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दुनिया

जर्मनी में परमाणु बिजली घरों की उम्र पर फैसला आज

जर्मनी की सरकार आज इस बात पर फैसला करेगी कि परमाणु बिजली संयंत्रों को चलाने की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं. इस बात को लेकर जर्मनी में महीनों से विवाद चल रहा है.

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अंगेल मैर्केल

चांसलर और क्रिश्चन डेमोक्रैटिक यूनियन की नेता अंगेला मैर्केल ने रविवार को सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों की एक बैठक बुलाई है. इस मीटिंग में विदेश मंत्री और फ्री डेमोक्रैट्स नेता गीडो वेस्टरवेले और बवेरिया की क्रिश्चन सोशल यूनियन के नेता होर्स्ट सीहोफर के अलावा कई संसदीय नेता हिस्सा ले सकते हैं.

देश की पिछली सरकार ने जर्मनी में परमाणु बिजली संयंत्रों को चालू रखने की समयसीमा 2022 तक तय की थी. लेकिन अंगेला मैर्केल इस समयसीमा को और 10 से 15 साल तक बढ़ाना चाहती हैं. उनका कहना है कि अक्षय ऊर्जा के नए स्रोत तलाशने और तकनीक के विकास के लिए वक्त की जरूरत है, इसलिए यह समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए.

बैठक में ईंधन की छड़ों पर 2.3 अरब यूरो यानी करीब डेढ़ सौ अरब रुपये का सालाना टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर भी विचार हो सकता है. इन छड़ों का इस्तेमाल न्यूकलियर पावर प्लांट बिजली पैदा करने के लिए ईंधन के तौर पर होता है. उद्योग जगत इस टैक्स का विरोध कर रहा है.

मैर्केल सरकार इस मसले का एक ऐसा हल तलाशने की कोशिश कर रही है जिससे वह ऊपरी सदन की मंजूरी के बिना ही प्रस्ताव को पारित करा सके. जर्मनी के सभी 16 राज्यों को ऊपरी सदन में प्रतिनिधित्व हासिल है, लेकिन सत्तासीन गठबंधन ऊपरी सदन में अल्पमत में है.

जर्मनी में बहुत से लोग मानते हैं कि परमाणु बिजली का उत्पादन बंद कर दिया जाना चाहिए. इस बैठक के दौरान परमाणु बिजली उत्पादन के विरोधी लोग मैर्केल के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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