रा की परंपरा है और आज भी यहां 133 पेशेवर ऑर्केस्ट्रा हैं. जर्मनी का संगीत बाजार फिलहाल 1.45 अरब यूरो का है.

लेकिन अब स्कूलों में संगीत की शिक्षा को लेकर मुश्किलें आ रही हैं. म्यूजिक टीचरों की शिकायत है कि स्कूलों में उनके विषय को हाशिए पर धकेला जा रहा है. स्कूली संगीत कार्यदल नामक संगठन के प्रमुख मिषाएल पाब्स्ट क्रूगर का कहना है कि स्कूलों के प्लान में कुछ विषयों को मिलाकर समय सीमा तय कर दी गई है जिसकी वजह से कुछ जगहों पर म्यूजिक की कोई क्लास नहीं हो पाती.

इस समस्या से खास तौर पर पूर्वी जर्मनी के प्रांत प्रभावित हैं जहां आने वाले समय में बहुत से शिक्षक रिटायर हो रहे हैं और उनकी जगह पर नई भर्तियां नहीं हो रही हैं. स्कूलों में संगीत की शिक्षा की चुनौतियों पर विचार करने के लिए जर्मन शहर लाइपजिग में राष्ट्रीय कांग्रेस हो रही है. स्कूलों में काम करने वाले म्यूजिक टीचरों के संगठन के प्रमुख ऑर्टविन निमचिक कहते हैं, "कोई अधिकारी नहीं कहता कि हमें म्यूजिक शिक्षा की जरूरत नहीं, लेकिन यह सिर्फ कहने की बात होती है और वे कटौतियां भी करते हैं."

जर्मनी के म्यूजिक टीचरों का राष्ट्रीय सम्मेलन यूरोप में संगीत शिक्षकों का सबसे बड़ा आयोजन है. इस साल हो रहे कांग्रेस में 1800 लोग भाग ले रहे हैं. कांग्रेस के दौरान भागीदार संगीत शिक्षा पर 420 वर्कशॉप में भाग ले पाएंगे और अपने विचारों का आदान प्रदान करेंगे.

एमजे/आईबी (डीपीए)

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