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दुनिया

जर्मनी में आईएस लड़ाके पर मुकदमा

क्रेशनिक बी सीरिया युद्ध में हिस्सा लेने वाला पहला इस्लामी लड़ाका है जिस पर जर्मनी में मुकदमा चलाया जा रहा है. इस समय वह फ्रैंकफर्ट के हाईकोर्ट में गवाही दे रहा है और उसे मामूली सजा पाने की उम्मीद है.

क्या आपको ठंड लग रही है? जैकेट उतार लीजिए, हम आपका कुछ नहीं करेंगे, बेंच के प्रमुख न्यायाधीश थोमस जागेबील यह कह कर अभियुक्त का स्वागत करते हैं. 20 वर्षीय क्रेशनिक बी फ्रैंकफर्ट के पास बाड होमबुर्ग में पैदा हुआ और जॉगिंग सूट और लाल विंटर जैकेट में अदालत आया है. अह वह जैकेट उतारता है और हल्की आवाज में बोलना शुरू करता है. वह कैसे आईएस आतंकवादी मिलिशिया में शामिल होने के लिए 2013 में सीरिया गया, वहां उसे अच्छा नहीं लगा और दिसंबर में वह वापस जर्मनी लौट आया. उसका कहना है कि उसने वहां एक भी गोली नहीं चलाई.

उसे फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट में ही गिरफ्तार कर लिया गया. अब अदालत में उस पर विदेशी आतंकी दल का सदस्य होने का आरोप लगाया गया है, जिसके लिए उसे दस साल तक की सजा हो सकती है. जज और सरकारी वकील ने यह बताने पर कि वह जिहादी क्यों बना, हल्की सजा देने की संभावना व्यक्त की है. लेकिन सुनवाई के बीच में ही घातक वाक्य निकलता है, "दरअसल मैं अभी भी शहीद की मौत मरना चाहता हूं."

यह सुनकर क्रेशनिक बी के वकील मुटलु गुनाल के चेहरे पर आश्चर्य के निशान दिखने लगते हैं. अक्टूबर से चल रहे मुकदमे में वे अपने मुवक्किल को यह समझा पाए कि वह अपराध कबूल कर ले, हालांकि शुरू में क्रेशनिक बी यह नहीं चाहता था. कुछ दिन पहले सुनवाई में पढ़ा गया गुनाल का एक लिखित बयान अदालत के लिए काफी नहीं था. इसलिए अभियुक्त को अब सवालों का जवाब देना पड़ रहा है.

भाई बहनों का बचाव

लेकिन इसके साथ वह आतंकवाद के अंधेरे में ठीक से रोशनी नहीं डाल पाया है. उसे किसने जर्मनी में रैडिकल बनाया? क्रेशनिक कोई भी नाम नहीं बताना चाहता. वह सीरिया कैसे पहुंचा? क्रेशनिक बताता है कि वह पहले इस्तांबुल पहुंचा, फिर छह और लोगों के साथ बस में आगे गया. उसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई, लेकिन हर लड़ाई में वह पिछली कतरा में रहा. "वे चाहते ही नहीं थे कि मैं भी लड़ूं." ऐसा लगता है जैसे वह अपमानित महसूस कर रहा है.

कई इस्लामी गुट एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे. क्रेशनिक ने अदालत को बताया, "यह मुझे बहुत बुरा लगा." वह सीरिया की असद सरकार के खिलाफ अपने भाईयों और बहनों की रक्षा के लिए गया था और इसे वह अभी भी सही मानता है. उसके बाद शहीद वाला घातक वाक्य उसके मुंह से निकला. इससे सिर्फ जज जागेबील को ही नहीं, बल्कि सबको संदेह होने लगा कि केशनिक सामान्य जिंदगी नहीं जीना चाहता है.

खुफिया एजेंसियों ने बहन के साथ क्रेशनिक की टेलिफोन पर बातचीत और चैटिंग सुनी है और उसे रिकॉर्ड किया है. उसमें क्रेशनिक लड़ाके के रूप में सामने आता है, जिसे परिवारवालों को काफी कोशिश से मनाना पड़ रहा है कि वह इस्लामिक स्टेट के साथ अपना रोमांच छोड़े. अदालत में सबूत के तौर पर एक वीडियो भी है. इसमें क्रेशनिक को भारी हथियारों से लैस लड़ाकों के बीच में देखा जा सकता है. इसके बारे में उसका जवाब, "पता नहीं यह तस्वीर कहां की है."

सवालों के जवाब नहीं

क्रेशनिक अदालत को यह जरूर बताता है कि वहां बोरियत वाले हालात थे. उसने सिर्फ तीन लड़ाईयों में हिस्सा लिया "लेकिन सबसे पीछे मेडिकल यूनिट के साथ." क्रेशनिक ने बताया कि वहां अरब और चेचन आईएस लड़ाकों का बोलबाला था और यूरोपीयनों पर शायद ही भरोसा किया जाता था. जज जागेबील जानना चाहते हैं कि उनका मुखिया कौन था. जवाब "पता नहीं."

इस पर जज ने कहा, "यह सब मेरे लिए बहुत कम है, आपको मछली में कुछ और मक्खन देना होगा." क्रशनिक चुप रहाता है और अपने वकील की ओर देखता रहता है. वह तीन से चार साल की सजा की उम्मीद कर सकता है, यदि उसके जवाब से अदालत संतुष्ट हो पाए तो. कम से कम आज की सुनवाई में ऐसा नहीं लगा.

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