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दुनिया

चीन में फिर भड़की हिंसा

चीन के पश्चिमी इलाके में ताजा हिंसा ने कम से कम 35 लोगों की जान ले ली है. अल्पसंख्यक मुस्लिम उइगुर समुदाय और हान के बीच हुई झड़पों में पुलिस पर भी चाकू से हमला किया गया है.

शिनजियांग इलाके के एक सुदूर शहर में हुई हिंसा में पहले 27 लोगों के मरने की कही गई. सराकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि चाकू से लैस हमलावरों ने पुलिस स्टेशन, सरकारी इमारतों और एक निर्माण की जगह को निशाना बनाया. इन सबको इलाके में हान समुदाय के असर और उनकी बढ़ती तादाद का प्रतीक माना जाता है. कुछ घायल लोगों के दम तोड़ने की वजह से मरने वालों की तादाद बढ़ी है. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक इनमें 11 हमलावर भी हैं जिन्हें गोली मारी गई. इन लोगों ने जिन 24 लोगों की जान ली उनमें दो पुलिस वाले भी थे.

अब तक इन हमलावरों की पहचान या इनके समुदाय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है ना ही यह बता चल सका है कि हिंसा क्यों भडकी. चार हमलावरों की गिरफ्तारी की भी खबरें आ रही हैं. चीन की सरकारी मीडिया ने बुधवार को हुई हिंसा को आतंकवादी कार्रवाई करार दिया है. 2009 में इस प्रांत की राजधानी उरुमची में भारी हिंसा हुई थी और तब करीब 200 लोग मारे गए थे उसके बाद की यह सबसे बड़ी हिंसक घटना है.

सूचना पर रोक

सरकारी मीडिया से मिल रही जानकारी की स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि मुमकिन नहीं है. ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि पुलिस ने हिंसा की घटना वाली जगह के 30 किलोमीटर पहले से ही घेरा डाल रखा है. सुरक्षा कारणों से रिपोर्टरों को वहां जाने से रोक दिया गया है. यहां सूचना के प्रवाह पर भारी नियंत्रण है. चीन सरकार इसे बेहद संवेदनशील मानती है और अशांति को रोकने के लिए उसने बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर रखा है. हालांकि इलाका बड़ा होने के कारण सुरक्षा बल इधर उधर छिटके हुए हैं और अकसर उन पर देर से हरकत में आने के आरोप लगते हैं. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "यह एक आतंकवादी हमला है इस पर कोई सवाल नहीं है. इसकी साजिश किसने रची है इसके बारे में स्थानीय लोग अभी जांच कर रहे हैं."

China Frau mit Kopftuch in Xinjiang vor Mauer mit Schriftzeichen

कई बार शिनजियांग में हिंसा हो चुकी है.

शिनजियांग बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मुस्लिम उइगुर लोग रहते हैं. इसकी सीमा मध्य एशिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से लगती है. बीते सालों में यहां काफी हिंसा हुई है, चार साल पहले तो बहुत भयानक दंगा भी फैला था. इलाके में रहने वाले उइगुर समुदाय की शिकायत है कि हान समुदाय उनसे भेदभाव और उनका दमन करता है.

चीन की नीतियां

आलोचक ताजा घटना समेत हिंसा के सभी मामलों के लिए चीन सरकार की दमनकारी और विभाजनकारी नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं. बहुत से उइगुर मानते हैं कि चीन उनके धर्म और संस्कृति पर कड़े प्रतिबंध लगा रहा है. महिलाओं और बच्चों को मस्जिद में जाने से रोका जाता है और रमजान के पवित्र महीने में उन्हें उपवास भी नहीं रखने दिया जाता.

उधर चीन सरकार का कहना है कि सभी जाति के समुदायों के साथ बराबरी का व्यवहार होता है और हिंसा आतंकवाद है जिसका धर्म या जाति से कोई लेना देना नहीं है. सरकार इलाके में अरबों डॉलर के निवेश की ओर ध्यान दिलाती है. रणनीतिक रूप से यह इलाका इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां तेल गैस के बड़े भंडार है.

एनआर/एएम (एपी)

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