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विज्ञान

जब खेल दिल पर बन आए

कसरत करना वैसे तो स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन यह कभी नुकसान भी पहुंचा सकता है और कभी कभी जान को खतरा भी साबित हो सकता है अगर दिल की मांसपेशियों में सूजन आ जाए.

दिल की मांसपेशियों पर सूजन आने से दिल का दौरा भी पड़ सकता है और जितना आप सोचते हैं उससे ये कहीं ज्यादा सामान्य है. उर्सुला हिल्डेब्रांट के दुश्मन बहुत छोटे हैं इतने छोटे कि इन्हें सिर्फ माइक्रोस्कोप में देखा जा सकता है. लेकिन ये छोटे दुश्मन हैं बहुत जानलेवा. उनके दुश्मन पैथोजन हैं. जो दिल में खून के जरिए घुसते हैं वहां इंतजार करते हैं. इनके नतीजे काफी खतरनाक होते हैं.

हिल्डेब्रांट 31 साल की फिजिशियन हैं जो कोलोन की जर्मन स्पोर्ट यूनिवर्सिटी में काम करती हैं. यहां वह मायोकार्डिटिस से पीड़ित खिलाड़ियों का इलाज करती हैं. वह बताती हैं, " यह एक ऐसी बीमारी है जो हमारे शरीर की मोटर  पर हमला कर देती है. मोटर यानी दिल जो दिन रात हमारे शरीर में खून पंप करता है. अगर दिल की मांसपेशियों में सूजन आ जाए तो ये कमजोर हो जाता है और खून पंप करने की इसकी क्षमता कम हो जाती है. नतीजा शरीर को जरूरी खून नहीं मिलता." डॉक्टर हिल्डेब्रांट कहती हैं, " किसी को भी मायोकार्डिटिस हो सकता है, चाहे खिलाड़ी हो या आलसी."

Herzultraschalluntersuchung Echokardiographie Sporthochschule Köln Ursula Hildebrandt

मायोकॉर्डिटिस का इलाज करती डॉ. हिल्डेब्रांट

संक्रमण का खतरा

खिलाड़ी और शारीरिक रूप से सक्रिय लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है. मायोकार्डिटिस होने की सबसे ज्यादा आशंका तब होती है जब कोई खिलाड़ी वायरल या सर्दी खांसी के तुरंत बाद ट्रेनिंग जोर शोर से शुरू कर देता है. शारीरिक रूप से कमजोर होने पर खेल और कसरत जानलेवा साबित हो सकते हैं. हमारा शरीर में कसरत के बाद संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. और जब बैक्टीरिया या वायरस हमारे शरीर में घुसते हैं तो वह खून में घूमते रहते हैं.

कसरत के दौरान शरीर में रक्त संचार तेज होता है और दिल में खून की गति भी बढ़ जाती है. खून नदी के पानी के तरह दिल के चारों हिस्सों और वॉल्व में से हो कर बहता है. और अगर कोई खिलाड़ी दौड़ता है या फुटबॉल खेलता है तो खून की गति और बढ़ जाती है. लेकिन ऐसी स्थिति में पैथोजन दिल के वॉल्व में फंस कर सूजन पैदा कर सकते हैं.

हिल्डेब्रांट कहती हैं कि मायोकॉर्डिटिस से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि कसरत से पहले बीमारी पूरी तरह ठीक हो जानी चाहिए, "अगर आपको बुखार है तो सामान्य नियम यह कहता है कि आप कम से कम दो दिन इंतजार करें कि बुखार पूरी तरह चला जाए कफ पूरी तरह खत्म हो जाए."

18 साल के खिलाड़ी के लिए यह संक्रमण बहुत ज्यादा खतरनाक साबित हुआ. वह छह महीने तक कोई कसरत नहीं कर सका. सामान्य सीढ़ियां चढ़ने के लिए भी उसे लिफ्ट लेनी पड़ती.

Ursula Hildebrandt Ärztin an der Sporthochschule Köln Deutschland

कोलोन के स्पोर्ट्स कॉलेज में डॉ. उर्सुला हिल्डेब्रांट

छह महीने बाद स्पिनराथ फिर से कसरत पर लौट सके. "हम नहीं चाहते थे कि उसे हमेशा के लिए नुकसान उठाना पड़े. अगर वह जल्दी कसरत शुरू करते तो उनका दिल आजीवन कमजोर रहता.

स्वस्थ खाना और भरपूर सोना

मायोकॉर्डिटिस का हर मामला अलग होता है और उसे उसी तरह से इलाज की जरूरत होती है. लेकिन एक सलाह दी जाती है कि मरीज कम से कम छह महीने कोई कसरत नहीं करे, शराब न पिए और स्वस्थ जीवन शैली और खान पान की ओर ध्यान दे. इसमें ध्यान भी अहम भूमिका निभा सकता है.

मायोकॉर्डिटिस विकासशील देशों में भी होता है लेकिन इन देशों में बीमार करने वाले पैथोजन बैक्टीरिया या फंगस होते हैं. जबकि विकसित देशों में इसका मुख्य कारण वायरस होते हैं.

उर्सुला हिल्डेब्रांट के दुश्मन भले ही माइक्रोस्कोपिक हों और कोई भी रूप ले सकते हों लेकिन उनमें एक तथ्य एक जैसा है. उनसे बचा जा सकता है बशर्ते लोग सर्दी जुकाम होने के बाद अपना अच्छे से ध्यान रखें और खूब आराम करें. अपने शरीर की सुनें.

रिपोर्टः योनोश डेल्कर/ एएम

संपादनः एन रंजन

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