1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

जर्मनी में जल्द होगा हर किसी के पास काम

आज के युग में जब हर कोई किफायत पर जोर दे रहा है, तब क्या पूर्ण रोजगार संभव है? अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जर्मनी में यह दस साल के अंदर संभव हो सकता है.

जर्मनी में इस समय काम में लगे लोगों की संख्या जितनी ज्यादा है, उतनी पहले कभी नहीं थी. आंकड़ों से उत्साहित होकर चांसलर अंगेला मैर्केल की सीडीयू-सीएसयू पार्टियां इसका फायदा चुनाव प्रचार में उठाने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने 2025 तक देश में बेरोजगारी खत्म करने और पूर्ण रोजगार का नारा दिया है.

सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी भी काम को लेकर मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश कर रही है. उसका सारा जोर लोगों के लगातार प्रशिक्षण और पेंशन को स्थिर करने के वादे पर है. उसकी नीतियों के केंद्र में यह बात है कि बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप कामगारों को कैसे फिट किया जा सकता है. एसपीडी ने बेरोजगार होने पर नया पेशेवर प्रशिक्षण पाने की कानूनी गारंटी का वादा किया है. ऐसी स्थिति में बेरोजगारों को लंबे समय तक बेरोजगारी भत्ता मिल पायेगा.

ये वादे चुनाव प्रचार के दौरान कोरी नारेबाजी नहीं है. इसकी ओर दो प्रमुख अर्थशास्त्री ध्यान दिला रहे हैं. उनका कहना है कि यह सचमुच संभव है. उद्यम संघों के करीब जर्मन आर्थिक संस्थान के मिशाएल हुथर ने कहा है, "पूर्ण रोजगार का लक्ष्य हकीकत के इतना करीब पहले कभी नहीं था." आर्थिक शोध संस्थान के मार्सेल फ्रात्शर की राय में पूर्ण रोजगार का लक्ष्य अगली संसद के कार्यकाल में ही हासिल किया जा सकता है. हुथर के अनुसार इसके लिए जरूरी है कि तेज इंटरनेट में ज्यादा निवेश किया जाए, वेतन से जुड़े भत्ते तेजी से न बढ़ें और अगली जर्मन सरकार लंबे समय से बेरोजगार 12 लाख लोगों की संख्या कम करे.

जर्मनी में इस समय बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत है. 8.2 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी में इस साल जनवरी में 4.36 करोड़ लोगों के पास रोजगार था. इस महीने देश में बेरोजगारों की संख्या 18 लाख थी. अर्थशास्त्री पूर्ण रोजगार की बात आम तौर पर 3 से 4 प्रतिशत बोरोजगारी की स्थिति में करते हैं. उनका मानना है कि पंजीकृत बेरोजगारों का यह हिस्सा ऐसा है जो काम नहीं करना चाहता.

आर्थिक नजरिये से पूर्ण रोजगार की स्थिति तब आती है जब उत्पादन की संभावनाओं का पूरी तरह इस्तेमाल हो रहा हो. श्रम बाजार के लिए इसका मतलब ये होता है कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में रोजगार की करीब उतनी ही जगहें उपलब्ध हैं जितने देश में बेरोजगार हैं और सभी बेरोजगार लोगों को स्वीकार करने योग्य काम मिल सके. व्यवहार में माना जाता है कि कुछ लोग हमेशा अपनी नौकरी बदल रहे होतें हैं. इसलिए पूर्ण रोजगार का मतलब शून्य प्रतिशत बेरोजगारी नहीं होती है.

DW.COM

संबंधित सामग्री