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दुनिया

चेक गणराज्य में रेडियोएक्टिव हो गया सूअर का मांस

इन सर्दियों में चेक गणराज्य के लोगों को जंगली सूअर का मांस खाने से परहेज करना पड़ रहा है, क्योंकि उसमें रेडियोधर्मी पदार्थ पाए गए हैं. सूअरों में यह रेडियोधर्मी पदार्थ एक जंगली मशरूम खाने से आया है.

इस मशरूम को चेक गणराज्य, ऑस्ट्रिया और जर्मनी के साथ-साथ कई जगहों पर जंगली सूअर खाते हैं. ये मशरूम रेडियोएक्टिव आइसोटॉप सेसियम 137 पदार्थ के उच्च स्तर को अवशोषित कर सकते हैं. तीन दशक पहले चेरनोबिल में परमाणु हादसे के चलते बड़ी मात्रा में सेसियम 137 का रिसाव हुआ था. इस रिसाव ने सुमावा की पहाड़ियों को सबसे अधिक प्रभावित किया था. यहीं पैदा होने वाले इस मशरूम को जंगली सूअर खा रहे हैं जिसके चलते उनके शरीर में सेसियम की मात्रा बढ़ गई है और इनका मांस भी रेडियोएक्टिव हो गया है.

सरकारी वेटेनरी विभाग में काम करने वाली जिरी द्रपाल ने बताया कि सुअरों के मशरूम खा लेने से यह समस्या आ रही है. कुल मिलाकर यह एक मौसमी समस्या है. लेकिन इसकी अवधि लंबी है.

द्रपाल ने बताया कि सेसियम 137 की अर्धआयु करीब 30 वर्ष होती है. इसका मतलब है कि अपने मूल स्तर से आधा होने में इसे 30 साल लग जाते हैं. इसके बाद फिर 30 साल नए स्तर से आधा कम होने में लगेंगे. यह प्रक्रिया इसी तरह चलती रहती है. इसलिए सुअरों के मांस के साथ यह समस्या बनी रह सकती है.

चेक गणराज्य में सुअर का मांस बहुत पसंद किया जाता है लेकिन इसमें पाए जा रहे इस रेडियोधर्मी पदार्थ के चलते इसकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. द्रपाल ने कहा कि अब न केवल सुअर का मांस बल्कि किसी भी जानवर के मांस को ग्राहकों तक पहुंचने से पहले उसमें रेडियोधर्मी पदार्थ होने की जांच की जानी चाहिए.

एए/एके (रॉयटर्स)

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