1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

छात्रों का ब्लड कनेक्ट

रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाता है. उद्देश्य है दुनिया को रक्तदान की अहमियत समझाना. युवाओं में इसका असर भी देखने को मिल रहा है.

भारत में ऐसे कई युवा समूह सक्रिय हैं, जिन्होंने देश में रक्त की कमी को दूर करने का बीड़ा, अपने कंधों पर उठा रखा है. दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने ऐसा ही एक समूह बनाया है, ब्लड-कनेक्ट. इस मुहिम से जुड़े नचिकेता गोयल ने डीडब्ल्यू से कहा कि "जब हमारे रक्तदाता मित्र रक्तदान के लिए अन्य लोगों को प्रेरित करेंगे तो यह मुहिम एक आंदोलन का रूप ले लेगी."

इस अभियान की नींव आईआईटी दिल्ली के छात्र नितिन गर्ग और उनके मित्र उत्कर्ष ने करीब 3 साल पहले डाली थी. आईआईटी दिल्ली के ही छात्र सुमंथ चिंथाला इस अभियान में नितिन के साथी रहे हैं. सुमंथ ने डीडब्ल्यू को बताया 3 साल पहले जब नितिन के एक परिचित को खून की जरूरत पड़ी तो इसकी शुरुआत हुई. उसके बाद नितिन और उनके साथियों ने संकल्प लिया कि रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जाने देंगे. आज उनके साथ 6500 से ज्यादा रक्तदाता हैं. जो किसी भी जरूरतमंद की सहायता के लिए तैयार हैं. सुमंथ के अनुसार "इस अभियान ने तीन सालों में 17000 से अधिक लोगों की जान बचाई है."

भारत में रक्तदान के प्रति उत्साह नहीं

भारत सरकार का केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ाने पर जोर दे रहा है. सरकार की इस पहल का समर्थन ‘ब्लड-कनेक्ट' के सदस्य भी करते हैं. देश में सुरक्षित रक्त की कमी को पूरी करने के लिए युवा रक्तदाताओं को प्रेरित करने के लिए इस अभियान को विस्तार दिया जा रहा है. नचिकेता ने बताया, "अस्पतालों में में रक्त की आवश्यकता प्रति वर्ष पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. हर दो सेकेंड में किसी एक व्यक्ति को खून की आवश्‍यकता होती है. महज 450 मिली खून कम से कम तीन लोगों का जीवन बचा सकता है.

ब्लड-कनेक्ट को मिल रहा है समर्थन

इस मुहिम से जुडी श्वेता ने डीडब्ल्यू को बताया कि, ज्यादा से ज्यादा जरुरतमंदों तक पहुचने की कोशिश अब रंग ला रही है. पिछले साल 41 रक्तदान शिविर का आयोजन ब्लड-कनेक्ट मुहिम के तहत किया गया. ये सारे शिविर दिल्ली एनसीआर इलाके में लगाये गए. हर शिविर में 100 से 150 लोगों के रक्तदान ने अभियान से जुड़े लोगों का उत्साह दुगना कर दिया. नचिकेता बताते हैं कि ब्लड-कनेक्ट का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. कॉलेज कैंपस से बाहर जा कर कारोबारी दफ्तरों में भी रक्तदान के शिविर लगाये जा रहे हैं. (फैशन के जरिए रक्तदान को बढ़ावा)

रक्तदान और चुनौती

देश के लगभग सभी ब्लड बैंक रक्त की कमी से जूझ रहे हैं. ब्लड कनेक्ट अभियान से जुडी श्वेता कहती हैं, "लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता का आभाव है. रक्तदान से जुडी गलतफहमियों के चलते लोग रक्तदान से कन्नी काटते हैं." आंकड़ों के अनुसार देश में रक्तदान करने में सक्षम आबादी में से सिर्फ चार फीसदी लोग ही रक्तदान करते हैं. वैसे सरकारी आकड़ों के अनुसार हर साल देश में 1.14 करोड़ यूनिट रक्त की ज़रूरत होती है लेकिन मात्र 93.32 लाख यूनिट रक्त ही जमा हो पाता है. सरकार इस कमी को दूर करने के लिए रेडक्रॉस और दूसरी संस्थाओं के साथ सहयोग कर रही है. ब्लड-कनेक्ट भी कुछ सरकारी अस्पतालों और अन्य संगठनों के साथ मिल कर लोगों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है.

नवी मुंबई के येरला मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉ आदित्य बताते हैं कि ज्यादातर लोगों को इस बात का डर होता है कि रक्तदान करने से कमजोरी या दूसरी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. स्वयं रक्तदान के लिए तैयार रहने वाले आदित्य कहते हैं, "रक्तदान करना बेकार की चीज है, समाज की इस सोच को बदलना होगा.”

महिला रक्तदाताओं की भारी कमी

ब्लड कनेक्ट के हेल्पलाइन प्रमुख आकाश गोयल ने कुछ चौंकाने वाली बातें बताई. उन्होंने कहा, 'दिल्ली की अधिकांश छात्राओं के रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर कम है' वे कहते हैं कि रक्तदान की इच्छुक 60-70 फीसदी लड़कियां रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी, रक्ताल्पता या कम वजन के चलते रक्तदान नहीं कर पातीं. वे कहते हैं कि 18 से 60 की उम्र के बीच किसी भी महिला का वजन 45 किलोग्राम या इससे अधिक होना चाहिए. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकड़े भी आकाश के दावे से मेल खाते हैं.

अभियान को आन्दोलन बनाने का सपना

टीम के सदस्य अपने अभियान को देश के दूसरे शहरों में भी फैलाना चाहते हैं. दिल्ली से बाहर जयपुर, जोधपुर, कानपुर, चंडीगढ़ और लखनऊ के युवाओं को अपने साथ जोड़ने की योजना के साथ ब्लड-कनेक्ट अब इन शहरों में भी रक्तदान शिविर का आयोजन करने जा रहा है. इस अभियान में युवाओं खासकर छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कॉलेज के छात्रों के बीच पहुंचने की कोशिश की जा रही है. ब्लड कनेक्ट अन्य रक्तदाता समूहों को एक मंच पर लाने की योजना पर भी काम कर रहा है ताकि स्वैच्छिक रक्तदान के जरिये जरुरतमंदों को रक्त की आपूर्ति की जा सके.

रिपोर्ट: विश्वरत्न श्रीवास्तव, मुंबई

संपादन: एन रंजन

DW.COM

WWW-Links