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दुनिया

जर्मनीः महिलाओं के लिए कंपनी में कोटा

2016 से निजी कंपनियों के वरिष्ठ पदों पर महिलाओं के लिए कोटा निर्धारित करने पर सहमति बन गई है. सीडीयू और एसपीडी पार्टी के बीच जारी गठबंधन वार्ता में यह फैसला हुआ.

जर्मनी की समाजवादी पार्टी सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी (एसपीडी) के साथ गठबंधन बातचीत में अंगेला मैर्केल की रुढ़िवादी सीडीयू पार्टी कंपनी बोर्ड में महिलाओं के कोटे पर सहमत हुई. उन्होंने ऐसी योजना भी बनाई है कि बच्चा होने के बाद जब माता पिता काम पर लौटें, तब भी उन्हें चाइल्ड केयर वाली आर्थिक मदद मिलती रहे.

एसपीडी पार्टी की मध्यस्थ मानुएला श्वेसिग ने सोमवार को बर्लिन में बताया कि 2016 से शेयर बजार में सूचिबद्ध कंपनी के बोर्ड में कम से कम 30 फीसदी महिलाएं होनी चाहिए. इसके साथ ही बड़ी कंपनियों को योजना बनानी होगी कि वो अपने मैनेजमेंट के उच्च पदों पर महिलाओं की संख्या 2015 तक कैसे बढ़ाएंगी.

सी़डीयू सीएसयू की एसपीडी पार्टी के साथ हो रही गठबंधन वार्ता के दौरान यह घोषणा की गई है. श्वेसिग ने कोटा पर सहमति को महिलाओं को समान मौके मिलने की दिशा में अहम कदम बताया है.

एसपीडी पार्टी ने हाल ही में प्रस्ताव रखा था कि 2021 तक कंपनियों में महिला कार्यकारी अधिकारियों की संख्या बढ़ा कर 40 फीसदी कर दी जाए. वैसे तो यूनियन (सीडीयू और सीएसयू) ठोस कोटे के विरोध में थी और उसने दलील दी थी कि न तो यह बुद्धिमानी है और ना ही संवैधानिक तौर पर ऐसा कुछ किया जा सकता है.

सितंबर 2013 के आंकड़ों के मुताबिक बड़ी कंपनियों के एग्जिक्यूटिव बोर्ड में महिलाओं की संख्या कुल 11.7 फीसदी ही है.

फेमिली केयर पर सहमति

दोनों पक्ष इस बात पर भी राजी हुए कि माता पिता बच्चे के जन्म के बाद पार्ट टाइम काम कर सकेंगे और फिर भी उन्हें 28 महीने तक बच्चों की देखभाल के लिए दिया जाने वाला भत्ता दिया जाएगा. अगर दोनों माता पिता बच्चे की देखभाल के साथ काम भी कर रहे हों, तो उन्हें 10 प्रतिशत बोनस मिलेगा. इस प्रोग्राम का उद्देश्य लोगों को आसानी से फिर से काम पर लाना है.

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इसके अलावा परिवार के सदस्यों के लिए 10 दिन की तनख्वाह का मुआवजा मिलेगा. फिलहाल ऐसा मुआवजा सिर्फ उन पालकों के लिए होता है जो बीमार बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी लेते हैं.

विडमन माउज ने पारिवारिक मदद को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह सीडीयू के पुराने गठबंधन साथी, एफडीपी, के साथ संभव नहीं था. इस बार चुनावों के बाद जारी गठबंधन वार्ता में भले ही इस मुद्दे पर सहमति बन गई हो लेकिन अभी दोनों पक्षों में कई और असहमतियां बरकरार हैं.

श्वेसिग ने बताया कि सीडीयू के साथ डे केयर सेंटर या समलैंगिक जोड़ों के लिए बच्चे गोद लेने के कानून पर कोई बातचीत नहीं हुई है. एसपीडी के अन्य मध्यस्थ कार्ल लाउटरबाख ने जानकारी दी कि स्वास्थ्य और नर्सिंग केयर को धन कहां से मिले, इस बारे में सीडीयू के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ी है.

वहीं सीडीयू पार्टी के मध्यस्थ येन्स स्पाहन का कहना था कि स्वास्थ्य सेवा और स्वास्थ्य बीमा दोनों बहुत अलग अलग मुद्दे हैं.

रिपोर्टः आभा मोंढे (डीपीए, एएफपी)

संपादनः ईशा भाटियी

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