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दुनिया

जर्मनी ने 10,000 लोग निकाले

विमान से वापस भेजे जाने के सिलसिले में 15 साल पहले एक सूडानी शरणार्थी की मौत हो गई थी. शरणार्थी राहत संगठन का कहना है कि पिछले सालों में बहुत सुधार हुआ है लेकिन हर साल वापसी के 100 मामले भारी विरोध के कारण रोके जाते हैं.

विमान से वापस भेजे जाने के सिलसिले में 15 साल पहले एक सूडानी शरणार्थी की मौत हो गई थी. शरणार्थी राहत संगठन प्रो एसाइल का कहना है कि पिछले सालों में बहुत सुधार हुआ है लेकिन अभी भी हर साल वापस भेजे जाने के 100 मामले भारी विरोध के कारण रोक दिए जाते हैं.

विमानों के पायलट भी शरणार्थियों को जबरन वापस भेजे जाने का विरोध करते हैं. एक पायलट का कहना है, "बहुत ही नाटकीय और भयानक होता है इस परेशानी को देखना", जब वापस भेजा जा रहा व्यक्ति विमान में शोर मचाकर विरोध करता है, "इसमें एक नैतिक सवाल भी होता है जिसका आपको सामना करना होता है."

पिछले साल जर्मनी से पहले के मुकाबले ज्यादा लोगों को वापस अपने मुल्कों में भेजा गया. संघीय गृह मंत्रालय के अनुसार 10,200 लोगों को वापस भेजा गया जबकि 2012 में ऐसे कुल 7600 मामले थे. सिर्फ ऐसे ही लोगों को वापस नहीं भेजा जाता है, जिनके शरण का आवेदन ठुकरा दिया गया हो, बल्कि ऐसे लोग भी होते हैं जिनका वीजा खत्म हो गया है या जो अवैध रूप से जर्मनी में घुसे हों. इनमें से बड़े हिस्से को विमानों से वापस भेजा जाता है. संसद में दिए गए एक जवाब के मुताबिक फ्रैंकफर्ट से 2013 में करीब 2500 लोगों को सामान्य या चार्टर विमान से अपने देश या किसी और जगह वापस भेजा गया.

Bernd Mesovic Pro Asyl

बैर्न्ड मेसोविच

पायलटों को अधिकार

चर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे से वापस भेजे जाने के ज्यादातर मामले बिना किसी विरोध के हुए. लेकिन अपवाद भी हैं. 2013 में 93 मामलों में विरोध के कारण वापसी रोक दी गई. 29 मामलों में पायलट या विमान कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें ले जाने से मना कर दिया. जर्मन पायलटों की संस्था कॉकपिट के प्रवक्ता योर्ग हंडवैर्ग के अनुसार, पायलटों को अधिकार है कि यदि "उसके कारण विमान पर यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो" तो वे ऐसा कर सकते हैं. हालांकि यह आम तौर पर नहीं होता है.

जर्मन विमान कंपनी लुफ्थांसा के प्रवक्ता थोमस याखनोव कहते हैं, "विमान कंपनियां कानूनी रूप से ऐसे लोगों को ले जाने के लिए बाध्य हैं, लेकिन लुफ्थांसा की नीति है कि विरोध करने वाले डिपोर्टी को नहीं ले जाया जाएगा." मई 2014 में सोमालिया का एक व्यक्ति हवाई अड्डे के बाहर पुलिस की गाड़ी से गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया. विरोध की आशंका होने पर अधिकारी चार्टर विमान का विकल्प चुनते हैं. जून में इरीट्रिया के तीन शरणार्थियों को सामान्य विमान सेवा से भेजने में विफल होने के बाद चार्टर विमान से इटली भेजा गया.

विमान में मौत

जर्मन पुलिस का कहना है कि पिछले साल 1500 से कम मामलों में वापस भेजे गए लोगों के साथ पुलिस को भेजा गया. प्रो एसाइल के महानिदेशक बैर्न्ड मेसोविच का कहना है कि पुलिस ने मौत के मामलों से सीख ली है, "पिछले 10 सालों में अत्यधिक बल प्रयोग के मामले बहुत कम हो गए हैं." 1999 में सूडान का एक 30 वर्षीय व्यक्ति आमिर आगीब की काहिरा ले जाते समय विमान में मौत हो गई थी. उसके हाथ और पैरों में बेडियां थीं और उड़ान भरते समय पुलिसकर्मियों ने उसके सिर को दबा रखा था, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई. तीन सुरक्षाकर्मियों को इसके लिए नौ महीने की निलंबित सजा दी गई.

मेसोविच बताते हैं कि वापस भेजे जाने के समय अब शायद ही बेड़ियां डाली जाती हैं. अधिकारी क्या कर सकते हैं और क्या नहीं, इसके लिए अब स्पष्ट नियम बना दिए गए हैं. उनका कहना है कि विरोध की स्थिति में अब किसी को वापस भेजना संभव नहीं है. बड़ी विमान कंपनियों के लिए ये सौदा दिलचस्प नहीं रहा.

एमजे/एजेए (डीपीए)

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