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दुनिया

चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं राजनीतिक दल

भारत के चुनाव आयुक्त ने देश के राजनीतिक परिदृश्य से गायब होते सिद्धांतों और नैतिकता को लेकर दलों पर निशाना साधा है. उनका यह बयान हाल ही में गुजरात राज्यसभा की एक सीट पर हुए विवादित चुनाव के बाद आया है.

चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने देश के सभी राजनीतिक दलों पर किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने के लिए तैयार होने का आरोप लगाया. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रैटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में चुनावी और राजनीतिक सुधारों पर अपने विशेष संबोधन में रावत ने कहा, "हमें लगातार पता चलता रहता है कि सबसे ज्यादा जोर किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने पर होता है, चाहे इसके लिए नैतिकता ताक पर लगानी पड़े. किसी भी हाल में चुनाव जीतना अब राजनीति में आम है."

उनका यह बयान हाल ही में गुजरात राज्यसभा की एक सीट पर हुए विवादित चुनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है. करीब दस दिन पहले ही आयोग को गुजरात में राज्य सभा की एक सीट पर हुए चुनाव में अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करना पड़ा था. आयोग ने कांग्रेस पार्टी के दो विद्रोही विधायकों के वोट को रद्द कर दिया. 8 अगस्त को चुनाव से पहले ही कांग्रेस के छह विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गये. आगे भी ऐसा होने के डर से कांग्रेस ने अपने बाकी 44 विधायकों को इकट्ठा कर कर्नाटक के एक लक्जरी रिजॉर्ट में रखवा दिया था. उस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल खड़े थे.

इसके बाद अचानक कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार से संबंधित करीब 60 ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापे मारे. शिवकुमार वही नेता थे, जो कांग्रेस विधायकों का कर्नाटक प्रवास के दौरान ध्यान रख रहे थे. इस छापे के लिए बिल्कुल वही समय चुने जाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर अपनी शक्ति का गलत इस्लेमाल करने का आरोप लगाया और इस बाबत चुनाव आयोग से सुरक्षा की गुहार की.

लेकिन ठीक चुनाव के दिन आयोग ने एक अप्रत्याशित फैसले में संविधान के आर्टिकल 324 के तहत बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने वाले दो विद्रोही कांग्रेस एमएलए के मत को ही खारिज कर दिया. उन्होंने पाया कि इन विधायकों ने बीजेपी को दिया अपना मत बीजेपी प्रमुख अमित शाह को दिखाया था जो कि वोट की गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन है.

चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों और नेताओं के ऐसे नैतिक समझौते किये जाने की स्वीकार्यता पर सवाल खड़े करते हुए रावत ने बिके हुए मीडिया संस्थानों और अघोषित स्रोतों से पार्टियों को मिलने वाले चंदे पर भी कार्रवाई करने की जरूरत पर बल दिया.

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