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दुनिया

चीन में विकास से पिछड़े बुजुर्ग

चीन में बूढ़े लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इन्हें बुढ़ापे में सहारा देने के लिए बहुत कम लोग बचे हैं. इनके खुद के बच्चे भी पैसों के अभाव में मां बाप की मदद नहीं कर पा रहे.

हे शियांग अपने बेटे को पैसे भेजती हैं. 51 साल की हे दाई हैं. वे कुछ साल और काम करना चाहती हैं, फिर वह चीन के गांव में अपने घर पर जाकर रहने लगेंगी और पैसे बचाने के लिए सब्जियां उगाएंगीं.

हे को अपने बेटे से मदद की ज्यादा उम्मीद नहीं, "अगर वह खुद अच्छा नहीं कर रहा तो अपनी बूढ़ी मां को कैसे संभालेगा?" हे के साथ स्ट्रोलर में छोटा बच्चा रोने लगता है. उसे चुप कराकर हे कहती हैं, "मैं अपना ख्याल खुद रख लूंगी."

नीतियों से नुकसान

चीन में बुजुर्गों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि उनके बच्चे देखभाल करने में असमर्थ हैं. परंपरागत परिवारों में अकसर बुजुर्गों का ख्याल रखा जाता था लेकिन माना जा रहा है कि 2030 तक 35 करोड़ लोग 60 साल पार कर जाएंगे और युवाओं पर बोझ असहनीय हो जाएगा.

इस संकट की वजह चीन की एक बच्चे वाली नीति है और सरकार इसका नुकसान अभी से झेल रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मजदूरों की कमी पड़ सकती है और आने वाले सालों में अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा.

चीन में युवा वैसे ही जूझ रहे हैं. हे का बेटा घर के किराए और आर्थिक विकास में धीमेपन का शिकार हो रहा है. चीन की सरकार ने बुजुर्गों की मदद के लिए स्कीम चलाई हैं लेकिन आंकड़ों के मुताबिक 1000 बुजुर्गों के लिए केवल 25 सीटें हैं. शोध संस्थान ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूशन में काम कर रहे वांग फेंग का कहना है कि चीन के बूढ़ों को संभालने के लिए प्रयोगों का यह बड़ा दौर होगा.

चीनी परंपरा

चीनी संस्कृति में बच्चे अपने बुजुर्ग मां बाप का ख्याल रखते हैं लेकिन आधुनिक जिंदगी में ऐसा करना नामुमकिन हो गया है. बीजिंग में एक तीन सितारा होटल को नर्सिंग होम बनाया गया है. यहां बुजुर्ग ताश खेलते हैं या चीनी पारंपरिक खेल माजोंग की मेज पर बैठते हैं.

ओल्ड एज होम में रहने वाली जू चुआनशून कहती हैं, "अगर मैं घर पर रहती तो कितना अकेलापन होता. यहां कम से कम और लोगों से बात हो जाती है. वक्त जल्दी बीतता है." जू के बच्चों की अच्छी नौकरियां हैं और जू के रहने का भी वही खर्चा उठाते हैं. हर महीने के यहां 8000 यूआन यानी करीब 78,000 रुपये लगते हैं. ज्यादातर चीनी परिवारों के लिए यह बहुत महंगा है.

चीन में भी बाकी देशों की तरह लोगों का मानना है कि बुजुर्गों के लिए घर उनकी मौत के इंतजार के लिए बने हैं. 60 साल के जांग अपने दोस्तों से कहते हैं, "वह कब्रिस्तान जैसा है." बुजुर्ग भी कहते हैं कि बूढ़े लोग अपना घर नहीं छोड़ना चाहते. चाहे ओल्ड एज होम कितना ही अच्छा क्यों न हो, वह घर जैसा नहीं होता.

वहीं कई कंपनियां बुजुर्गों को झांसा देती हैं कि अगर वह अपना घर बेच दें तो उन्हें पेंशन के साथ ओल्ड एज होम का आराम मिलेगा. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि वह अपने बच्चों के लिए घर रखना चाहते हैं. कुछ बुजुर्गों का मानना है कि वह फिट और स्वस्थ रहने की कोशिश करेंगे. अगर वह बीमार पड़ते हैं, तो बच्चों को ही संभालना होगा.

एमजी/एएम (एएफपी)

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