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दुनिया

चीन ने फिर बढ़ाया रक्षा बजट

चीन अपनी रक्षा बजट 10 प्रतिशत से बढ़ाएगा. दक्षिण चीन सागर में गहराते विवाद और जापान से बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए चीन ने अब से अपनी सुरक्षा पर 115 अरब यूरो खर्च करने का फैसला किया है.

17 मार्च को चीन की 3,000 सदस्यों वाली नेशनल पीपल्स कांग्रेस बजट पारित करेगी. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि इस बजट से वह अपनी सेना को आधुनिक बनाना चाहते हैं. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी पीएलए में 25 लाख सैनिक हैं. पीएलए के नौसेना विशेषज्ञ यिन जुओ ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि पीएलए को आधुनिक बनाना है और आईटी को लागू करना है. यिन का कहना था कि चीन की सेना एक ऐसे पड़ाव पर है जहां उसपर ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. यिन ने बताया कि सेना के लिए नए तकनीक वाले कंप्यूटराइज्ड हथियार बनाने में राशि ज्यादा लगेगी और इस तरह के हथियारों से ही चीन की सेना को जीत हासिल हो सकती है.

पिछले साल नवंबर में पार्टी कांग्रेस के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा था कि वह अपनी सेना का आधुनिकीकरण 2020 तक पूरा करना चाहता है.

विदेशी नेताओं और विश्लेषकों ने चीन की सेना पर बढ़ाए खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं. पश्चिमी देशों के कुछ आलोचकों का मानना है कि चीन वास्तव में अपने बजट में एलान की गई राशि से कई गुना ज्यादा पैसे अपनी सेना और हथियारों पर खर्च करता है. लेकिन चीन सरकार अपनी बजट का बचाव कर रही है. संसद के लिए प्रवक्ता फू यिंग ने सोमवार को बताया कि चीन अगर अपनी सेना को और ताकतवर बनाता है तो उससे पूरे इलाके में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा. "चीन की विदेश नीतियां शांतिपूर्ण हैं और उसकी रक्षा नीतियां एशिया में सुरक्षा और शांति को बढ़ावा देंगीं." फू ने कहा कि चीन लगातार संयुक्त राष्ट्र की शांति मिशनों में हिस्सा लेता रहा है और इससे आंका जा सकता है कि चीन किस तरह वैश्विक स्थिरता की ओर अपना योगदान दे रहा है."

चीन ने पिछले साल सितंबर में हवाई जहाज को ले जाने की क्षमता वाला युद्धपोत खरीदा था. चीन इस तरह के युद्धपोत अब खुद बना रहा है. चीन की यह कोशिशें उसके पड़ोसियों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं. टोक्यो में जापान के विदेश मंत्री फूमियो किशीदा ने कहा कि उनकी सरकार चीन की रक्षा नीति पर नजर रखे रहेगी. बीजिंग और टोक्यो दोनो के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. जापान के अलावा फिलिपींस और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर में द्वीपों को लेकर चीन के साथ विवाद में फंसे हैं. भारत भी इस इलाके में तेल खनन करना चाहता है.

रिपोर्टः एमजी/एएम (एपी,डीपीए)

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