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ताना बाना

जर्मनीः नए आई कार्ड की सुरक्षा पर सवाल

जर्मनी में नए कंप्यूटर चिप वाले पहचान पत्र को लेकर विवाद छिड़ गया है. एक टीवी चैनल के उपभोक्ता शो के मुताबिक चिप में सुरक्षित जानकारी कोई भी आसानी से हासिल कर सकता है. जर्मन सरकारी एजेंसियां इस दावे को खारिज कर रही हैं.

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अंदर छिपा है चिप

जर्मन सरकार अपने नागरिकों के लिए एक नया इलेक्ट्रॉनिक आई कार्ड ला रही है जिसमें एक कंप्यूटर चिप भी लगा होगा. इस चिप में उस व्यक्ति से संबंधित सारी जानकारी रखी जाएगी और साथ में एक पिन नंबर भी होगा जिससे संबंधित व्यक्ति के लिए इंटरनेट पर ऑनलाइन कारोबार करना आसान हो जाएगा. लेकिन सार्वजनिक टेलिविजन चैनल पर प्लस माइनस नाम के एक उपभोक्ता शो ने चिप को असुरक्षित बताया है. इससे कोई भी धोखेबाज आसानी से कार्ड की जानकारी हासिल कर सकता है.

अब जर्मन सरकार लोगों की चिंता दूर करने में लग गई है. जर्मन सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा कार्यालय बीएसआई ने कहा कि आई

Ausweis mit Hologramm

अभी के आई कार्ड

कार्ड सुरक्षित है. चिप के साथ एक पिन नंबर भी दिया जाएगा जिससे ऑनलाइन खरीद बिक्री में आसानी भी होगी और जानकारी के गलत इस्तेमाल का भी खतरा नहीं रहेगा.

बीएसआई में आई कार्ड विशेषज्ञ येंस बेंडर ने कहा कि खतरा तब हो सकता है जब कोई वायरस पिन नंबर को पाने की कोशिश करे. लेकिन यह पिन भी एंक्रिप्शन के जरिए सुरक्षित है और पिन पाने से भी फायदा नहीं होगा. कार्ड का इस्तेमाल एक खास पिन पैड के जरिए किया जा सकेगा. पिन पैड को कंप्यूटर से कनेक्ट किया जा सकता है. पिन पैड की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है लेकिन साथ ही इस्तेमाल करने वाले को अपना कंप्यूटर साफ रखना होगा. एंटी वायरस, फायरवॉल और सॉफ्टवेयर को नियमित तौर पर अपडेट करने से पिन पैड की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं होगा. शुरुआत में यह पिन पैड्स कंप्यूटर पत्रिकाओं और बैंकों में मुफ्त में बांटे जाएंगे. इस बीच सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टी एफडीपी के सांसद मानुएल होएफरलिन ने कहा कि पिन पैड को सुरक्षित होना होगा और अगर सुरक्षा संबंधी चिंताएं 1 नवंबर तक नहीं सुलझती हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक आई कार्ड को देर से लागू करना होगा.

रिपोर्टः डीपीए/एम गोपालकृष्णन

संपादनः महेश झा

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