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दुनिया

जर्मनी में आतंकी हमलों की आशंका

यूरोप में अल कायदा के हमलों की आशंका ने पश्चिमी देशों को चौकन्ना कर दिया है. जर्मनी में वीडियो निगरानी पर ध्यान दिया जा रहा है तो स्पेन में रेल परिवहन की सख्त निगरानी की जा रही है.

यूरोप में सुपरफास्ट ट्रेन पर हमलों की योजना की खबरों पर जर्मन गृह मंत्रालय ने कहा है कि बार बार इस तरह चेतावनी आती है, जिसकी जांच भी की जाती है, लेकिन मंत्रालय उस पर टिप्पणी नहीं करता. जर्मनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार बिल्ड ने सोमवार को रिपोर्ट दी थी कि आतंकी संगठन अल कायदा यूरोप की सुपरफास्ट ट्रेनों पर हमले की योजना बना रहा है. दैनिक के अनुसार इस तरह के संकेत अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए से मिले हैं. आतंकी गिरोहों का निशाना ट्रेन के अलावा रेल लाइनें, बिजली की तारें या रेल की सुरंगें भी हो सकती हैं.

जर्मनी में हमलों की कोशिश

जर्मन रेल और देश में उसके करीब 5700 रेल स्टेशन आतंकी हमलों के संदिग्ध निशाने हैं, यह बात पहले भी सामने आती रही है. 2006 में आतंकवादियों ने कोलोन रेलवे स्टेशन पर दो लोकल ट्रेनों में बम रख दिया था. हैंड बैगों में रखे ये बम फूटे नहीं, क्योंकि डेटोनेटर गलत लगाए गए थे. ऐसा ही 2012 में बॉन स्टेशन पर हुआ. वहां किसी ने बम रखा एक हैंड बैग स्टेशन पर छोड़ दिया था. यह बम भी नहीं फटा क्योंकि वह ठीक से बनाया नहीं गया था. जर्मन गृह मंत्रालय सुरक्षा का हवाला देकर यह नहीं बता रहा कि कोलोन और बॉन में हमलों की विफल कोशिशों के बाद क्या कदम उठाए गए हैं.

यातायात पर हमला

आतंकवाद शोध संस्थान के प्रमुख रॉल्फ टॉपहोफेन इस बात को समझ सकते हैं कि अधिकारी प्रतिक्रिया देने में संयम बरत रहे हैं. वे कहते हैं, "आतंकवादियों ने यूरोपीय परिवहन नेटवर्क को अपना निशाना बना रखा है, यह बात नई नहीं है." इस तरह की योजनाएं अल कायदा के लिए हमेशा उच्च प्राथमिकता रही है. यातायात पत्रिका डॉयचे फर्केयर्ससाइटुंग के मुख्य संपादक टिमोन हाइनरिची की भी राय है कि खासकर रेलवे स्टेशन संभावित लक्ष्य हैं. "वहां हमलों का ज्यादा असर होता है क्योंकि वहां रेल लाइन के मुकाबले ज्यादा लोग होते हैं." यह बात रेलवे को भी पता है, इसलिए संदिग्ध चीजों पर ज्यादा नजर रखी जाती है.

कोलोन और फ्रैंकफुर्ट माइन जैसे रेल यातायात के बड़ें केंद्रों को ज्यादा खतरा है. संघीय पुलिस भी अपनी निगरानी बढ़ा रही है लेकिन आतंकवाद विशेषज्ञ रॉल्फ टॉपहोफेन का कहना है जर्मनी के स्टेशनों पर और निगरानी कैमरे लगाए जाने चाहिए. वे कहते हैं, "उस समय कोलोन में ट्रेन में बम रखने वाले भी कैमरे की तस्वीरों की मदद से ही पकड़े गए थे." लेकिन हाइरिची आगाह करते हैं कि यह नहीं समझना चाहिए कि हर संदिग्ध बैग में बम ही होता है. "अक्सर उसमें सिर्फ गंदे कपड़े ही होते हैं."

दूसरे देशों में ज्यादा निगरानी

जर्मन अधिकारी इस समय आतंकवाद विरोधी कदमों के बारे में बोलना पसंद नहीं कर रहे हैं, दूसरे यूरोपीय देश बड़े आक्रामक तरीके के साथ इस मुद्दे के साथ पेश आ रहे हैं. मैड्रिड में 2004 में लोकल ट्रेन पर हुए हमले के बाद स्पेन ने अपने रेल स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी है. जिन स्टेशनों से लंबी दूरी की ट्रेन चलती है, वहां इस बीच हवाई अड्डे जैसा सुरक्षा नियंत्रण होता है. टिकट और सामान चेक कराए बिना कोई भी ट्रेन तक नहीं पहुंच सकता. लेकिन हाइनरिची सवाल पूछते हैं कि क्या इससे हमलों को रोका जा सकता है, "स्पेन में हमला लोकल ट्रेन में हुआ, जिसकी कोई खास सुरक्षा नहीं होती."

90 के दशक में ही ब्रिटेन के यूरोस्टार ग्रुप ने लंदन और पैरिस के बीच चलने वाली अपनी ट्रेनों के लिए स्टेशन पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था शुरू की थी. आतंकवाद विशेषज्ञ टॉपहोफेन का कहना है, "कोलोन जैसे स्टेशन पर जहां लाखों पैसेंजर होते हैं, यह मुमकिन नहीं." रूस में इसकी कोशिश की गई है. वहां 32 बड़े स्टेशनों पर अप्रैल 2013 से हवाई अड्डों जैसा नियंत्रण होता है. जैम रोकने के लिए अधिकारी रैंडम चेक करते हैं. टॉपहोफेन का कहना है कि अफवाहों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए. "डर और घबड़ाहट सही नहीं है," नहीं तो आतंकवादियों का एक लक्ष्य पूरा हो जाएगा.

रिपोर्ट: क्रिस्टियान इगनात्सी/एमजे

संपादन: निखिल रंजन

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