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दुनिया

चुनाव आयोग ने वोटिंग का वक्त बदला

नक्सली हिंसा के साए के बीच बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे दौर में रविवार को 45 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. शुक्रवार रात जिस शिवहर जिले में नक्सली हमले में पुलिस के सात जवान मारे गए, वहां भी इसी दौर में मतदान होना है.

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पहले चरण में 47 सीटों पर मतदान हो चुका है. राज्य में पहले दौर में 54 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े. अब जिन सीटों पर वोटिंग होनी है वे उत्तरी बिहार के इलाके हैं. इनमें बाढ़, पिछड़ापन और बेरोजगारी ही सबसे अहम मुद्दे हैं. तमाम राजनीतिक दलों ने अपने अभियान के दौरान इन्हीं मुद्दों पर वोट मांगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहां लोगों से राज्य में विकास की प्रक्रिया जारी रखने के लिए जनता दल (यू)-भाजपा गठबंध को वोट देने की अपील की, वहीं दूसरे दलों ने राज्य में बह रही भ्रष्टाचार की कथित गंगा पर अंकुश लगाने के लिए नीतीश सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने की अपील की.
दूसरे दौर में जिन सीटों पर चुनाव होने हैं, वे पूर्वी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों के तहत हैं. इस दौर में कुल 98.45 लाख वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इन 45 सीटों के लिए 623 उम्मीदवार मैदान में हैं. उनमें 46 महिलाएं भी शामिल हैं.

इस दौर में 42 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात बजे से शाम के पांच बजे तक मतदान होगा. लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर, पारू और साहेबगंज विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से तीन बजे तक ही वोट डाले जाएंगे. ये इलाके नक्सल प्रभावित हैं.
इस बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. चुनाव विभाग के मुताबिक, लगभग सभी मतदान केंद्रों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी. ध्यान रहे कि मतदान शुरू होने के लगभग 36 घंटे पहले नक्सलियों ने शिवहर में एक बारूदी सुरंग से विस्फोट किया. इसमें सात पुलिस वालों की मौत हो गई. विस्फोट के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है.
चुनाव के दौरान बिहार में माओवादियों की यह पहली बड़ी वारदात है. घटना शुक्रवार रात राजधानी पटना से लगभघ पौने दो सौ किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित झिटकैया इलाके में हुई. इलाके की गश्त पर निकले पुलिस जवानों की जीप को बारूदी सुरंग विस्फोट का निशाना बनाया गया. इस घटना के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि और सरकार के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों ने परिस्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने का फैसला किया.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः वी कुमार

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