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ब्लॉग

जर्मनी के लिए चुनौती हैं दंगाई

आम तौर पर एक दूसरे से लड़ने वाले हुलिगनों ने एक नया साझा मकसद ढूंढ लिया है. वे देश को इस्लामी कट्टरपंथियों से बचाना चाहते हैं. डॉयचे वेले के फोल्कर वागेनर का कहना है कि यह जर्मनी के लिए भारी चुनौती है.

क्या शैतानी आइडिया है, जर्मन फुटबॉल के हुलिगनों का हालात से फायदा उठाने का. क्षेत्रीय तौर पर सक्रिय उग्र दक्षिणपंथी पार्टी प्रो एनआरडब्ल्यू, जो यूं ही खुफिया एजेंसी के निशाने पर नहीं है, हिंसा पर उतारू हुलिगनों को पुरानी चाल से लुभा रही है. सलाफियों के खिलाफ खड़े हो, इस्लामी कट्टरपंथियों का मुकाबला करो. कौन इसमें साथ नहीं देना चाहेगा?

पहले स्टेडियम अब सड़क

हुलिगनों का उत्पात अब तक स्टेडियमों में और उसके बाहर होता था, और इंटरनेट में. अब वे बिना फुटबॉल के भी सिटी सेंटरों में पहुंच रहे हैं. सीरिया, इराक और नाइजीरिया में इस्लामी कट्टरपंथियों की बर्बर कार्रवाईयों के खिलाफ समाज में व्याप्त आम गुस्से का वे फायदा उठा रहे हैं. सलाफियों और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में अपने को अच्छे इंसान के रूप में पेश करने के लिए. मतलब यह कि उग्रदक्षिणपंथी पार्टियों के साथ मिलकर जिनसे उनकी हिंसक क्षमता और नस्लवादी विचार छुपे नहीं हैं.

इस आक्रामक फैन समुदाय पर नजर रखने वाले पुलिस बल एसकेबी को हुलिगनों की सामाजिक संरचना का पता है. यदि जर्मनी में चुने गए इस्लामी कट्टरपंथियों के बारे में कहा जा सकता है कि वे युवा, मर्द, मुस्लिम, भविष्य के लिए संभावनाओं से हीन हैं, तो यह व्याख्या हुलिगनों के लिए भी फिट बैठती है. सिर्फ मुस्लिम शब्द हटाना होगा.

सिर्फ सिरमुड़े ही नहीं

एसकेबी के विशेषज्ञ सालों से हुलिगन सीन में एक भयावह विकास देख रहे हैं. सिर्फ टैटू कराए सर मुड़वाए नशेड़ी ही स्टेडियमों में आक्रामक बर्ताव नहीं ला रहे, उनमें बड़े शहरों के संभ्रांत इलाकों में रहने वाले परिवारों के उकसाए बच्चे भी शामिल हैं. अमीरी में पले लेकिन भावनात्मक रूप से अनाथ और अच्छी शिक्षा पाए युवा जो समाज को उकसाने को अच्छा समझते हैं. सोमवार से शुक्रवार तक वे अपने दफ्तरों में करियरिस्ट बने घूमते हैं और शनिवार को अपना आक्रोश बाहर निकालते हैं. शिक्षा से वंचित तबके और लाड़ प्यार से पले यप्पियों का खतरनाक गठजोड़. सामाजिक तौर पर यह एक बड़ा और विभिन्न तबकों वाला समुदाय है. यहां सलाफी आलोचना के पर्दे में नस्लवाद फलफूल रहा है.

हमें सावधान रहना होगा कि यह जर्मन फुटबॉल स्टेडियमों के फैन वाले सेक्शन में बहुमत में न आ जाए. हमने राष्ट्रीय टीम और बुंडेसलीगा के क्लबों के जरिए दुनिया भर में अच्छी छवि बनाई है. इसमें फुटबॉल स्टेडियमों के अच्छे माहौल की भी भूमिका रही है. यह आत्मघाती होगा यदि हमें बायर्न म्यूनिख के लिए खेलने वाले फ्रांक रिबेरी को पुलिस सुरक्षा देनी पड़े, क्योंकि वे मैच शुरू होने के ठीक पहले सभी के सामने धर्मपरायण मुस्लिम की तरह प्रार्थना करते हैं.

कानून की सख्ती

हुलिगन समुदाय में नस्लवाद का नया स्तर घटनास्थल में बदलाव है. वे स्टेडियम से बाहर निकल रहे हैं और सरकारी संस्थानों से सिटी सेंटरों में मुकाबला करना चाहते हैं. पहले डॉर्टमुंड में, फिर कोलोन और भविष्य में?

कोलोन में रविवार को हुई हिंसा का आयाम भयावह और पोल खोलने वाला है. सलाफियों का दूर दूर तक कोई निशान नहीं था, लेकिन जर्मनी के स्वघोषित रक्षकों ने अपना गुस्सा पुलिस पर उतारा. उनके लिए राजनीतिक विरोधी कोई मायने नहीं रखता, वे हिंसा की तलाश में हैं. और सरकार संस्थानों के लिए उनके दिल में कोई इज्जत नहीं है. ऐसे में मामले के शांत होने का कोई मौका नहीं है, सिर्फ कानून की सख्ती की जरूरत है.

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