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ताना बाना

'जनता तय करती है हमारी खबरें'

3 मई 1953 को डॉयचे वेले का पहला कार्यक्रम प्रसारित किया गया. आज 60 साल बाद विदेश प्रसारण सेवा कहां है. क्या बचा है, क्या पूरी तरह बदल गया. महानिदेशक एरिक बेटरमान से कुछ सवाल...

डीडब्ल्यूः आपके 12 साल के कार्यकाल में आपको यहां कौन सी चीज ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया?

एरिक बेटरमानः राजनीतिक तौर पर 11 सितंबर 2001 सबसे अहम घटना थी. डॉयचे वेले में पद संभालने से पहले मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश के लिए डॉयचे वेले कितना अहम है, और कितना जरूरी है कि लोग आपकी आवाज सुनें. इसके अलावा तकनीकी विकास भी बहुत तेजी से हुआ. इससे दुनिया भर में संपर्क क्रांति आई. इसका असर हमारी मीडिया पेशकश पर हुआ और साथ ही हमारे श्रोताओं और पाठकों पर, जो अब पहले से बदल गए हैं.

दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के आठ साल बाद डीडब्ल्यू का काम था 'तनाव कम करना' और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जर्मनी के दोबारा शामिल होने में उसका साथ देना. अब 60 साल बाद डीडब्ल्यू के क्या लक्ष्य हैं?

उस समय और अब भी डीडब्ल्यू का काम है कि वह हमारे देश के मूल्यों का प्रचार करे. डीडब्ल्यू का काम है कि वह "जर्मनी को यूरोप का एक सांस्कृतिक और स्वतंत्रता से संगठित किए गए लोकतांत्रिक राष्ट्र" के तौर पर दुनिया को पेश करे. 2005 में डीडब्ल्यू कानून में यही लिखा है. इससे हमारा कार्यक्रम आधुनिक और व्यापक हुआ. हमारी सर्विस में अलग अलग भाषाओं और अकादमी के साथ मिलकर हम एक प्लेटफॉर्म पेश कर रहे है जहां सांस्कृतिक बहस को बढ़ावा मिलता है और जर्मन सहित अलग अलग नजरिए सामने रखने का मौका मिलता है. इसलिए हम मानवाधिकार और आजादी की आवाज हैं. साथ ही हम जर्मन भाषा को बढ़ावा दे रहे हैं. यह हमारे काम का हिस्सा है.

पत्रकारिता से जुड़े कर्तव्यों के लिए इसका मतलब क्या है?

हम दुनिया भर में लोगों तक पहुंचना चाहते हैं. हम 30 भाषाओं में पत्रकारिता करते हैं. कानूनी तौर पर हमारे लक्ष्य और डीडब्ल्यू के आदर्श हमारी सर्विस का मार्गदर्शन करती हैं. हम अपने पाठकों और श्रोताओं की उम्मीदों के हिसाब से अपना काम तय करते हैं. दुनियाभर में अलग अलग इलाकों और भाषाओं में हमें इन तक पहुंचना होता है. तकनीकी विकास और पाठकों के बदलते व्यवहार को देखते हुए हमारी तरफ से बदलाव चलता रहता है. इसलिए पहले हम शॉर्टवेव पर थे, फिर हमने सैटेलाइट टीवी पर आना शुरू किया, हमने बहुत जल्दी इंटरनेट पर आना शुरू किया और अब हम एक मल्टीमीडिया कंपनी के तौर पर काम करते हैं.

इसी कारण हम अपनी पेशकश को इलाके के हिसाब से बदलते हैं. पिछले एक साल से हम छह टीवी चैनलों पर जर्मन, अंग्रेजी, स्पेनी और अरबी में अपने कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं. हमारे ऑनलाइन कामों में सोशल मीडिया और मोबाइल सेवाएं भी शामिल हैं.

कानूनी आदेश, सरकारी पैसे, और 60 साल से स्वतंत्र पत्रकारिता. डीडब्ल्यू अपने को इस आधार पर किस तरह एक विश्वसनीय आवाज के तौर पर स्थापित कर सकता है?

हम एक सार्वजनिक संगठन हैं और हमारा पैसा करदाताओं से आता है. इसकी वजह से विदेशी खबर बाजार में हमें फायदा है. जर्मनी के भीतर मीडिया चैनलों की तरह हमें पूरी आजादी है, जो जर्मन संविधान के आर्टिकल 5 में लिखा गया है. इसलिए हमारे कानूनी आदेशों, करदाताओं से लिए गए पैसों और हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच कोई विरोधाभास नहीं है.

डीडब्ल्यू ने पिछले दशकों में अपनी अच्छी पत्रकारिता और जर्मनी के बारे में संतुलित खबरों के जरिए अपनी छवि एक विश्वसनीय और भरोसेमंद मीडिया कंपनी के तौर पर अपने को स्थापित किया है. इसकी एक वजह यह भी है कि हम उन देशों की आवाज बनते हैं जहां लोगों की अभिव्यक्ति पर रोक लगाई जाती है. लोग हम पर भरोसा करते हैं. यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे संगठन के लिए अहम है.

क्या यही वजह है कि दुनिया भर में डीडब्ल्यू के कार्यक्रमों की इतनी ज्यादा मांग है?

50 साल से हम विश्वभर में आजाद और पारदर्शी मीडिया प्रणाली की मांग कर रहे हैं. इस सिलसिले में जर्मन आर्थिक विकास मंत्रालय हमारा सबसे अहम साझेदार है. उनके साथ हम पत्रकारों की गुणवत्ता और मीडिया प्रतिस्पर्धा विकासशील और बदलते देशों में बेहतर कर रहे हैं. इसके लिए पत्रकारों को ट्रेनिंग देनी होगी. साथ ही असुरक्षित आर्थिक स्थिति में मीडिया संगठनों को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए तैयार करना होगा और पिछड़े समुदायों तक जानकारी पहुंचाने की कोशिश करनी होगी.

हमने इससे पहले भी सरकारी चैनलों की सार्वजनिक संगठनों में बदलाव के दौरान मदद की है. फिलहाल हम मोल्डाविया में ऐसा कर रहे हैं. मांग इतनी ज्यादा है कि हम इसे पूरा नहीं कर पा रहे. हर साल हमारी ट्रेनिंग में 3,000 मीडिया कर्मचारी हिस्सा लेते हैं. हम वहां उपस्थित रहने और लंबी साझेदारी की पहल करते हैं. हमारी अकादमी में मास्टर्स ऑफ मीडिया स्टडीज के जरिए हमारे पार्टनर के पास और शिक्षा हासिल करने का मौका है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया विकास के संदर्भ में डीडब्ल्यू अकादमी जर्मनी के प्रमुख संगठनों में से है.

डॉयचे वेले ने हाल ही में शॉर्ट वेव से मल्टीमीडिया की तरफ रुख किया है- क्या यह दुनिया भर में बदलाव की मांग थी?

1953 के बाद से अंतरराष्ट्रीय रेडियो और वैश्विस संचार में जबरदस्त बदलाव आया है. अगर कोई संगठन इन चुनौतियों का स्थायी तौर पर सामना नहीं करता और लचीला नहीं हो पाता तो वह खेल से बाहर हो जाएगा. हमनें बहुत पहले डिजिटल प्रोडक्शन और ट्रांसमिशन शुरू किया. जर्मनी में हम पहले सार्वजनिक संगठन थे जो इंटरनेट पर आए. मल्टीमीडिया में भी हम आगे रहे हैं. हमारे साथ जो ट्रेनिंग करता है वह कैमरे के सामने, माइक्रोफोन और ऑनलाइन कामों में फिट बन जाता है. काफी पहले से सोशल मीडिया हमारे यहां 30 भाषाओं में पत्रकारिता जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है.

इंटरव्यूः होफमान योहानेस/एमजे

संपादनः आभा मोंढे