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चीन वैश्विक खतरा: जापान

जापान ने अपनी सामरिक नीति में बड़ा बदलाव किया है. चीन को बड़ा वैश्विक खतरा मानते हुए जापान मिसाइल डिफेंस सिस्टम और पनडुब्बी बेड़े को ताकतवर बनाने जा रहा है. नए लड़ाकू विमानों के साथ भारत की जरूरत भी महसूस हुई.

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जापान की कैबिनेट ने नेशनल डिफेंस प्रोग्राम संबंधी दिशानिर्देशों को मंजूर कर दिया है. इसके तहत जापान अपनी पनडुब्बियों के बेड़े को बड़ा करेगा. दक्षिणी कमान के वायुसैनिक बेड़े का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा. नई रक्षा नीति के तहत जापान ने टैंक और मशीनगन जैसी तकनीकों से पीछ़ा छुड़ाने के संकेत दिए हैं. टोक्यो की रणनीति है कि मिसाइल डिफेंस सिस्टम के तहत 12 मिसाइलें देश के अलग अलग हिस्सों में तैनात की जाएंगी. ये मिसाइलें हमलावर मिसाइल को हवा में भेद देंगी. नई गाइडलाइंस में कहा गया है, ''चीन अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है और पड़ोसी देशों से सटे समुद्री इलाके में गतिविधियां बढ़ा रहा है.''

Chinesische Panzer

चीन की सेना

जापान के एक अखबार ने नई सुरक्षा नीति के कुछ हिस्से छापे हैं. इनके मुताबिक, ''चीन की सैन्य शक्ति के बारे में सटीक जानकारी न होने की वजह से इलाके के देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए के चिंता बढ़ गई है.''

शीत युद्ध की समाप्ति के बाद जापान में यह अब तक सबसे बड़ा सुरक्षा संबंधी बदलाव हैं. दो दशक बाद एशिया के पूर्वी कोने में सामरिक समीकरण बदल चुके हैं. चीन के अलावा जापान को उत्तर कोरिया से भी डर लगने लगा है. उत्तर कोरिया दो बार परमाणु परीक्षण कर चुका है. हाल ही में उसने दक्षिण कोरियाई द्वीप पर हमला भी किया.

Nordkoreanische Militär

उत्तर कोरिया का सैन्य प्रदर्शन

जापानी सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीनी नौसेना की बढ़ती ताकत जापान और अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बन गई है. टोक्यो की ओबरलिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अकीरा कातो कहते हैं, ''नए दिशानिर्देशों से साफ है कि चीन के साथ शक्ति संतुलन करने के लिए जापान ने अपने नजरिए में बड़ा बदलाव किया है. चीनी नौसेना की बढ़ती ताकत अमेरिका और जापान के लिए बड़ा खतरा है.'' इसी साल जापान ने एक चीनी नौका को कब्जे में ले लिया था. आरोप है कि चीनी नौका जापान की समुद्री सीमा में घुसी. इसके बाद दोनों देशों में खासा विवाद हुआ और बीजिंग के कड़े रुख के आगे जापान को झुकना पड़ा.

जापान की विदेश नीति में भी बड़े बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं. जापान में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिकी सेना का अड्डा है. वामपंथ की ओर झुकी मौजूदा सरकार पहले अमेरिका से अपनी सेनाएं हटाने को कह रही थीं. लेकिन नई सुरक्षा नीति में अमेरिका और जापान की दोस्ती को 'अनिवार्य' कहा गया है. साथ ही दक्षिण कोरिया, भारत, ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी एशियाई देशों के साथ सुरक्षा साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है. भारत, दक्षिण कोरिया और पूर्वी एशिया के कई देशों के साध चीन के संबंध बहुत ज्यादा मधुर नहीं हैं. टोक्यो अब नैटो और यूरोपीय संघ के और करीब भी आना चाह रहा है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: महेश झा

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