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दुनिया

जर्मनी के पूर्व विदेश मंत्री गेंशर का निधन

जर्मनी के पूर्व विदेश मंत्री हंस डीटरिष गेंशर का निधन हो गया है. वे 89 साल के थे. बॉन स्थित उनके दफ्तर ने इस बात की पुष्टि की है.

"हम आज यहां आपको यह बताने आए हैं कि आपकी विदाई को.."

यह अधूरा वाक्य हंस डीटरिष गेंशर की याद बन कर अमर रहेगा. 30 सितंबर 1989 को उन्होंने प्राग में पश्चिमी जर्मनी के दूतावास की बालकनी में खड़े हो कर इसे कहा था. इसके बाद नीचे जमा भीड़ का ऐसा शोर उठा कि उनके अगले शब्द "मंजूरी दे दी गयी है" कहीं हवा में ही घुल गए.

हजारों की संख्या में पूर्वी जर्मनी से लोग भाग कर यहां आए थे और चेक गणराज्य की राजधानी में पश्चिमी जर्मनी के दूतावास के आंगन में इस उम्मीद में बैठ गए थे कि पश्चिमी जर्मनी उन्हें स्वीकार लेगा. गेंशर की इस घोषणा के बाद उन लोगों की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा. बर्लिन की दीवार इस वाकये के करीब एक महीना बाद ही गिरी थी.

गेंशर का नाम उन नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने जर्मनी के इतिहास को रचने में अपना योगदान दिया है. जर्मनी के एकीकरण में भी उनकी बड़ी भूमिका रही. एक विदेश मंत्री के नाते उनकी काफी प्रतिष्ठा थी. गेंशर ने एक बार कहा था कि प्राग की बालकनी का वह लम्हा, उनके राजनीतिक जीवन का सबसे अहम पल था.

आज जब 89 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया है, तो पूरा देश उन्हें जर्मन इतिहास के रचयिता के रूप में याद कर रहा है. जर्मनी की एफडीपी पार्टी के अध्यक्ष क्रिस्टियान लिंडनर ने कहा, "गेंशर ने इतिहास रचा और देश पर अपनी छाप छोड़ गए."

गेंशर खुद भी पूर्वी जर्मनी से ही नाता रखते थे. उनका जन्म 1927 में हाले शहर के करीब हुआ था. 1952 में वे पश्चिमी जर्मनी के शहर ब्रेमेन पहुंचे, जहां उन्होंने बतौर वकील काम करना शुरू किया. यहीं वे एफडीपी पार्टी से भी जुड़े. जल्द ही वे राजनीति में इतने अहम हो गए कि 1969 में चांसलर विली ब्रांट की सरकार में उन्हें गृह मंत्रालय संभालने को मिला. इसी दौरान 1972 म्यूनिख ओलंपिक खेल भी हुए, जिन में फलीस्तीनी आतंकवादी गुट ब्लैक सेप्टेंबर ने 11 इस्रायली खिलाड़ियों को बंधक बनाया. इस हादसे के बारे में गेंशर ने कहा था, "सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर यह मेरे लिए सबसे बुरा दिन था. मैं यही दुआ करता हूं कि कभी किसी को भी ऐसा कुछ अनुभव ना करना पड़े."

इसके बाद 1974 से 1992 तक, लगभग 22 साल वे जर्मनी के विदेश मंत्री रहे. इस दौरान वे जर्मन राजनीति के एक बेहद अहम किरदार बने रहे. 1992 में उन्होंने राजनीति से दूर होने का फैसला किया. लेकिन वे फिर भी सुर्खियों से पूरी तरह दूर नहीं हुए. खास कर वे कार्टूनिस्टों की पसंद थे. अक्सर गोल चेहरे और बड़े बड़े कानों वाले उनके कार्टून अखबारों में दिखते. व्यंग्य पत्रिका "टाइटैनिक" ने तो उनके नाम से एक किरदार ही रच डाला, गेंश्मैन. यह गेंशर और बैटमैन का मिश्रण है.

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