जर्मनी ने शोध में लगाए अरबों यूरो | दुनिया | DW | 28.12.2013
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

जर्मनी ने शोध में लगाए अरबों यूरो

साल 2013 में जर्मन कंपनियों ने शोध और विकास के क्षेत्र में इतना खर्च किया कि पिछले सभी रिकार्ड ही तोड़ दिए. इसमें सबसे आगे हैं यहां के कार निर्माता.

इस साल करीब 54 अरब यूरो के निवेश के साथ जर्मनी की कंपनियों ने देश को पूरी दुनिया में व्यवसाय के एक प्रमुख केंद्र के रूप में बहुत मजबूती से स्थापित किया है. जर्मनी में यह निवेश के क्षेत्र में अब तक लगाई गई सबसे बड़ी रकम है. विज्ञान के क्षेत्र में किए जा रहे खर्च का लेखाजोखा रखने वाली संस्था डोनर्स एसोसिएशन फॉर द प्रमोशन ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड साइंस (एसडीडब्ल्यू) के एक सर्वे में पाया गया है कि पिछले साल के मुकाबले निवेश की राशि में पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. बोखुम के रूअर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री इयान वीजेक का मानना है कि इस रिकार्ड निवेश का कारण ये भी है कि कंपनियों ने आर्थिक मंदी और वित्तीय संकट से सबक सीखा है.

वीजेक कहते हैं कि शोध और विकास के क्षेत्र में हो रहे भारी निवेश से ये भी पता चलता है कि, "हमें गहन जानकारी के साथ साथ कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर क्या शोध चल रहा है इसका पता चलता है जिससे हम भविष्य की तकनीक को विकसित कर पाएंगे." अगर भविष्य में जर्मनी के पास ढेर सारी नई तकनीकें होंगी तो व्यवसायिक केन्द्र होने के कारण जर्मनी को इससे बहुत फायदा होगा.

अंतराष्ट्रीय स्तर पर और सुधार की जरूरत

यूरोपीय संघ के देशों में शोध और विकास कार्य में होने वाले खर्च के मामले में जर्मनी तीसरे स्थान पर आता है. डोनर्स एसोसिएशन के गेरो श्टेंके के अनुसार जर्मनी ईयू के देशों में अब भी स्वीडन और फिनलैंड से पीछे लेकिन ब्रिटेन, फ्रांस और इटली से आगे है. स्थाई वृद्धि दर वाले देश दक्षिण कोरिया और जापान और भी ज्यादा निवेश करते आए हैं. पिछले कुछ समय में चीन भी शोध के क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. एसोसिएशन का अध्ययन बताता है कि जर्मनी सही रास्ते पर बढ़ रहा है लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत जगह बनाने के लिए जर्मनी की कंपनियों को इस दिशा में और प्रयास करने होंगे.

जर्मनी की कंपनियां सिर्फ अपने आंतरिक शोध और विकास पर ही खर्च नहीं बढ़ा रही हैं बल्कि बाहर के शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी अनुसंधान के लिए करीब 13 अरब यूरो का प्रोजेक्ट दिया है जो कि पिछले साल के मुकाबले करीब 3.8 प्रतिशत ज्यादा है.

Volkswagen-Werk im südafrikanischen Uitenhage

फोल्क्सवैगन कर रही है शोध पर भारी खर्च

ऑटो निर्माता हैं सबसे आगे

हमेशा से ही औद्योगिक कंपनियां शोध पर भारी खर्च करती रही हैं. उनमें भी सबसे आगे रही हैं ऑटो कंपनियां. ऑटो निर्माता गाड़ियों की डिजाइन पर शोध करने में करीब 24 अरब यूरो के निवेश करते हैं जो साल भर में हुए कुल खर्च का करीब 37 प्रतिशत है. यात्री कारें और ट्रक बनाने वाली ऑटो कपंनियों ने पिछले एक साल में अपने शोध के बजट को करीब 6.4 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. ऑटो सेक्टर की अग्रणी कंपनी, वोल्फ्सबुर्ग की फोल्क्सवैगन ने 2013 की तीसरी तिमाही में अकेले ही दुनिया भर में शोध पर करीब 2.5 अरब यूरो खर्च किए.

एसोसिएशन के आंद्रेयास क्लाड्रोबा का मानना है कि व्यवसायिक जगत में निवेश बढ़ने का ये सकारात्मक चलन आगे भी जारी रहेगा. जर्मनी में बिजली से चलने वाली गाड़ियों के विकास की दिशा में खूब खर्च किया जा रहा है, "जो खासतौर पर पूरी तरह या आंशिक रूप से ऑटोमेटिक गाड़ियों में हो रहा है." क्लाड्रोबा आगे कहते हैं, "ये वो क्षेत्र हैं जहां ऑटो जगत बहुत काम कर रहा है और कई नई चीजें भी बनाई हैं."

बड़ी कंपनियों का है प्रभुत्व

ऑटो निर्माताओं के अलावा, बिजली उद्योग और यांत्रिकी, रासायनिक और फार्मा सेक्टर में भी पारंपरिक रूप से शोध और विकास के कामों पर भारी खर्च होता रहा है. औसतन रिसर्च पर होने वाले कुल खर्चे का करीब तीन चौथाई भार वे कंपनियां उठाती हैं जिनमें 1000 से ज्यादा कर्मचारी हैं. डोनर्स एसोसिएशन ने ऐसे बहुत से छोटे उद्योगों की भी पहचान की है जो रिसर्च पर बहुत ध्यान दे रही हैं लेकिन कुल खर्च में उनकी हिस्सेदारी अभी काफी कम है.

अर्थशास्त्री वीजेक का मानना है कि भले ही कुल खर्च में इन छोटी कंपनियों का हिस्सा कम हो लेकिन ये शोध और विकास कार्य के स्तर और उसके असर के मामले में बहुत प्रभावी साबित हो रहे हैं. यही कारण है कि इन छोटे और मझोले स्तर के उद्योगों को छुपा रूस्तम कहा जाता है. वीजेक कहते हैं, "इसका मतलब ये हुआ कि ये कंपनियां काफी कम संसाधनों और कम लोगों का इस्तेमाल करके कहीं बड़ी संख्या में पेटेंट वाली चीजें बना रही हैं."

चाहिए स्थाई विकास दर

डोनर्स एसोसिएशन का मानना है कि जर्मनी की कंपनियों में ज्यादातर शोध और विकास कार्य अपने उत्पादों को सुधारने की तरफ होता है. प्रोफेसर वीजेक कहते हैं, "निश्चित रूप से ऐसी बहुत सी कंपनियां और बाजार हैं जिनके लिए उत्पादों में सुधार लाने की जरूरत है." वे चीन के बाजारों का उदाहरण देते हैं जहां अपनी पकड़ बनाने के लिए जर्मनी की कंपनियों को उत्पादों के विकास के लिए काफी शोध करना पड़ता है. इसका लक्ष्य यूरोपीय चीजों को चीनी बाजार की जरूरतों के हिसाब से ढालना है.

ये भी सच है कि अनुसंधान में किए जा रहे निवेश को व्यवसायिक रूप से फायदेमंद होना ही चाहिए. प्रोफेसर वीजेक कहते हैं, "परंपरागत रूप से जर्मनी की संस्कृति में एक एक कर नई खोजें करने पर जोर रहा है". जर्मनी में ज्यादातर बिल्कुल नई चीज बनाने के बजाए धीरे धीरे चीजों में सुधार लाकर उसे आदर्श रूप तक लाने पर जोर दिया जाता है. सर्वे के नतीजों को देखते हुए एसोसिएशन को विश्वास है कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है. सर्वे में शामिल की गई कंपनियों के आने वाले समय में शोध और विकास दर में पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी के लक्ष्य को देख कर तो कम से कम यही लगता है.

रिपोर्ट: क्लाउस डॉयजे/आरआर

संपादन: महेश झा

DW.COM