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दुनिया

जर्मनी के पूर्व राष्ट्रपति शेल का निधन

पूर्व राष्ट्रपति वाल्टर शेल का 97 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया है.

वाल्टर शेल का 1919 में कोलोन के निकट छुरियां बनाने के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध शहर सोलिंगन में कारीगरों के एक परिवार में जन्म हुआ था. लिबरल डेमोक्रैट वाल्टर शेल ने 1970 और 1980 के दशक में जर्मनी की उदारवादी नीति पर अपनी छाप छोड़ी और फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी को सामाजिक मूल्यों वाले उदारवादी नीति की ओर लाए.

वे द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के एक साल बाद 1946 में फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी में शामिल हुए और राजनीति की शुरुआत स्थानीय स्तर पर की. बाद में वे प्रांतीय स्तर पर सक्रिय हुए और 1953 में पहली बार संसद के लिए चुने गए. चांसलर कोनराड आडेनावर और लुडविष एरहार्ड की सरकार में उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों का कार्यभार संभाला. 1968 में वे फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी के अध्यक्ष चुने गए.

लिबरल डेमोक्रैट नेता 1960 के दशक में विकास सहायता मंत्री थे. उसके सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी और फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी की गठबंधन सरकार में वे विदेश मंत्री और उप चांसलर रहे. भारत ने जब विभाजित जर्मनी के दूसरे हिस्से साम्यवादी जर्मन डेमोक्रैटिक रिपब्लिक को मान्यता दी तो शेल पश्चिमी जर्मनी के विदेश मंत्री थे. उस समय उनके द्वारा प्रतिपादित शेल डॉक्ट्रीन लागू था जिसके अनुसार पूर्वी जर्मनी को मान्यता देना पश्चिम जर्मनी के प्रति गैरदोस्ताना कार्रवाई मानी जाती थी. पूर्वी जर्मनी को मान्यता देने के भारत के इरादे पर शेल ने टिप्पणी की थी, “विस्व इतिहास गतिमान है. हमें अपने को नई स्थिति के अनुरूप ढालना चाहिए.”

1974 से 1979 तक वाल्टर शेल जर्मनी के राष्ट्रपति थे. लंबे समय तक शेल संघीय जर्मनी को लोकप्रिय राजनेताओं में शामिल थे. वे आम लोगों के साथ अपनी नजदीकी और अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते थे. इसी वजह से उन्हें मिस्टर बुंडेसरिपब्लिक कहा जाता था.

एमजे/ओएसजे (डीपीए)

देखिए जर्मन राष्ट्रपति योआखिम गाउक के भारत दौरे (2014)की तस्वीरें

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