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दुनिया

चुनाव के बाद नतीजों पर बहस

जर्मनी में चुनाव हो गए, लेकिन नई सरकार बनाने का सिरदर्द बाकी है. पार्टियों की कार्यकारिणी में नतीजों पर विचार हो रहा है, जबकि बुरा प्रदर्शन करने वाली एफडीपी और ग्रीन पार्टियों में बड़े नेताओं ने इस्तीफे की पेशकश की है.

चांसलर अंगेला मैर्केल की सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एफडीपी की भारी हार के बाद पार्टी प्रमुख और अर्थनीति मंत्री फिलिप रोएसलर ने भी इस्तीफा देने की घोषणा की है. पार्टी कार्यकारिणी में भी फेरबदल किए जाने पर विचार हो रहा है. एसडीपी को पिछले चुनावों में 14.6 फीसदी वोट मिले थे, जबकि आंतरिक कलह और लॉबी ग्रुपों को फायदे पहुंचाने के आरोपों का शिकार रही पार्टी को इस साल के चुनाव में सिर्फ 4.8 फीसदी वोट मिले. 1949 में संघीय जर्मनी के गठन के बाद यह पहला मौका है जब उदारवादी एफडीपी संसद में नहीं है.

ग्रीन पार्टी के मतों में भी 2.3 फीसदी की कमी आई है और उसे उम्मीद से बहुत कम वोट मिले हैं. पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने और एसपीडी के साथ मिलकर अंगेला मैर्केल की जगह सरकार बनाना चाहती थी, लेकिन उसका यह चुनावी लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया. निराशाजनक नतीजों के बाद पार्टी के अध्यक्षों क्लाउडिया रोठ और चेम ओएजदेमिर ने पूरी पार्टी कार्यकारिणी की ओर से इस्तीफा पेश कर दिया है. पार्टी प्रमुख चेम ओएजदेमिर ने कहा है कि काम काज पहले की तरह नहीं चल सकता, नया नेतृत्व और नए मुद्दे भी इसका हिस्सा हैं.

रविवार को हुए चुनाव में करीब 8 फीसदी ज्यादा वोट पाने के बावजूद चांसलर अंगेला मैर्केल के सामने नई सरकार बनाने की चुनौती है. उनकी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिला है, जबकि सहयोगी पार्टी एफडीपी पांच प्रतिशत वोट न पाने के कारण संसद में मौजूद नहीं है. नई संसद में सिर्फ चार पार्टियां हैं, जिनमें से डी लिंके के साथ मैर्केल सरकार नहीं बनाएंगी. उनके सामने सिर्फ एसपीडी या ग्रीन पार्टी के साथ सरकार बनाने का विकल्प है. एसपीडी अभी ना नुकुर कर रही है, तो ग्रीन पार्टी के अंदर मैर्केल की अनुदारवादी सीडीयू के साथ सरकार में जाने का कोई उत्साह नहीं है.

एसपीडी ने भी डी लिंके के साथ सरकार न बनाने की घोषणा कर रखी है, हालांकि आंकड़ों के हिसाब से एसपीडी, ग्रीन और डी लिंके की बहुमत सरकार बन सकती है. लेकिन नाटो की सदस्यता, सेना की विदेशों में तैनाती और श्रम बाजार जैसे कई मुद्दों पर इन पार्टियों के बीच बड़े मतभेद हैं. इसके बावजूद एसपीडी नेताओं ने मैर्केल की सीडीयू के साथ महागठबंधन बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. पार्टी की महासचिव आंद्रेया नालेस ने महागठबंधन की संभावना से इंकार नहीं किया है लेकिन कहा है कि यह कोई स्वाभाविक बात नहीं है.

सीडीयू और एसपीडी 2005 के चुनावों के बाद चांसलर अंगेला मैर्केल के नेतृत्व में महागठबंधन बना चुके हैं, लेकिन साझा सरकार का लाभ मैर्केल को मिला और 2009 के चुनावों में एसपीडी के वोटों में कमी आी है. पार्टी अगले चुनावों को देखते हुए सोच समझकर फैसला लेना चाहती है. दूसरी ओर महागठबंधन एकमात्र विकल्प नहीं है. सीडीयू ग्रीन पार्टी के साथ भी गठबंधन बनाने की कोसिश कर सकती है. एसपीडी के नेता ओलफ शॉल्त्स ने कहा है कि यदि बातचीत की जरूरत होगी तो हम उसे बारे में विचार करेंगे. एसपीडी और ग्रीन पार्टी के रुख को देखते हुए गठबंधन वार्ताएं मुश्किल लगने लगी हैं.

चुनावों के बाद अंगेला मैर्केल बहुत ताकतवर होकर उभरी हैं. उनकी पार्टी बहुत कम अंतर से बहुमत हासिल नहीं कर सकी है. एसपीडी और ग्रीन पार्टी के नेताओं को यह डर भी सता रहा है कि मैर्केल के साथ जाने से ये पार्टियां कमजोर पड़ सकती हैं. ग्रीन पार्टी ने मैर्केल के साथ गठबंधन बनाने पर संदेह दताया है तो मैर्केल के मोर्चे की सीएसयू पार्टी भी ग्रीन के साथ सहयोग से इंकार कर रही है. पार्टी प्रमुख और बवेरिया के मुख्यमंत्री ने महागठबंधन का समर्थन करने से भी इंकार किया है.

एसपीडी के अंदर भी नई सरकार बनाने का लक्ष्य पूरा न होने के बाद इस्तीफों की मांग हो सकती है. पार्टी प्रमुख जिगमार गाब्रिएल ने चांसलर उम्मीदवार पेयर श्टाइनब्रुक का आभार व्यक्त किया है कि वे नेतृत्व में बने रहने को राजी है. पार्टी कार्यकारिणी इसका फैसला लेगी कि एसपीडी की भावी रणनीति क्या होगी.

एमजे/एनआर (डीपीए)

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