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दुनिया

जन्मदिन मुबारक मदीबा

अफ्रीका के काले लोगों का नायक पूरी दुनिया में इंसानी अधिकारों के संघर्ष की मिसाल बन गया. 95 साल पहले आज ही के दिन अफ्रीका के मदीबा और दुनिया के नेल्सन मंडेला ने धरती पर कदम रखे.

नेल्सन मंडेला अपनी जवानी के दिनों से ही गाया करते थे, "न्कोसी सिकेलेली अफ्रीका, यानी गॉड ब्लेस अफ्रीका" 1897 में इस गाने की रचना हुई और पहले यह शोषित काले लोगों का और फिर अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस का रंगभेद के खिलाफ संघर्ष में आजादी का तराना बन गया. नेल्सन मंडेला सरकार की रंगभेद नीतियों को सामने ले आए और फिर उन्हें मिटाया. एएएनसी के करिश्माई नेता नेल्सन मंडेला ने कभी कहा था, "मैं श्वेत लोगों के वर्चस्व खिलाफ लड़ा और मैं काले लोगों के वर्चस्व के खिलाफ लड़ा. मैंने लोकतंत्र की और मुक्त समाज की विचारधारा के लिए संघर्ष किया जहां सारे लोग सद्भाव के साथ रहें."

सोच की ऊंची उड़ान

मंडेला के दोस्त संगीतकार लेडीस्मिथ ब्लैक मैम्बाजो, जोसेफ शाबालाला के साथ 1960 के दशक से ही प्रेम और सौहार्द के गीत गा रही हैं. वेन्यूकेला- लेट योर माइंड फ्लाइ अप हाई जैसे गीत खासतौर से उनकी पहचान है और इस गाने के साथ हर हिंसक झड़प घृणा की चीज बन जाती. आज उन्हें राष्ट्रीय धरोहर माना जाता है. नेल्सन मंडेला 1993 में नोबेल पुरस्कार लेने ओस्लो गए तो लेडीस्मिथ ब्लैक मैम्बाजो भी उनके साथ थी. 1994 में मंडेला जब राष्ट्रपति बने तो उन्हीं के समूह ने गीत पेश किया.

समस्या खड़ी करने वाले

नेल्सन मंडेला 18 जुलाई 1918 को म्वेजो म्बाशे नदी के किनारे बसे एक छोटे से गांव में दिन के उजाले में पैदा हुए. उनके पिता उन्हें रोलिहलाहला कह कर पुकारते थे जिसका मतलब है समस्या लाने वाला. मंडेला परिवार के पहले सदस्य थे जिन्होंने पढ़ना लिखना सीखा. इसके लिए उन्हें गायों और सूअरों की देखभाल से समय निकालना पड़ता. जोहानसबर्ग में कानून की पढ़ाई के दौरान उन्हें काले लोगों के लिए हर जगह भेदभाव महसूस हुआ. एक बार एक कंडक्टर उन्हें "काफिर" कह कर उनके पीछे पड़ गया, क्लास के छात्रों ने उनकी गहरी त्वचा के कारण उन्हें दोस्त नहीं बनाया. उनके अंदर "समस्या खड़े करने वाले" ने यहीं से जन्म लिया और फिर आजादी पाने तक लंबा सफर तय किया. अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस में मुक्ति आंदोलन के लिए 1940 और 50 के दशक में जबरदस्त संघर्ष करने के बाद वकील और क्रांतिकारी मंडेला को 1964 में उम्रकैद की सजा दे कर रॉबेन द्वीप के कारावास में भेज दिया गया.

(अश्वेतों का गांधी)

नेल्सन मंडेला को आजाद करो

"असिमबोनांगा यानी हमने उन्हें नहीं देखा" बाद के सालों में जॉनी क्लेग और उनका बैंड सावुका कई सालों तक जुलू भाषा में यही गाता रहा. निश्चित रूप से इसमें नेल्सन मंडेला की ही बात थी. क्लेग का संगीत रंगभेद के खिलाफ उनका हथियार बन गया था. उनके बैंड में तीन श्वेत और तीन काले संगीतकार थे. रंगभेदी शासन ने इस बैंड पर पाबंदी लगाई और कई बार इन संगीतकारों को जेल में डाला गया. हालांकि इसके बाद भी न तो वो मंडेला को रोक सके न क्लेग के बैंड को. क्लेग ने 1988 में मंडेला के 70वें जन्मदिन पर लंदन में कंसर्ट किया और यहीं से संगीत की दुनिया ने रंगभेद का बहिष्कार किया और बड़ी संख्या में दक्षिण अफ्रीकी लोग आए. सितारों से भरे इस कंसर्ट से ही अंग्रेजी गाना "फ्री नेल्सन मंडेला" दुनिया भर में गाया बजाया जाने लगा.

बेहतर दुनिया की कसम

आखिरकार 27 साल जेल में बिताने के बाद 11 फरवरी 1990 को नेल्सन मंडेला आजाद हुए. एएएनसी का नेता अब दुनिया का नेता बन चुका था और भारी भीड़ उनका इस्तकबाल करने के लिए जेल के बाहर मौजूद थी. लोगों का उत्साह देख मंडेला भी हैरान रह गए, जुबान से बस इतना निकला, "मैं अपने अहसासों को शब्दों में नहीं ढाल पा रहा हूं, बस आपका उत्साह देख कर अभिभूत हूं."

रंगभेद की नीति को मिटाने में मंडेला के योगदान के लिए जितना कहा जाए कम है लेकिन उनकी विरासत खतरे में है, भ्रष्टाचार, आपसी कलह और अयोग्य लोगों के जाल ने दक्षिण अफ्रीका को अपने घेरे में ले रखा है. मंडेला के 95वें जन्मदिन पर उनका यह कहा कानों में गूंज रहा है, "आजादी और न्याय के लिए हमारा संघर्ष एक सामूहिक संघर्ष था अब एक बेहतर दुनिया बनाना आपके हाथ में है."

रंग भेद के विरोध में एक मशहूर गाना गायनर्स एडी ग्रांट के कलम से निकला, "गिमी होप जोआना." यह जोआना कोई लड़की नहीं बल्कि जोहानसबर्ग का संक्षिप्त रूप है जो कभी रंगभेदी शासन का प्रतीक था. ग्रांट ने काले लोगों के दमन का विरोध किया और अच्छा वक्त भी आ गया. आज जब बेहद बीमार मंडेला को देख दक्षिण अफ्रीकी देश डरा हुआ है तो एडी ग्रांट की उम्मीद नए अर्थों में सामने आ रही है.

रिपोर्टः सूजेन कॉर्ड्स/एनआर

संपादनः आभा मोंढे

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