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जर्मन चुनाव

चुनाव में सोना कैसे खरीदें

आदर्श आचार संहिता ने राजनेताओं के साथ आम लोगों और कारोबारियों को भी परेशान कर दिया है. इसके तहत 50,000 या उससे ज्यादा नकदी लेकर चलने पर पाबंदी है. शादी ब्याह का सीजन भी है. ऐसे में गहनों की खरीदारी कैसे हो.

लोगों और व्यापारियों को इनकम टैक्स विभाग उड़नदस्तों की पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है. चुनावों के दौरान इस पाबंदी के चलते कारोबार में भी गिरावट आई है.

आयोग ने तो चुनावी धांधली और वोटरों में पैसे बांटने के आरोपों से निपटने के लिए पाबंदी लगाई है. आयोग के निर्देश पर इनकम टैक्स विभाग नकदी की आवाजाही पर कड़ी निगाह रख रहा है और इसकी वजह से सोने के गहनों और दूसरी चीजों की बिक्री में गिरावट आई है. नियम के मुताबिक, "अगर कोई भी व्यक्ति 50,000 रुपये या उससे ज्यादा की रकम के साथ पाया गया तो उससे उस रकम के स्रोत और खर्च के मद में पूछताछ की जा सकती है". पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उसे छोड़ा जाएगा. आयोग के डर से लोग ज्यादा रकम साथ ले कर चलने से कतरा रहे हैं.

शादी का सीजन

चुनावों के साथ भारत में शादियों का भी सीजन है. इसके अलावा इसी दौरान अक्षय तृतीया भी पड़ी, जिस दिन सोना खरीदना शुभ समझा जाता है. लेकिन सर्राफा व्यापारियों को इस साल कारोबार में गिरावट का अंदेशा है. ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन के निदेशक बच्छराज बामलवा कहते हैं, "सोने की मांग में गिरावट आई है. चुनाव आयोग की पाबंदी की वजह से लोग ज्यादा नकदी लेकर नहीं निकल रहे हैं. बिना खास जरूरत के कोई भी ग्राहक घर से नहीं निकल रहा है."

इस मामले में सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण इलाकों में है. गांवों में डेबिट या क्रेडिट कार्ड और चेक या इंटरनेट बैंकिंग सेवा का विस्तार नहीं होने की वजह से लोगों को दिक्कत हो रही है. मोटे आंकड़ों के मुताबिक, सोने के गहनों के 70 फीसदी ग्राहक ग्रामीण इलाकों के होते हैं. कोलकाता ज्वेलर्स एसोसिएशन के एक सदस्य विनीत पारेख कहते हैं, "इनकम टैक्स विभाग नकदी की आवाजीह को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है. इसलिए लोग नकद रकम लेकर चलने से बच रहे हैं."

हवाला पर नजर

केंद्र सरकार हवाला कारोबार पर पहले से ही नजर रख रही थी. लेकिन चुनावों के दौरान आयोग ने इस पर और सख्ती अपनाई. इसके बावजूद बैंकों के जरिए बड़ी रकम का लेन देन यानि ट्रांसफर नहीं होने से अर्थशास्त्री चिंता में हैं. अर्थशास्त्री मनोज जैन कहते हैं, "इससे साफ है कि हवाला कारोबारी सरकार की निगाहों को धोखा देते हुए अपना काम कर रहे हैं." एक अन्य अर्थशास्त्री सुनील सेनगुप्ता कहते हैं, "अभी भारतीय बैंकों के कामकाज में एकरूपता नहीं आ पाई है. इसके अलावा उनमें आधारभूत सुविधाओं की कमी है." अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, अर्धशहरी और देहाती इलाकों तक बैंकों की गहरी पहुंच नहीं होना भी इस ट्रांसफर की राह में बाधा है. विशेषज्ञों का कहना है कि हवाला पर पूरी तरह अंकुश लगा कर बैंकों के जरिए लेन देन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत ढांचे में सुधार के साथ ही पूरी प्रक्रिया का सरलीकरण भी जरूरी है.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः ए जमाल

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