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दुनिया

जर्मनी में गठबंधन का रास्ता साफ

जर्मनी में अंगेला मैर्केल की सरकार बनने का रास्ता एक बार फिर साफ हो गया है. उनकी पार्टी ने दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के साथ गठबंधन करने जा रही है. इसके साथ ही मैर्केल लगातार तीसरी बार जर्मनी की चांसलर बनने जा रही है.

चुनाव के लगभग दो महीने बाद सरकार बनाने के लिए अंगेला मैर्केल की पार्टी सीडीयू और पिछली बार विपक्ष में बैठी एसपीडी ने हाथ मिला लिए. मंगलवार को दोनों के बीच गठबंधन को लेकर 17 घंटे लंबी बातचीत चली. कई नेताओं की ऊंघ के बाद बुधवार तड़के डील फाइनल हुई.

अब एसपीडी गठबंधन डील को अपने 4,700 सदस्यों से पास कराएगी. पार्टी को उम्मीद है कि सदस्य मान जाएंगे. पार्टी के महासचिव आंद्रिया नाहलेस ने कहा, "इस सहमति तक पहुंचने के लिए हमें काफी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. हमें उम्मीद है कि इस पैकेज को हम अपने सदस्यों के सामने रख पाएंगे."

इन दोनों पार्टियों ने मिलकर पहले भी सरकार बनाई है. मैर्केल जब पहली बार देश की चांसलर बनीं, तो उन्हें एसपीडी का ही सहयोग था.

चुनावों में 40 फीसदी से ज्यादा वोट पाने के साथ ही मैर्केल की पार्टी सीडीयू और उसकी सहयोगी सीएसयू ने तीसरी बार कामयाबी हासिल की. लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी. पिछली सरकार में शामिल एफडीपी इतने कम वोट लाई कि उसे संसद में भी जगह नहीं मिल पाई.

जर्मनी के संविधान के मुताबिक कोई भी पार्टी पांच फीसदी वोट लाने के बाद ही संसद में जगह पा सकती है. लेकिन एफडीपी को सितंबर में हुए चुनाव में चार फीसदी से कुछ ज्यादा वोट ही मिल पाए थे. पिछले एक दशक में यह दूसरा मौका है जब जर्मनी में सत्ताधारी सीडीयू अपनी प्रतिद्वंद्वी एसपीडी के साथ सरकार बनाने जा रही है. आम तौर पर देखा जाता है कि सबसे बड़ी पार्टी का नेता चांसलर बनता है जबकि गठबंधन में शामिल पार्टी का प्रतिनिधि विदेश मंत्री का पद संभालता है. जर्मनी में विदेश मंत्री के पद को बेहद अहम माना जाता है और नीति निर्धारण में उसकी प्रमुख भूमिका होती है.

ओएसजे/एजेए (एएफपी, डीपीए)

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