जंग के पैसे से जेवर | मनोरंजन | DW | 23.01.2014
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मनोरंजन

जंग के पैसे से जेवर

आतंकवाद से पिस रहे देश पाकिस्तान को दुनिया भर से मदद मिलती है. लेकिन इस पैसे का बहुत बड़ा हिस्सा अय्याशी और महंगे तोहफे खरीदने में निकल जाता है.

समाचार एजेंसी एएफपी ने इन दस्तावेजों को देखने का दावा किया है, जिससे साबित होता है कि पैसों का गलत इस्तेमाल हो रहा है. इसकी वजह से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति को भी परेशानी हो रही है, जिसका गठन 2000 में किया गया था. अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने 9/11 की आतंकवादी घटना के बाद पाकिस्तान पर धन की बारिश की थी ताकि तालिबान और अल कायदा के खिलाफ लड़ाई में उसकी हिस्सेदारी को अहम बनाया जा सके.

इसके अलावा समिति को पाकिस्तान सरकार से 2009 से 2013 के बीच 42 करोड़ रुपये मिले हैं. पाकिस्तान के एक खोजी पत्रकार उमर चीमा ने इससे जुड़े दस्तावेज हासिल किए हैं, जिनमें यह जानकारी है. इस वक्त रहमान मलिक पाकिस्तान के गृह मंत्री थे, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का खासमखास माना जाता है.

Porträt Rehman Malik

पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक

मंत्री के भतीजे की घड़ी

कई दस्तावेजों में खुफिया सूत्रों के खर्च का ब्योरा है. इनमें गाड़ियों की मरम्मत का जिक्र है और कर्मचारियों के ओवरटाइम का भी. लेकिन इन्हीं दस्तावेजों में अमेरिकी और ब्रितानी दूतावास के अधिकारियों को तोहफे देने की रसीदें भी नत्थी हैं. इसके अलावा पत्रकारों को फूल और मिठाइयों की रसीदें भीं. 70,000 रुपये की एक रसीद में लिखा है, "गृह मंत्री के भतीजे की शादी में खरीदी गई दो घड़ियों की रसीद". दस्तावेजों में साफ जिक्र है कि मलिक जब 2012 के रोम इंटरपोल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए, तो अपने साथ एक महंगा हार, लकड़ी के टेबल और टैबलेट कंप्यूटर तोहफों के तौर पर ले गए.

इसके अलावा आंतकवाद के खिलाफ दिए गए पैसों से ही पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ के बेटे की शादी में महंगी कालीनें भी खरीदी गईं. किसी अनजान व्यक्ति के लिए 3000 डॉलर के सोने के जेवर खरीदे गए, तो 1500 डॉलर का जेवर का दूसरा बिल भी दिखा. दिसंबर, 2012 में इस्लामाबाद के एक हस्तकला की दुकान को 23,000 डॉलर का भुगतान किया गया. यहां से स्थानीय नेताओं, यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों और भारत तथा ईरान के अफसरों को तोहफे दिए गए थे.

बकरों पर खर्चा

इतना ही नहीं, 800 डॉलर की रसीद कुर्बानी के बकरों के नाम है. इनमें कसाई का मेहनताना भी शामिल है. रसीद पर लिखा है, "ईद उज जुहा के मौके पर जानवर को जिबह करने का चार्ज". दस्तावेज बताते हैं कि इन्हीं पैसों से जकात और खैरात भी दे दिया गया.

पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 2010-13 के दौरान गृह मंत्रालय के खर्च के ऑडिट का आदेश दे दिया है. मंत्रालय के प्रवक्ता दानयाल गिलानी ने इस बात की पुष्टि की लेकिन यह नहीं बताया कि जांच कब तक पूरी होगी. भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश में शरीफ सरकार ने पिछले साल सत्ता में आने के बाद 16 मंत्रालयों में खुफिया राशि के मद को खत्म कर दिया है.

मलिक की बात

महंगी टाइयों और बैंगनी रंग से बालों को रंगने के लिए मशहूर रहमान मलिक ने ट्विटर पर अपना बचाव किया है. यह पूछे जाने पर कि कुछ रसीदों पर हाथ से निर्देश क्यों लिखे हैं, मलिक का कहना है, "आप जानते हैं कि पाकिस्तान कैसे चलता है. इसमें सिर्फ मेरा नाम लिखा है. इसका मतलब यह नहीं कि मैं दोषी हूं." उन्होंने ट्वीट किया है कि तोहफे देने का काम तो 15 साल से चल रहा है.

2008 में डेनियल पर्ल फेलोशिप अवार्ड जीत चुके चीमा का कहना है कि ये रसीदें बताती हैं कि किस तरह देश के नेताओं ने उस खतरे के पैसे का गलत इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से देश में हजारों लोगों की जान गई है, "ये चीजें साफ तौर पर बताती हैं कि हमारे नेता किस तरह एक आपदा को अपने फायदे का कारोबार बना लेते हैं." निराश चीमा का कहना है कि अगर सब कुछ इतिहास के मुताबिक ही चलेगा तो इस भ्रष्टाचार पर लगाम भी नहीं लगेगा.

एजेए/एमजे (एएफपी)

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